प्रोजेक्ट जलधारा के तहत फरसपुरा ग्राम पंचायत में जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार और किसानों की आय वृद्धि का प्रभावी मॉडल विकसित हुआ। सिप्ला फाउंडेशन और बाएफ लाइवलीहुड्स की टीम ने किया स्थलीय अवलोकन।
प्रोजेक्ट जलधारा: फरसपुरा ग्राम पंचायत में जल क्रांति की शुरुआत
प्रोजेक्ट जलधारा ने धार जिले के धरमपुरी विकासखंड स्थित फरसपुरा ग्राम पंचायत को जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का एक शक्तिशाली उदाहरण बना दिया है। यह परियोजना न केवल जल संसाधनों के संरक्षण पर केंद्रित है, बल्कि किसानों की आय, रोजगार और टिकाऊ खेती को भी मजबूती प्रदान कर रही है।
फरसपुरा क्यों बना जल संरक्षण का आदर्श मॉडल
प्रोजेक्ट जलधारा के अंतर्गत किए गए मृदा एवं जल संरक्षण कार्यों ने क्षेत्र की जल संभाव्यता को नई दिशा दी। तालाबों का गहरीकरण, जलग्रहण संरचनाएं और पहाड़ी क्षेत्रों में उपचार कार्यों से भू-जल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
Cipla Foundation और BAIF Livelihoods की अहम भूमिका
इस परियोजना का संचालन सिप्ला फाउंडेशन और बाएफ लाइवलीहुड्स के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। मुंबई से पधारे ट्रस्टी एस. राधाकृष्णन सहित वरिष्ठ टीम द्वारा परियोजना क्षेत्र का स्थलीय अवलोकन किया गया।
जल संरक्षण से खेती में आया बड़ा बदलाव
प्रोजेक्ट जलधारा के चलते सिंचित क्षेत्र में वृद्धि हुई। किसानों ने पहली बार ड्रिप पद्धति से डॉलर चना और सब्जियों की खेती शुरू की। इससे जल उपयोग की दक्षता बढ़ी और लागत में कमी आई।
किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
तालाब डिसिल्टेशन से प्राप्त उपजाऊ मिट्टी खेतों में डालने से फसल उत्पादकता बढ़ी। 320 एकड़ से अधिक क्षेत्र में सिंचाई संभव हुई और 40 से अधिक किसान प्रत्यक्ष लाभान्वित हुए।
रिज टू वैली मॉडल: वैज्ञानिक जल प्रबंधन
मसीदपुरा की पहाड़ी पर प्रोजेक्ट जलधारा के अंतर्गत ‘रिज टू वैली’ अवधारणा से उपचार कार्य किए गए, जिससे वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण संभव हुआ।
ग्रामीण सहभागिता और स्थानीय रोजगार
परियोजना के कारण ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला। ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन से किसानों को मौसम आधारित कृषि सलाह भी मिल रही है।
भविष्य की योजना
सिप्ला फाउंडेशन ने प्रोजेक्ट जलधारा को आगे चलकर एकीकृत ग्राम विकास मॉडल के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई है।
निष्कर्ष
प्रोजेक्ट जलधारा ने यह सिद्ध कर दिया है कि सही योजना, समुदाय की भागीदारी और कॉर्पोरेट-एनजीओ सहयोग से ग्रामीण भारत में स्थायी विकास संभव है।



