विकास के दावों के बीच बदहाल गोराड़ू: सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीण
अनूपपुर के गोराड़ू गांव की जमीनी हकीकत ने उठाए विकास मॉडल पर सवाल
संवाददाता: अभिषेक त्रिवेदी
देश में विकास, आधुनिक सुविधाओं और ‘विकसित भारत’ के संकल्प की चर्चा लगातार हो रही है। बड़े शहरों में तेजी से बदलती तस्वीर और नई परियोजनाओं के बीच ग्रामीण भारत की वास्तविक स्थिति कई बार अलग कहानी बयां करती है। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की कोतमा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गोराड़ू ऐसी ही एक तस्वीर सामने रखती है, जहां आज भी ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।
जहां एक ओर देश डिजिटल सुविधाओं, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक विकास की ओर बढ़ने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर गोराड़ू जैसे गांवों में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी प्राथमिक जरूरतें भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपनी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन हालात में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है।
खराब सड़कें बनीं ग्रामीणों की सबसे बड़ी परेशानी
गोराड़ू गांव की सबसे प्रमुख समस्याओं में से एक खराब सड़क व्यवस्था है। गांव तक पहुंचने वाले मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की खराब स्थिति के कारण रोजमर्रा के कामों से लेकर आपातकालीन परिस्थितियों तक में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बारिश के मौसम में समस्या और गंभीर हो जाती है। खराब रास्तों पर कीचड़ और जलभराव के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है। कई बार ग्रामीणों को जरूरी कामों के लिए गांव से बाहर जाने में भी काफी दिक्कत होती है।
सबसे अधिक परेशानी मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ती है। खराब रास्तों के कारण समय पर चिकित्सा सुविधा तक पहुंचना चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बेहतर सड़क केवल सुविधा नहीं बल्कि उनके जीवन और सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
बिजली व्यवस्था से परेशान ग्रामीण, अंधेरे में कट रही जिंदगी
गोराड़ू में बिजली की समस्या भी लंबे समय से ग्रामीणों की परेशानी का कारण बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, अघोषित बिजली कटौती और लो वोल्टेज की समस्या आम बात है।
बिजली की अनियमित आपूर्ति का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। शाम और रात के समय जब विद्यार्थियों को पढ़ाई करनी होती है, तब कई बार बिजली नहीं होने से उनकी शिक्षा प्रभावित होती है।
इसके अलावा घरेलू कामकाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका असर पड़ता है। रात के समय किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या आपात स्थिति उत्पन्न होने पर अंधेरे के कारण मुश्किलें बढ़ जाती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा आज भी उनके लिए पूरी तरह भरोसेमंद नहीं बन पाई है।
नल-जल योजना पर सवाल, पाइपलाइन पहुंची लेकिन पानी नहीं
सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक पानी पहुंचाने के उद्देश्य से जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन गोराड़ू में ग्रामीणों का आरोप है कि नल-जल योजना का लाभ उन्हें पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में नल तो लगाए गए हैं, लेकिन कई घरों में नियमित पानी की आपूर्ति नहीं होती। योजना के तहत बुनियादी ढांचा तैयार होने के बावजूद पानी की समस्या बनी हुई है।
इसका सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। आज भी कई परिवारों को पानी के लिए दूर स्थित पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। गर्मी के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जब पानी के स्रोतों में कमी आने लगती है।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि योजनाओं के लिए बजट जारी किया जाता है और व्यवस्थाएं बनाई जाती हैं, तो उसका वास्तविक लाभ जमीन पर क्यों नहीं दिखाई देता।
शिक्षा व्यवस्था बदहाल, बच्चों के भविष्य पर संकट
गांव के विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार शिक्षा होती है, लेकिन गोराड़ू में शिक्षा व्यवस्था भी कई चुनौतियों से जूझती नजर आती है।
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में मौजूद प्राथमिक स्कूल सीमित संसाधनों के साथ संचालित हो रहा है। भवन, सुविधाओं और आवश्यक संसाधनों की कमी के कारण बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीण चाहते हैं कि गांव के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले ताकि वे भविष्य में बेहतर अवसर हासिल कर सकें। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में कई अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
शिक्षा व्यवस्था मजबूत किए बिना गांव के सामाजिक और आर्थिक विकास की कल्पना अधूरी मानी जाती है।
स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, छोटी बीमारी भी बन जाती है बड़ी समस्या
गोराड़ू में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। गांव में स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य केंद्र या प्राथमिक उपचार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को छोटी-बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य बीमारी के लिए भी उन्हें दूसरे स्थानों पर निर्भर रहना पड़ता है। आपात स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का सबसे ज्यादा असर गरीब और कमजोर वर्गों पर पड़ता है, क्योंकि उनके लिए बार-बार दूर जाकर इलाज कराना आर्थिक और शारीरिक दोनों रूप से कठिन होता है।
योजनाओं के बावजूद जमीनी बदलाव का इंतजार
गोराड़ू की स्थिति कई सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है। सरकार ग्रामीण विकास के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ उन तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है।
ग्रामीणों की शिकायत है कि कागजों में विकास योजनाएं दिखाई देती हैं, लेकिन जमीन पर उनकी स्थिति अलग नजर आती है। उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों को समय-समय पर गांव का निरीक्षण कर वास्तविक समस्याओं को समझना चाहिए।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा और सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
ग्रामीणों में बढ़ रहा असंतोष, प्रशासन से समाधान की मांग
लंबे समय से समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में गांवों का विकास भी उतना ही जरूरी है जितना शहरों का विकास।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब देश विकास की नई ऊंचाइयों की बात कर रहा है, तो छोटे गांवों में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए अब भी संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है।
उनकी मांग है कि जिम्मेदार अधिकारी गांव का दौरा कर समस्याओं का स्थायी समाधान निकालें। केवल घोषणाओं और योजनाओं से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है।
गोराड़ू की कहानी बताती है विकास की असली चुनौती
गोराड़ू गांव की स्थिति यह याद दिलाती है कि किसी भी देश का वास्तविक विकास तभी संभव है जब गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचें। सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं किसी भी नागरिक के जीवन की आधारभूत जरूरतें हैं।
विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब देश के हर गांव तक विकास की रोशनी पहुंचे और ग्रामीणों को सम्मानजनक जीवन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों।
गोराड़ू आज भी बदलाव का इंतजार कर रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि ग्रामीणों की समस्याओं को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक इस गांव की तस्वीर बदलती है।
