Mp news: इंदौर नगर निगम ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना में 100 प्रतिशत टारगेट पूरा किया है। इंदौर ने बेंगलुरु और मुंबई को भी इस मामले में पीछे छोड़ दिया है।
इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर ने एक बार फिर देश भर में अपना परचम लहराया है। साफ-सफाई में लगातार तीन बार अव्वल आने वाले इस शहर ने अब प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना (PM SVANidhi) के तहत छोटे व्यापारियों को बिना गारंटी के लोन वितरित करने में भी देश का ‘नंबर-1’ शहर बनकर दिखाया है।
इंदौर ने इस मामले में देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और सिलिकॉन वैली ऑफ इंडिया कहे जाने वाले बेंगलुरु को भी पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि इंदौर नगर निगम के लिए एक और बड़ी सफलता है, जिसने साबित कर दिया है कि वह केवल सफाई में ही नहीं, बल्कि जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी अग्रणी है।
इंदौर ने 100% किया टारगेट पूरा
दरअसल, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना (PM SVANidhi Yojana) के दूसरे चरण में इंदौर नगर निगम को 33,028 पथ विक्रेताओं (स्ट्रीट वेंडर्स) को लोन दिलाने का लक्ष्य दिया गया था। इस लक्ष्य को न सिर्फ पूरा किया गया, बल्कि इससे भी अधिक लोगों को लाभान्वित किया गया।
निगम ने 51,000 से अधिक पात्र पथ विक्रेताओं के आवेदन फॉर्म भरवाकर विभिन्न बैंकों में भेजे, जिसके परिणामस्वरूप 35,294 लोगों का लोन स्वीकृत हुआ और राशि उनके बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर की गई। इस तरह निगम ने लोन बांटने का 100 प्रतिशत टारगेट पूरा किया और देश में पहला स्थान हासिल किया।
मुंबई-बेंगलुरु रहे पीछे
इस मामले में दूसरे स्थान पर बेंगलुरु और तीसरे स्थान पर मुंबई रहा, जबकि चौथे स्थान पर अहमदाबाद और पांचवें स्थान पर दिल्ली रही। यह इंदौर नगर निगम की उस कुशल योजना और मेहनत का नतीजा है, जिसने पात्र लाभार्थियों तक पहुंचने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया।
पीएम मोदी ने शुरू की थी योजना
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का उद्देश्य शहरी पथ विक्रेताओं (Street Vendors) को उनके व्यवसाय के लिए बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी का ऋण प्रदान करना है। इस योजना की शुरुआत 1 जून 2020 को कोविड-19 महामारी के दौरान हुई थी, जिसका उद्देश्य स्ट्रीट वेंडर्स को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनकी आजीविका को सहारा देना था।
वित्त वर्ष 2025-26 में 17 सितंबर 2025 से योजना का दूसरा चरण शुरू हुआ। पीएम मोदी ने इस योजना के दूसरे चरण का शुभारंभ किया था। इस चरण में ऋण राशि को बढ़ा दिया गया था, जिसमें पहली किस्त में अब 15,000 रुपये (पहले 10,000 रुपये), दूसरी किस्त में 25,000 रुपये (पहले 20,000 रुपये) और तीसरी किस्त में 50,000 रुपये का ऋण दिया जाने लगा।
स्वनिधि योजना के तहत मिलने वाले लाभ
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत पथ विक्रेताओं को कई प्रकार के लाभ मिलते हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- बिना गारंटी के ऋण (Collateral-free loan) की सुविधा।
- समय पर ऋण चुकाने पर ब्याज सब्सिडी।
- डिजिटल लेन-देन पर कैशबैक।
- दूसरी किस्त का ऋण चुकाने के बाद UPI-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा।
- ऋण की राशि को बढ़ाने की सुविधा।
अधिकारी का बयान
शहरी गरीब उपशमन विभाग के अपर आयुक्त नरेंद्र नाथ पांडे ने इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए कहा, “महापौर व निगमायुक्त के निर्देशन में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के दूसरे चरण में मिले टारगेट को 100 प्रतिशत पूरा किया गया। इसलिए पथ विक्रेताओं को लोन बांटने में इंदौर देश में पहली बार नंबर वन आया है।”उन्होंने आगे बताया कि योजना अभी भी जारी है और पात्र पथ विक्रेताओं को इसका लाभ दिलाया जाएगा।
योजना का भविष्य और विस्तार
केंद्र सरकार ने हाल ही में इस योजना का विस्तार करते हुए इसे 31 मार्च 2030 तक बढ़ा दिया है, जिसका कुल बजट 7,332 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य 1.15 करोड़ स्ट्रीट वेंडर्स को लाभ पहुंचाना है, जिसमें 50 लाख नए लाभार्थी शामिल होंगे। इस विस्तार के तहत योजना का कवरेज अब सांविधिक शहरों से बढ़ाकर जनगणना शहरों, उप-शहरी क्षेत्रों आदि तक कर दिया गया है।
इंदौर की यह सफलता अन्य शहरों के लिए एक मिसाल है, जिससे पता चलता है कि अगर सही योजना और मेहनत से काम किया जाए, तो केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ आम आदमी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है। इंदौर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह विकास के मामले में भी ‘नंबर-1’ है।

