India-Canada Relations:कनाडा के प्रधानमंत्री से मिले पीएम मोदी, पटरी पर लौट रहे रिश्ते? व्यापार, रक्षा और अंतरिक्ष सहयोग पर बनी सहमति |
जोहानसबर्ग। भारत और कनाडा के संबंधों में लंबे समय से चली आ रही तल्खी अब धीरे-धीरे कम होती दिखाई दे रही है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने जोहानसबर्ग में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Canadian PM Mark Carney) से मुलाकात की। यह मुलाकात G20 शिखर सम्मेलन (G20 Summit 2025) के इतर आयोजित की गई, जिसमें दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर महत्वपूर्ण सहमति बनाई।
यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारत-कनाडा संबंध (India-Canada Relations) काफी तनावपूर्ण रहे थे, लेकिन हाल की कूटनीतिक कोशिशों से रिश्तों में नई गर्माहट लौटती दिख रही है।
पीएम मोदी और मार्क कार्नी की दूसरी मुलाकात—द्विपक्षीय रिश्तों में ‘नया अध्याय’
यह मोदी और कार्नी की दूसरी मुलाकात थी। दोनों नेता इससे पहले जून 2025 में कनाडा के कनानास्किस में आयोजित G7 Summit के दौरान मिले थे। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री के साथ उनकी बातचीत “बहुत उपयोगी और सकारात्मक” रही।
मोदी ने बताया कि G7 के दौरान हुई पिछली बातचीत के बाद दोनों देशों के रिश्तों में “उल्लेखनीय प्रगति” हुई है। उसी प्रगति को आगे बढ़ाते हुए इस बार कई रणनीतिक क्षेत्रों में गहन साझेदारी पर सहमति बनी।
India–Canada Trade: 2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
मोदी ने कहा कि भारत और कनाडा ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य ऐसे समय में रखा गया है जब 2024 में दोनों देशों का व्यापार 30 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है—जो अब तक का सबसे उच्च स्तर था।
कनाडा की ओर से भी भारत में निवेश बढ़ाने की प्रबल इच्छा दिखाई देती है।
कनाडाई पेंशन फंड्स (Canadian Pension Funds) भारतीय कंपनियों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश कर रहे हैं। मोदी ने कहा कि आने वाले महीनों में व्यापार, निवेश, शिक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में नए अवसरों को मिलकर तलाशा जाएगा।
रक्षा और अंतरिक्ष में गहन सहयोग पर सहमति
दोनों देशों ने रक्षा, सुरक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र (Defence & Space Cooperation) में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। यह पहली बार है जब भारत और कनाडा ने अंतरिक्ष तकनीक, सैटेलाइट कार्यक्रमों और रक्षा नवाचारों पर संरचित तरीके से साझेदारी की बात की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच सैन्य-तकनीकी सहयोग के एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है।
ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और शिक्षा—तीन बड़े स्तंभ
इस मुलाकात में जिन क्षेत्रों पर सर्वाधिक चर्चा हुई, उनमें ये शामिल हैं:
1. ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग (Energy Partnership)
भारत को स्वच्छ ऊर्जा, हाइड्रोजन, प्राकृतिक गैस और महत्वपूर्ण खनिजों की भारी आवश्यकता है। कनाडा इन सभी क्षेत्रों में भारत के लिए विश्वसनीय साझेदार बन सकता है।
2. प्रौद्योगिकी और नवाचार (Tech & Innovation)
AI, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और डिजिटल ट्रेड जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने संयुक्त परियोजनाओं पर काम करने की सहमति जताई।
3. शिक्षा और छात्र आदान-प्रदान (Education Exchange)
कनाडा भारतीय छात्रों का पसंदीदा देश है और दोनों सरकारें अब छात्र सुरक्षा, वीज़ा प्रोसेस सुधार और अकादमिक साझेदारी को लेकर भी नई नीतियों पर काम कर रही हैं।
विदेश मंत्री जयशंकर की मुलाकात से मिला सकारात्मक संकेत
इससे पहले नवंबर 2025 की शुरुआत में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नियाग्रा में आयोजित G7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान अपनी कनाडाई समकक्ष अनीता आनंद से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की थी।
इसके अलावा कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू भी हाल ही में भारत आए थे। उनकी यात्रा का उद्देश्य था—द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को पुनर्जीवित करना। यह संकेत देता है कि कनाडा भी रिश्तों में आई खटास को पीछे छोड़ आगे बढ़ने के लिए गंभीर है।
क्यों बिगड़े थे भारत-कनाडा संबंध?—निज्जर मामले ने बढ़ाई थी खाई
भारत-कनाडा संबंधों में खटास साल 2023 में आई, जब कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में “भारतीय एजेंट शामिल” थे। भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और बेतुका बताया था।
इसके बाद दोनों देशों ने कूटनीतिक स्टाफ कम किया, वीज़ा प्रक्रिया प्रभावित हुई और रिश्तों में अभूतपूर्व तनाव आ गया।
लेकिन पिछले एक साल में परिस्थितियाँ धीरे-धीरे बदलीं और अब दोनों देश रिश्तों को सुधारने के लिए कई तंत्रों को पुनर्जीवित कर रहे हैं।
क्या वास्तव में पटरी पर लौट रहे हैं India-Canada Relations?
कई संकेत बताते हैं कि भारत और कनाडा के रिश्ते अब सुधार के रास्ते पर हैं:
-
उच्च स्तरीय राजनीतिक मुलाकातें बढ़ीं
-
व्यापार और निवेश बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही
-
कनाडाई छात्र मुद्दे पर संवाद बढ़ा
-
सुरक्षा और कूटनीतिक बातचीत फिर से सक्रिय हुई
-
अंतरिक्ष और रक्षा साझेदारी की नई दिशा तय हुई
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि दोनों देश आने वाले महीनों में इसी तरह का रुख बनाए रखते हैं, तो 2030 तक व्यापार 50 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नहीं होगा।
निष्कर्ष: मोदी-कार्नी मुलाकात से भविष्य की दिशा तय
मोदी और मार्क कार्नी की मुलाकात न केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता थी, बल्कि यह उभरे हुए तनाव को समाप्त करने और साझेदारी को नई ऊर्जा देने का अवसर साबित हुई है।
व्यापार, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में भारत और कनाडा के बीच अपार संभावनाएं हैं—और इस मुलाकात ने इन संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।
आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच कई उच्चस्तरीय बैठकें और समझौते होने की संभावना है, जो रिश्तों में स्थायी सुधार ला सकते हैं।
