PM मोदी ने ‘मन की बात’ में पेट्रोल-डीजल संकट और वैश्विक युद्ध पर कही अहम बातें
युद्ध और वैश्विक फ्यूल संकट का जिक्र
PM नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 132वें एपिसोड में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि इस संघर्ष ने पूरी दुनिया में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पर गंभीर असर डाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालांकि वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट गहरा गया है, भारत इस चुनौती का सामना अपनी मजबूत वैश्विक कूटनीति और पिछले दशक में विकसित हुई अर्थव्यवस्था की ताकत के दम पर कर रहा है।
PM मोदी ने कहा कि युद्ध की परिस्थितियों में देशवासियों को किसी भी तरह की अफवाहों में फंसने से बचना चाहिए। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे केवल सरकारी और आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। उनका कहना था कि यह मुद्दा 140 करोड़ देशवासियों के हित से जुड़ा है और इसलिए सभी को जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए।
खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा
PM ने खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए सहायता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि युद्ध के बीच वहां रहने वाले लगभग एक करोड़ से अधिक भारतीयों को हर संभव मदद मिल रही है। भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है और विदेश मंत्रालय तथा अन्य संबंधित एजेंसियों ने निरंतर निगरानी और सहायता प्रदान करने की व्यवस्था कर रखी है।
वैश्विक ईंधन संकट और भारत की स्थिति
PM मोदी ने वैश्विक फ्यूल संकट के संदर्भ में कहा कि युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण पूरी दुनिया पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में कमी का सामना कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने पिछले वर्षों में अपने ऊर्जा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। देश ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दिया, ऊर्जा उत्पादन के आधुनिक संसाधनों को विकसित किया और भंडारण क्षमताओं को मजबूत किया।
PM ने कहा कि यही वजह है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत की घरेलू ईंधन आपूर्ति अपेक्षाकृत सुरक्षित बनी हुई है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इस विषय पर अफवाहों पर ध्यान न दें और सभी जानकारी केवल सरकारी स्रोतों से प्राप्त करें।
राजनीतिक दलों के लिए नसीहत
‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने यह भी कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करना अनुचित है। उन्होंने विपक्षी दलों को नाम न लेते हुए आगाह किया कि ईंधन संकट और सुरक्षा जैसी राष्ट्रीय महत्व की चुनौतियों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यह समय राजनीति के लिए नहीं, बल्कि देशवासियों की सुरक्षा और उनके जीवन स्तर को बनाए रखने का है।
मछुआरों के योगदान की सराहना
PM मोदी ने मछुआरों के योगदान को भी याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे बंदरगाहों के विकास और आधुनिक तकनीक के उपयोग से मछुआरों का जीवन सरल और सुरक्षित हो रहा है। मछली पालन और मत्स्य उद्योग में नवाचार के जरिए नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं।
PM मोदी ने कहा कि मछुआरे केवल समुद्र के योद्धा नहीं हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव का हिस्सा भी हैं। वे सुबह से पहले समुद्र में काम करके, अपने परिवार और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान देते हैं।
उन्होंने बताया कि मछुआरों के प्रयासों और आधुनिक तकनीक के समावेश से मत्स्य पालन क्षेत्र में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप, स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की पकड़ मजबूत हुई है।
अफवाहों और misinformation से सावधानी
PM ने देशवासियों से यह भी आग्रह किया कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि विशेषकर ईंधन, सुरक्षा और युद्ध जैसी गंभीर परिस्थितियों में केवल सरकार और आधिकारिक एजेंसियों द्वारा दी गई जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। उनका कहना था कि सही जानकारी ही संकट के समय निर्णय लेने में मदद करती है और समाज में अव्यवस्था को रोकती है।
भविष्य के लिए संदेश
PM मोदी ने ‘मन की बात’ के माध्यम से यह संदेश दिया कि वैश्विक संकटों का सामना संयम, जागरूकता और सामूहिक प्रयास से किया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की नीति हमेशा अपने नागरिकों की सुरक्षा, भलाई और आर्थिक स्थिरता पर केंद्रित रही है।
उन्होंने कहा कि युद्ध और वैश्विक संकटों के समय में एकजुट रहना, अफवाहों से बचना और जिम्मेदारीपूर्ण निर्णय लेना हर नागरिक का कर्तव्य है। इसी तरह, देश की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मजबूत बनी रहती है।
निष्कर्ष
PM नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में वैश्विक युद्ध और ईंधन संकट पर स्पष्ट दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने भारत की तैयारियों, खाड़ी देशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, मछुआरों और मत्स्य उद्योग के योगदान और अफवाहों से सावधान रहने की आवश्यकता पर जोर दिया।
PM मोदी ने यह संदेश दिया कि भारत इन वैश्विक चुनौतियों का सामना मजबूती, जागरूकता और सामूहिक प्रयास के माध्यम से कर रहा है। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि वे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति न करें और केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।
