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Petrol-Diesel Price Cut: भारत में पेट्रोल-डीजल 3.1% सस्ता, सरकार ने बताया पूरा आर्थिक गणित

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Published On: 14 June 2026
Petrol-Diesel Price Cut
— पेट्रोल-डीजल सस्ता या महंगा? सरकार के अनुसार पिछले 4 सालों में भारत में ईंधन 3.1% सस्ता हुआ,

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Petrol-Diesel Price Cut: भारत में पेट्रोल-डीजल 3.1% सस्ता, सरकार ने बताया पूरा आर्थिक गणित

Petrol-Diesel Price Cut: भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। केंद्र सरकार के अनुसार देश में ईंधन की कीमतों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान 3.1 प्रतिशत की शुद्ध गिरावट दर्ज की गई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में जारी आंकड़ों के आधार पर बताया कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत में ईंधन की कीमतें अन्य देशों की तुलना में नियंत्रित रही हैं और इसमें गिरावट भी देखने को मिली है।

मंत्री के अनुसार, मई 2022 से मई 2026 के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में औसतन 3.1 प्रतिशत की कमी आई है। यह स्थिति उस समय सामने आई है जब दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कई देशों में बढ़े ईंधन के दाम

सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों में भारत की तुलना अन्य देशों से की गई है। इसके अनुसार पाकिस्तान में पिछले चार वर्षों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी तरह श्रीलंका में ईंधन की कीमतें करीब 66 प्रतिशत तक बढ़ी हैं।

यूरोपीय देशों में भी स्थिति कुछ अलग नहीं रही है। इटली में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगभग 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि फ्रांस में यह बढ़ोतरी लगभग 47 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल अमेरिका में भी ईंधन की कीमतों में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

इन आंकड़ों के मुकाबले भारत में ईंधन की कीमतों में 3.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जाना सरकार के अनुसार एक बड़ी उपलब्धि है, जिसे वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच एक संतुलित स्थिति के रूप में देखा जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों का असर

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। हाल के समय में पश्चिम एशिया में तनाव और अन्य भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।

इस तरह के अस्थिर माहौल में आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें प्रमुख रूप से पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती और डीजल पर इसे शून्य करने जैसे फैसले शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इन कदमों से उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम करने में मदद मिली है।

टैक्स कटौती से सरकार पर बड़ा बोझ

केंद्र सरकार ने बताया कि आम जनता को अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के झटकों से बचाने के लिए टैक्स कटौती के रूप में बड़े पैमाने पर राजस्व का त्याग किया गया है। अनुमान के अनुसार सरकार ने इस अवधि में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बोझ खुद वहन किया है।

इस नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा है कि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं पर न पड़े और ईंधन की कीमतें स्थिर बनी रहें।

तेल कंपनियों पर भी पड़ा असर

सरकारी तेल कंपनियों ने भी इस अवधि में काफी चुनौतियों का सामना किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के बावजूद घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए कंपनियों को भारी “अंडर रिकवरी” झेलनी पड़ी है।

इसका मतलब यह है कि कंपनियों को कई बार लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचना पड़ा, ताकि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। सरकार के अनुसार यह रणनीति उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखकर अपनाई गई।

हाल के समय में हल्की बढ़ोतरी

हालांकि सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि पिछले कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है। इसके कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुछ वृद्धि दर्ज की गई है।

इसके बावजूद चार साल की अवधि को आधार मानकर देखा जाए तो भारत में कुल मिलाकर ईंधन की कीमतों में 3.1 प्रतिशत की शुद्ध गिरावट देखने को मिली है, जिसे सरकार सकारात्मक संकेत मान रही है।

कालाबाजारी रोकने के लिए नए नियम

सरकार ने ईंधन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने और कालाबाजारी रोकने के लिए भी नए नियम लागू किए हैं। इसके तहत खुदरा पेट्रोल पंपों से औद्योगिक या थोक खरीदारों द्वारा अत्यधिक मात्रा में डीजल खरीद पर नियंत्रण लगाया गया है।

नए नियमों के अनुसार एक वाहन द्वारा प्रतिदिन केवल 200 लीटर डीजल ही खरीदा जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईंधन का दुरुपयोग न हो और आम उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे।

सरकार का दावा: स्थिरता और संतुलन की नीति

केंद्र सरकार का कहना है कि उसकी नीति हमेशा से उपभोक्ताओं को राहत देने और ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने पर केंद्रित रही है। वैश्विक अस्थिरता और तेल बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए लगातार हस्तक्षेप किया गया है।

सरकार के अनुसार आने वाले समय में भी इसी तरह की रणनीति अपनाई जाएगी ताकि आम जनता को महंगाई के दबाव से राहत मिल सके और देश की अर्थव्यवस्था पर भी संतुलन बना रहे।

कुल मिलाकर, सरकार का दावा है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में गिरावट एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो नीतिगत फैसलों और वित्तीय प्रबंधन का परिणाम है।

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