— नाकोड़ा पार्श्वनाथ तीर्थ में पौष दशमी पर पार्श्वनाथ आराधना का भव्य आयोजन
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नाकोड़ा पार्श्वनाथ तीर्थ में पार्श्वनाथ आराधना के तहत पौष दशमी पर त्रिदिवसीय भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ, जिसमें अट्ठम तप, रथयात्रा, अभिषेक एवं धर्मसभा आयोजित की गई।
प्रस्तावना
पार्श्वनाथ आराधना जैन धर्म की ऐसी साधना है, जो पतित आत्मा को पावन बनाने का मार्ग दिखाती है। पौष दशमी के पावन अवसर पर नाकोड़ा पार्श्वनाथ तीर्थ एवं नाकोड़ा भैरव धाम, आलंदी में इसी भावना के साथ त्रिदिवसीय भव्य धार्मिक आयोजन का सफल आयोजन किया गया।
नाकोड़ा पार्श्वनाथ तीर्थ में त्रिदिवसीय आराधना
नाकोड़ा पार्श्वनाथ तीर्थ एवं नाकोड़ा भैरव धाम आलंदी में पौष दशमी के अवसर पर आयोजित पार्श्वनाथ आराधना मोहनखेड़ा महातीर्थ के बंधु बेलडी की पावन निश्रा में सानंद संपन्न हुई। यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति और तपस्या से ओत-प्रोत रहा।
संत निश्रा में संपन्न आयोजन
इस अवसर पर मोहनखेड़ा महातीर्थ विकास प्रेरणादाता, परोपकार सम्राट आचार्यप्रवर गुरुदेव श्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी महाराजा साहेब के आज्ञानुवर्ती शिष्य, सप्तम वर्षीतप तपस्वी, ओजस्वी वक्ता मुनिराज श्री पीयूषचंद्र विजयजी म.सा. एवं प्रवचनदक्ष मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा. आदि ठाणा की प्रभावी पावन निश्रा प्राप्त हुई।
पौष दशमी पर नाकोड़ा पार्श्वनाथ तीर्थ, आलंदी (पुणे) में पार्श्वनाथ आराधना के दौरान भगवान श्री पार्श्वनाथ की भव्य रथयात्रा
नित्य-नव्य भव्य धार्मिक कार्यक्रम
त्रिदिवसीय पार्श्वनाथ आराधना के अंतर्गत अनेक धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए—
श्री भक्तामर स्तोत्र एवं पार्श्वनाथ इक्कीसा पाठ
गुरु मंदिर में गुरु चालीसा पाठ
मंत्राधिराज स्तोत्र द्वारा अखंडधारा से मूलनायक नाकोड़ा पार्श्वनाथ महाअभिषेक
भैरव पूजन, 18 अभिषेक महापूजन
108 पार्श्वनाथ महापूजन
श्री पार्श्वनाथ पंचकल्याणक पूजन
रात्रि में भव्य आंगी दर्शन एवं भक्ति भावना आयोजन
इन आयोजनों से सम्पूर्ण वातावरण धर्ममय बन गया।
पौष दशमी पर विशेष आयोजन
पौष दशमी के पावन दिन 23वें तीर्थंकर पुरुषादानीय श्री पार्श्वनाथ परमात्मा के जन्म कल्याणक एवं दीक्षा कल्याणक का भव्य आयोजन किया गया।
प्रातः 8:30 बजे सकल श्रीसंघ की नवकारसी हुई। पुणे के भवानीपेठ सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 500 पैदल यात्री संघ का भव्य स्वागत किया गया। बंधु बेलडी मुनि श्री पीयूषचंद्र विजयजी म.सा. ने संघ को मांगलिक सुनाकर आशीर्वाद प्रदान किया।
इसके पश्चात अष्टप्रकारी पूजन एवं श्री पार्श्वनाथ भगवान की भव्य रथयात्रा निकाली गई।
धर्मसभा में प्रभावी प्रवचन
धर्मसभा में बंधु बेलडी ने कहा कि—
शंखेश्वर पार्श्वनाथ प्रभु की प्रभावशाली प्रतिमा पिछली चौबीसी के 9वें तीर्थंकर दामोदर स्वामीजी के समय से तीनों लोकों में वंदित है।
मुनिश्री पीयूषचंद्र विजयजी ने अट्ठम तप आराधना को विशेष पुण्यप्रद बताया, वहीं मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी ने कहा—
“भूले को राह दिखाएं उन्हें गुरुराज कहते हैं, पतित को पावन बनाए उन्हें पार्श्वनाथ कहते हैं।”
नाकोड़ा पार्श्वनाथ तीर्थ आलंदी में पौष दशमी पर आयोजित पार्श्वनाथ आराधना का भव्य दृश्य
तपस्वियों का बहुमान एवं पारणा
पुणे, राजगुरुनगर, भोसरी, आलंदी, विरार, पोयनाड सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं अट्ठम तप आराधना हेतु पधारे। सभी तपस्वियों का पारणा एवं बहुमान ट्रस्ट मंडल द्वारा भक्ति भावना से किया गया।
बंधु बेलडी का विहार
गुरु सप्तमी महापर्व के अवसर पर तपस्वी मुनिश्री का मोहनखेड़ा गुरुधाम तीर्थ दहाणु की ओर विहार हुआ। पुणे के समीप दौंड नगर में भी गुरु सप्तमी महापर्व हेतु विहार किया गया, जिसमें गुरुभक्त परिवारों ने सुंदर सेवा प्रदान की।
आध्यात्मिक संदेश
पार्श्वनाथ आराधना यह सिखाती है कि—
सुख का वास्तविक स्रोत धर्म और प्रभु हैं
धन के पीछे भागने से आत्मिक शांति नहीं मिलती
प्रभु की भक्ति कई गुना फल प्रदान करती है
Image Caption: नाकोड़ा पार्श्वनाथ तीर्थ में पौष दशमी पर पार्श्वनाथ आराधना का भव्य आयोजन