मिलेनियल्स (Millennials) और जेन जेड (Gen Z) आपने सोशल मीडिया और कॉर्पोरेट वर्ल्ड में ये दो शब्द बहुत सुने होंगे । ये दोनों ही अलग जेनरेशन्स है इन दोनों फर्क केवल उम्र का नहीं, बल्कि सोच, काम करने के तरीके और लाइफस्टाइल का भी है। बता दे की 1981 से 1996 के बीच जन्मे लोग मिलेनियल जेनरेशन कहलाते हैं, जबकि 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा जेन जेड कहलाते हैं।
वर्तमान में मिलेनियल्स की उम्र लगभग 29 से 44 साल के बीच है और वे अब अधिकांश रूप से वर्किंग प्रोफेशनल्स, मैनेजर्स या लीडर्स के पदों पर हैं। दूसरी ओर, जेन जेड अभी अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं वे कॉलेज से निकलकर नए-नए अनुभवों की दुनिया में कदम रख रहे हैं।

लेकिन इन दोनों जेनरेशन्स के बीच काम करने के तरीके में बेहद अंतर है। जेन जेड जहां नई सोच, एक्सपेरिमेंटल एटीट्यूड और स्वतंत्रता को प्राथमिकता देते हैं, वहीं कई बार उनके माता-पिता इस नई पीढ़ी के वर्क कल्चर को समझ नहीं पाते। आखिर में नतीजा यह होता है की कई बार पैरेंट्स अपने बच्चों की ऑफिस लाइफ में दखल देने लगते हैं, जो मैनेजर्स के लिए मुश्किलें खड़ी कर देता है।
“मेरी बेटी को जॉब दिला दीजिए” — सीईओ को मां का ईमेल
दिल्ली की 33 वर्षीय महिला , जो एक कंपनी में मैनेजर हैं, बताती हैं —
“हमारे यहां एक इंटर्न काम करती थी। अचानक उसकी मां ने हमारे सीईओ को मेल कर दिया और अपनी बेटी के लिए लेटर ऑफ रिकमेंडेशन की मांग कर दी ताकि उसे बेहतर नौकरी मिल सके। हमने पहले ही उसे इंटर्नशिप सर्टिफिकेट दे दिया था, लेकिन उसकी मां ने जिद पकड़ ली। जब हमने मना किया, तो उन्होंने कंपनी के सभी सीनियर्स को मेल करना शुरू कर दिया। अंततः ड्रामा खत्म करने के लिए हमें लेटर देना पड़ा और आखिर में हमें उस इंटर्न को ब्लैकलिस्ट करना पड़ा।”
यह वाकया दिखाता है कि पैरेंट्स का ओवर-इन्क्वॉल्वमेंट कभी-कभी बच्चों के करियर पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
“मां ने कहा इवेंट दूर है, इसलिए नहीं जाऊंगी”
एक 31 वर्षीय महिला , जो एक कॉर्पोरेट फर्म में काम करती हैं, बताती हैं कि उन्होंने अपनी टीम को एक ऑफिस इवेंट में शामिल होने के लिए सभी सेफ्टी अरेंजमेंट्स और कैब फैसिलिटी दी थी। लेकिन उनकी एक टीम मेंबर ने अंतिम समय पर मना कर दिया जिसका कारण था की उसकी माँ ने उसे मना कर दिया था।
यह सुनकर कंपनी प्रबंधन भी असमंजस में पड़ गया। यह स्थिति दिखाती है कि जेन जेड, जो स्वतंत्र निर्णय लेने की उम्र में हैं, अब भी कई बार अपने पैरेंट्स की मंजूरी के बिना कोई कदम नहीं उठाते।
“पोश्चर बिगड़ रहा है, इसलिए कुर्सी खरीदने जाना है!”
32 साल की महिला अपना अनुभव बताते हुए कहती हैं,
“एक एम्प्लॉयी की मां ने खुद मुझे फोन किया और कहा कि उनकी बेटी को एक दिन की छुट्टी चाहिए क्योंकि उन्हें टेबल-कुर्सी खरीदने जाना है। उनका कहना था कि पोश्चर बिगड़ रहा है, इसलिए ये जरूरी है। लेकिन हमारी HR पॉलिसी में ऐसी छुट्टी की अनुमति नहीं थी।”
इस घटना के बाद HR टीम ने समझाया कि ऑफिस नीतियों में व्यक्तिगत कामों के लिए छुट्टी नहीं दी जा सकती।
नई जेनरेशन, नया कल्चर — पर सीमाएं जरूरी
आज की जेन जेड जेनरेशन डिजिटल युग में पली-बढ़ी है, जहां जानकारी, अवसर और तकनीक तक उनकी सीधी पहुंच है। लेकिन कॉर्पोरेट लाइफ में प्रोफेशनल बाउंड्रीज़ को समझना भी उतना ही जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पैरेंट्स को अपने बच्चों को निर्णय लेने की आजादी देनी चाहिए, ताकि वे असल वर्कप्लेस चैलेंजेस का सामना कर सकें।
कंपनियां भी अब जेन जेड को समझने के लिए फ्लेक्सिबल वर्क एनवायरनमेंट, मेंटरशिप प्रोग्राम और माइंडफुलनेस सेशंस जैसी पहल कर रही हैं, ताकि दोनों पीढ़ियों के बीच संतुलन बना रहे।
