ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की जासूसी साजिश: सोलर CCTV से भारत पर निगरानी का खुलासा
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI एक बार फिर भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के लिए नए तरीके अपना रही है। ताजा जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान भारत के संवेदनशील इलाकों में सोलर पावर से चलने वाले CCTV कैमरों के जरिए निगरानी नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहा था। इन कैमरों की लाइव फुटेज सीधे पाकिस्तान तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में चिंता बढ़ गई है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पंजाब, हरियाणा और अन्य सीमावर्ती राज्यों में ऐसे संदिग्ध कैमरों का पता लगाया है। इनमें जालंधर, पटियाला और अंबाला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं, जहां सुरक्षा दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील गतिविधियां होती हैं।
कैसे काम कर रहा था जासूसी नेटवर्क?
सूत्रों के अनुसार, ISI ने एक संगठित मॉड्यूल तैयार किया था, जिसका उद्देश्य भारत के रणनीतिक क्षेत्रों की लाइव निगरानी करना था। इसके लिए सोलर पावर और सिम कार्ड से चलने वाले CCTV कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
इन कैमरों को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि वे बिना किसी बाहरी बिजली स्रोत के लंबे समय तक काम कर सकें और इंटरनेट के माध्यम से सीधे वीडियो फुटेज पाकिस्तान भेज सकें। यह फुटेज सेना की गतिविधियों, काफिलों की आवाजाही, रेलवे मूवमेंट और अन्य रणनीतिक गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
कहां-कहां मिले संदिग्ध कैमरे?
भारतीय एजेंसियों द्वारा की गई जांच में कई स्थानों पर ऐसे कैमरे पाए गए हैं।
- जालंधर (Punjab)
- पटियाला (Punjab)
- अंबाला (Haryana)
- कपूरथला और मोगा क्षेत्र
इन सभी स्थानों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां से सैन्य और लॉजिस्टिक मूवमेंट पर नजर रखना आसान होता है।
कैसे हुआ खुलासा?
जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत इस साल जनवरी में हुई थी जब BSF की G ब्रांच को कुछ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली। इसके बाद केंद्रीय एजेंसियों को अलर्ट किया गया।
एक ‘डीप एसेट’ इनपुट के जरिए यह भी सामने आया कि पाकिस्तान भारत में CCTV आधारित एक बड़ा निगरानी नेटवर्क बनाने की योजना पर काम कर रहा है।
इसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कई राज्यों में छापेमारी की और संदिग्ध उपकरण बरामद किए।
दिल्ली और पंजाब में बड़ी कार्रवाई
पुलिस कार्रवाई के दौरान पंजाब और दिल्ली से 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से 9 सोलर-पावर्ड CCTV कैमरे बरामद हुए, जिनमें सिम कार्ड लगे हुए थे।
इसके अलावा जांच में 4 पिस्तौल (3 PX5 और 1 देसी) और 24 जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए। एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क एक बड़े जासूसी मॉड्यूल का हिस्सा था, जिसे पाकिस्तान से ऑपरेट किया जा रहा था।
लाइव फुटेज पाकिस्तान तक भेजने की साजिश
जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। कैमरों को ऐसे स्थानों पर लगाया गया था जहां से सेना, रेलवे और टोल प्लाजा की गतिविधियों को आसानी से रिकॉर्ड किया जा सके।
इन कैमरों के जरिए लाइव वीडियो फुटेज व्हाट्सएप और अन्य सुरक्षित ऐप्स के माध्यम से पाकिस्तान भेजे जा रहे थे। इसका उद्देश्य भारतीय सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रखना और संभावित संघर्ष की स्थिति में रणनीतिक लाभ प्राप्त करना था।
टोल प्लाजा और रेलवे स्टेशन बने मुख्य लक्ष्य
सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क का फोकस खास तौर पर टोल प्लाजा और रेलवे स्टेशनों पर था। यह देखा गया कि सैन्य काफिले और भारी वाहनों की आवाजाही को ट्रैक करने के लिए इन स्थानों को चुना गया।
दिल्ली कैंटोनमेंट रेलवे स्टेशन और सोनीपत रेलवे स्टेशन पर भी ऐसे कैमरे लगाए गए थे, जो कई दिनों तक सक्रिय रहे।
भारत की सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता
इस खुलासे के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी है। अब देशभर में लगे CCTV कैमरों की समीक्षा की जा रही है, खासकर उन क्षेत्रों में जो सैन्य और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
एजेंसियों को शक है कि कुछ स्थानीय लोग या स्लीपिंग सेल्स के जरिए यह उपकरण लगाए गए हो सकते हैं, जिन्हें विदेशी हैंडलर्स द्वारा निर्देशित किया जा रहा था।
चीनी उपकरणों की भूमिका पर भी सवाल
जांच में यह भी सामने आया है कि इन CCTV कैमरों में इस्तेमाल किए गए कुछ उपकरण चीनी मूल के हो सकते हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि ऐसे उपकरण आसानी से हैक या रिमोट एक्सेस के जरिए नियंत्रित किए जा सकते हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों की राय
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब तकनीक और निगरानी प्रणाली भी इसका अहम हिस्सा बन चुकी है।
CCTV, ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल नेटवर्क के जरिए दुश्मन देश किसी भी क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं। इसलिए इन तकनीकों की सुरक्षा बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आया यह मामला स्पष्ट करता है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI भारत में अपनी निगरानी क्षमता को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
सोलर पावर और सिम कार्ड आधारित CCTV नेटवर्क के जरिए की जा रही यह साजिश भारत की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को खत्म करने और भविष्य में ऐसी किसी भी गतिविधि को रोकने के लिए लगातार निगरानी और कार्रवाई कर रही हैं।
