काजी कैंप और ‘मिसाइल’ वाले बयान पर ओवैसी-रामेश्वर शर्मा आमने-सामने, भोपाल की राजनीति गरमाई
ओवैसी ने जनसभा से भाजपा विधायक को दी चुनौती, रामेश्वर शर्मा बोले—भारत-विरोधी आतंकी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी
भोपाल। राजधानी भोपाल में समान नागरिक संहिता के विरोध में आयोजित जनसभा के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के कथित ‘काजी कैंप पर मिसाइल’ वाले बयान पर तीखा पलटवार किया। ओवैसी ने शर्मा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें साहस है तो वे बताएं कि मिसाइल कब चलाएंगे। इसके बाद रामेश्वर शर्मा ने भी जवाब देते हुए कहा कि उनका बयान भोपाल के किसी क्षेत्र या समुदाय के लिए नहीं, बल्कि देश-विरोधी आतंकी ठिकानों के संदर्भ में था।
दोनों नेताओं के बीच हुई इस तीखी बयानबाजी के बाद मध्य प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विवाद के केंद्र में भोपाल का काजी कैंप इलाका, UCC और भाजपा विधायक के पुराने बयान की व्याख्या है। हालांकि किसी आवासीय क्षेत्र या समुदाय को ‘भारत-विरोधी’ कहना तथ्यात्मक प्रमाण के बिना उचित नहीं है। दोनों पक्षों के कथनों को राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
भोपाल की सभा में ओवैसी ने दी चुनौती
असदुद्दीन ओवैसी ने भोपाल में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए रामेश्वर शर्मा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा विधायक वास्तव में अपने बयान पर कायम हैं तो बताएं कि काजी कैंप में मिसाइल कब चलाएंगे। ओवैसी ने यह भी कहा कि वह वहां अकेले खड़े होने के लिए तैयार हैं और डरकर पीछे नहीं हटेंगे।
ओवैसी ने काजी कैंप के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां रहने वाले नागरिकों को किसी नेता की धमकी से डरने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने अपने समर्थकों से संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की।
AIMIM प्रमुख ने भाजपा पर धार्मिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए किसी मोहल्ले या समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है।
रामेश्वर शर्मा ने कहा—भोपाल के काजी कैंप की बात नहीं की
ओवैसी की चुनौती के बाद हुजूर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके पुराने बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है। शर्मा के अनुसार उन्होंने भोपाल स्थित काजी कैंप पर हमला करने की बात नहीं कही थी।
भाजपा विधायक ने दावा किया कि उनका संदर्भ देश के बाहर सक्रिय कथित आतंकी शिविरों और भारत-विरोधी ठिकानों से था। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए ऐसे ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहनी चाहिए।
शर्मा ने ओवैसी की भाषा को अमर्यादित बताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपनी बात लोकतांत्रिक और संयमित भाषा में रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि AIMIM प्रमुख उनके बयान को भोपाल के एक इलाके से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं।
क्या था रामेश्वर शर्मा का पुराना बयान?
विवाद सितंबर के पहले सप्ताह में रामेश्वर शर्मा के एक बयान के बाद शुरू हुआ था। उनके भाषण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ, जिसमें ‘काजी कैंप’ और ‘मिसाइल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल सुनाई दिया। वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक ने भोपाल के मुस्लिम बहुल काजी कैंप इलाके को निशाना बनाया है।
विवाद बढ़ने पर शर्मा ने स्पष्टीकरण दिया कि उनके बयान में भोपाल के काजी कैंप का उल्लेख नहीं था। उनका कहना था कि वह भारत के विरुद्ध गतिविधियों में शामिल सीमा पार के आतंकी शिविरों की बात कर रहे थे।
वायरल वीडियो के संपूर्ण संदर्भ और मूल भाषण को देखे बिना उसके किसी छोटे हिस्से के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे संवेदनशील विषयों पर स्पष्ट और जिम्मेदार भाषा का प्रयोग करें, ताकि उनके बयान से सामाजिक तनाव पैदा न हो।
UCC विरोधी सभा में उठा मामला
ओवैसी भोपाल में समान नागरिक संहिता के विरोध में आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने UCC को धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के व्यक्तिगत कानूनों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार की नीति पर प्रश्न उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि समान नागरिक संहिता के नाम पर गैर-हिंदू समुदायों पर एक विशेष प्रकार की व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। ओवैसी ने संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा आवश्यक है।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि प्रस्तावित व्यवस्था सभी नागरिकों के लिए समान है तो आदिवासी समुदायों को संभावित रूप से इससे अलग रखने की चर्चा क्यों हो रही है। ओवैसी ने NDA में शामिल अन्य राजनीतिक दलों से भी UCC पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा।
शर्मा ने ओवैसी को चुनाव लड़ने की चुनौती दी
रामेश्वर शर्मा ने पलटवार करते हुए ओवैसी को मध्य प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि AIMIM को जनता के बीच जाकर अपने विचारों के लिए समर्थन मांगना चाहिए।
शर्मा ने ओवैसी पर समाज को बांटने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को धार्मिक रंग देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत की सेना और सुरक्षा एजेंसियां देश-विरोधी आतंकी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई करती रहेंगी।
उन्होंने यह भी दोहराया कि उनकी टिप्पणी का भोपाल के किसी नागरिक, मोहल्ले या धार्मिक समुदाय से संबंध नहीं था। हालांकि ओवैसी और AIMIM का कहना है कि विधायक की भाषा से काजी कैंप के लोगों के बीच गलत संदेश गया।
राजनीतिक विवाद में बदल गया बयान
दोनों नेताओं की बयानबाजी अब UCC से आगे बढ़कर राष्ट्रवाद, धार्मिक पहचान और भोपाल की स्थानीय राजनीति से जुड़ गई है। भाजपा समान नागरिक संहिता को समान अधिकारों और महिला न्याय का विषय बताती है, जबकि AIMIM सहित कई विपक्षी दल इसे धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप के रूप में देखते हैं।
रामेश्वर शर्मा और ओवैसी दोनों अपने आक्रामक राजनीतिक बयानों के लिए पहचाने जाते हैं। इस विवाद में भी दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इससे समर्थकों के बीच राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ने की आशंका है।
संवेदनशील बयानबाजी से बचने की जरूरत
काजी कैंप भोपाल का एक आवासीय क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में आम नागरिक रहते हैं। किसी राजनीतिक बयान के कारण वहां के सभी निवासियों को किसी आरोप से जोड़ना उचित नहीं होगा। यदि किसी व्यक्ति या संगठन के विरुद्ध गैरकानूनी गतिविधि का प्रमाण है तो कार्रवाई जांच एजेंसियों और कानून के माध्यम से होनी चाहिए।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में नेताओं को एक-दूसरे की नीतियों और विचारों की आलोचना करने का अधिकार है, लेकिन हिंसक प्रतीकों और धमकी जैसी भाषा का प्रयोग सामाजिक तनाव बढ़ा सकता है। राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने बयानों में संवैधानिक मर्यादा और सामाजिक सद्भाव का ध्यान रखें।
फिलहाल इस विवाद पर दोनों नेताओं ने अपना-अपना पक्ष रख दिया है। ओवैसी ने शर्मा के कथन को काजी कैंप के निवासियों के खिलाफ धमकी बताया है, जबकि शर्मा ने इसे खारिज कर कहा कि उनका निशाना केवल सीमा पार के भारत-विरोधी आतंकी शिविर थे।
