मध्यप्रदेश में अफसरों की गुंडई पर मुख्यमंत्री का सख्त कदम, दो अधिकारियों को सस्पेंड, तीसरे पर जांच के आदेश
मध्यप्रदेश, सितंबर 2025: मध्यप्रदेश में सरकारी अफसरों द्वारा अपने रुतबे का दुरुपयोग और जनता के साथ दुर्व्यवहार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इस बीच, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों की अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए सबलगढ़ (मुरैना) के एसडीएम अरविंद माहौर को तत्काल सस्पेंड कर दिया है।
सबलगढ़ एसडीएम पर युवती को परेशान करने का आरोप
मुरैना जिले के सबलगढ़ के एसडीएम अरविंद माहौर पर आरोप है कि वे लंबे समय से एक युवती को फोन पर परेशान कर रहे थे। मामला इतना गंभीर हुआ कि युवती की माँ को कलेक्टर अंकित अस्थाना से शिकायत करनी पड़ी। कलेक्टर ने एसडीएम का तबादला कर दिया था, लेकिन माहौर ने नए पदभार ग्रहण करने से पहले नियम तोड़ते हुए छह पटवारियों के तबादले कर दिए, जिससे मामला और बढ़ गया।
मुख्यमंत्री की सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनसेवा में आचरण की मर्यादा से समझौता सभी परिस्थितियों में अस्वीकार्य है। उन्होंने एसडीएम अरविंद माहौर को तत्काल सस्पेंड कर दिया और कमिश्नर चंबल को निर्देश दिए कि वे इस मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
शिवपुरी में नायब तहसीलदार का विवाद
शिवपुरी जिले के करैरा में नायब तहसीलदार विजय त्यागी ने खाद वितरण केंद्र पर कतार में खड़े किसान महेंद्र राजपूत को थप्पड़ मार दिया। किसान दूसरी कतार में जाने का प्रयास कर रहे थे, तभी नायब तहसीलदार ने उन्हें सार्वजनिक रूप से पीटा। घटना का वीडियो स्थानीय लोगों ने रिकॉर्ड किया था, जिसे बाद में पुलिस ने मोबाइल से डिलीट करवाने का प्रयास किया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर विरोध की लहर फैल गई और कांग्रेस नेता भी सक्रिय हुए।
मंडला में परिवहन नाकों पर वसूली का मामला
मंडला जिले में परिवहन नाकों पर वसूली की शिकायतें लंबे समय से सामने आई हैं। सरकार ने पुराने नाकों को बंद कर नए चेक प्वाइंट बनाए थे, लेकिन यहां भी अधिकारी और कर्मचारी अवैध वसूली कर रहे थे। जोगी मंडी घाट (रायपुर-जबलपुर एनएच 30) पर ट्रक ड्राइवरों ने चेक प्वाइंट के प्रभारी पीएस भिलाला पर हमला किया और उनकी चप्पल तोड़ दी। इसके बाद विभाग ने भिलाला को सस्पेंड कर दिया।
स्पष्ट संदेश
सबलगढ़ एसडीएम अरविंद माहौर को युवती को परेशान करने, अभद्र व्यवहार और नियम-विरोधी तबादलों के आरोपों के आधार पर सस्पेंड किया गया है। यह घटनाक्रम सरकारी अधिकारियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि जनता की सेवा में आचरण की मर्यादा से समझौता किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं होगा।
