पोषण माह 2025 में नागदा में महिला बाल विकास विभाग ने लगाई पोषण प्रदर्शनी, 21 बच्चों का हुआ अन्न प्राशन समारोह
स्वस्थ बचपन की दिशा में कदम: नागदा परियोजना के अंतर्गत “राष्ट्रीय पोषण माह” में विविध व्यंजनों की झलक और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर जोर
नागदा जंक्शन (निप्र)।
महिला एवं बाल विकास विभाग, नागदा शहर परियोजना के तत्वावधान में 8वें राष्ट्रीय पोषण माह 2025 के अवसर पर गुरुवार को पोषण प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 21 शिशुओं का अन्न प्राशन संस्कार संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य मातृ और शिशु पोषण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना तथा टेक होम राशन (THR) के उपयोग से बनने वाले पौष्टिक व्यंजनों को प्रोत्साहित करना रहा।
राष्ट्रीय पोषण माह 2025: ‘संपूर्ण पोषण – देश का आधार’ थीम पर कार्यक्रम
राष्ट्रीय पोषण माह 2025 की थीम “संपूर्ण पोषण – स्वस्थ भारत का निर्माण” को ध्यान में रखते हुए परियोजना अधिकारी मुकेश वर्मा के नेतृत्व और जिला कार्यक्रम अधिकारी बृजेश त्रिपाठी के मार्गदर्शन में यह आयोजन हुआ।
इस कार्यक्रम में सेक्टर पर्यवेक्षक श्रीमती टीना बैरागी, नीता सुयल, राहत खान और शोभना कनेरे ने मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आंगनवाड़ी केंद्र को प्रवेश द्वार से लेकर प्रदर्शन स्थल तक पोषण थीम आधारित रंगोली, पौष्टिक संदेशों और बाल विकास पोस्टरों से सजाया गया। बच्चों और माताओं में पोषण के महत्व को रचनात्मक ढंग से प्रदर्शित करने के लिए आकर्षक सजावट ने सबका मन मोह लिया।
टेक होम राशन (THR) से बने पौष्टिक व्यंजनों की प्रदर्शनी
पोषण प्रदर्शनी में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा वितरण किए जा रहे टेक होम राशन (THR) से बनने वाले पौष्टिक व्यंजनों की प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने रचनात्मकता के साथ THR सामग्री से तैयार कई स्वादिष्ट और सेहतमंद व्यंजन प्रदर्शित किए, जिनमें शामिल थे —
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पौष्टिक बर्फी
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इडली
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उपमा
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पोहा
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लड्डू
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चकली
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नमकीन
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मीठे पारे
इन व्यंजनों का उद्देश्य यह दिखाना था कि घर पर आसानी से उपलब्ध सामग्री और टेक होम राशन का उपयोग करके कैसे बच्चों और गर्भवती माताओं के लिए पोषणयुक्त भोजन तैयार किया जा सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित माताओं को THR के उपयोग के तरीके और पोषण संबंधी फायदे भी बताए गए।
21 शिशुओं का अन्न प्राशन संस्कार — जीवन के पहले अन्न का शुभारंभ
पोषण प्रदर्शनी के साथ-साथ 21 बच्चों का अन्न प्राशन संस्कार भी किया गया।
आयोजन के दौरान प्रत्येक बच्चे का पुष्पमाला से स्वागत किया गया और उन्हें स्मृति उपहार प्रदान किए गए।
अन्न प्राशन संस्कार भारतीय परंपरा के अनुसार शिशु के जीवन में ठोस भोजन शुरू करने का पहला संस्कार होता है, जिसे वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस अवसर पर माताओं को शिशु की आयु, वजन और स्वास्थ्य के अनुसार उपयुक्त आहार देने की जानकारी दी गई।
विशेष रूप से यह बताया गया कि बच्चों को जन्म के छह महीने तक केवल माँ का दूध और उसके बाद पोषक आहार देना चाहिए।
पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सुपरवाइज़र्स ने लोगों को बताया कि संतुलित आहार, स्वच्छता और नियमित स्वास्थ्य जांच बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए आवश्यक हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं – जैसे प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, पोषण ट्रैकर अभियान, और आंगनवाड़ी पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) के बारे में भी जानकारी दी गई।
टीना बैरागी ने कहा —
“हमारा उद्देश्य सिर्फ अन्न प्राशन तक सीमित नहीं है, बल्कि हर मां को यह समझाना है कि पोषण जीवन की नींव है। अगर बच्चा स्वस्थ है तो परिवार और समाज दोनों मजबूत बनते हैं।”
दीपावली की शुभकामनाओं के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन टीना बैरागी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन और दीपावली पर्व की शुभकामनाओं के साथ हुआ। उन्होंने सभी उपस्थित माताओं, बच्चों, कार्यकर्ताओं और अधिकारियों का आभार जताया, जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाया।
कार्यक्रम में स्थानीय गणमान्य नागरिकों के साथ कई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएँ और माता-पिता शामिल हुए।
आयोजन ने नागदा क्षेत्र में पोषण जागरूकता अभियान को एक नई दिशा दी और “स्वस्थ मां – स्वस्थ शिशु – स्वस्थ समाज” के संदेश को सशक्त किया।
महिला बाल विकास विभाग नागदा की सक्रिय भूमिका
नागदा शहर परियोजना लगातार पोषण, मातृ स्वास्थ्य और बाल कल्याण के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती रही है।
2025 के राष्ट्रीय पोषण माह के तहत विभाग द्वारा कई गतिविधियाँ जैसे वजन जांच, स्वस्थ रेसिपी प्रतियोगिता, एनिमिया जागरूकता शिविर और किशोरी स्वास्थ्य कार्यशाला भी आयोजित की जा रही हैं।
परियोजना अधिकारी मुकेश वर्मा ने कहा —
“हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि नागदा की हर मां और बच्चा पोषित हो। पोषण माह सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि समाज में स्थायी परिवर्तन लाने का प्रयास है।”

