NSO सर्वे में बड़ा खुलासा: काम के घंटों में मामूली अंतर, फिर भी कमाई में भोपाल इंदौर से आगे
देश के 46 शहरों में किया गया व्यापक श्रम और रोजगार सर्वे
भोपाल/नई दिल्ली: केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (NSO) द्वारा देश के 46 प्रमुख शहरों में किए गए श्रम एवं रोजगार सर्वे से मध्यप्रदेश को लेकर बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस सर्वे में प्रदेश के चार प्रमुख शहर—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर—को शामिल किया गया। कुल 4,070 लोगों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट ने शहरी रोजगार और आय संरचना की नई तस्वीर पेश की है।
सर्वे के अनुसार, जहां एक ओर काम के घंटों में शहरों के बीच बहुत कम अंतर देखा गया है, वहीं दूसरी ओर आय के स्तर में बड़ा अंतर सामने आया है। खासकर भोपाल और इंदौर के बीच यह अंतर सबसे अधिक चर्चा का विषय बन गया है।
भोपाल की कमाई इंदौर से अधिक, आंकड़े चौंकाने वाले
रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश की प्रशासनिक राजधानी भोपाल, राज्य की आर्थिक राजधानी माने जाने वाले इंदौर से कमाई के मामले में आगे निकल गई है। दिलचस्प बात यह है कि भोपाल के लोग इंदौर की तुलना में केवल लगभग 50 मिनट अधिक प्रति सप्ताह काम करते हैं, यानी कुल मिलाकर करीब 47 घंटे प्रति सप्ताह काम करते हैं।
इसके बावजूद भोपाल में औसत आय इंदौर से काफी अधिक दर्ज की गई है। यह अंतर विशेष रूप से नियमित कर्मचारियों और स्वरोजगार करने वाले वर्ग में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
काम के घंटों में मामूली अंतर
सर्वे में सामने आया कि इंदौर में औसतन लोग 46.1 घंटे प्रति सप्ताह काम करते हैं, जबकि भोपाल में यह आंकड़ा 47.0 घंटे प्रति सप्ताह है। ग्वालियर और जबलपुर में काम के घंटे इससे थोड़े कम हैं।
यह आंकड़े यह दर्शाते हैं कि केवल काम के घंटे ही आय तय नहीं करते, बल्कि रोजगार की गुणवत्ता, क्षेत्र और वेतन संरचना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नियमित कर्मचारियों की आय में बड़ा अंतर
सर्वे में नियमित कर्मचारियों की मासिक आय के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं:
- भोपाल: ₹34,056
- इंदौर: ₹19,180
- ग्वालियर: ₹22,049
- जबलपुर: ₹21,682
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि भोपाल में नियमित नौकरी करने वालों की आय इंदौर से लगभग दोगुनी तक है। यह अंतर राज्य की आर्थिक संरचना को लेकर कई सवाल भी खड़े करता है।
स्वरोजगार में भी भोपाल आगे
स्वरोजगार (Self-employed) की श्रेणी में भी भोपाल की स्थिति इंदौर से बेहतर पाई गई:
- भोपाल: ₹29,524 प्रति माह
- इंदौर: ₹22,586 प्रति माह
- ग्वालियर: ₹18,730 प्रति माह
- जबलपुर: ₹19,522 प्रति माह
विशेषज्ञों का मानना है कि भोपाल में सेवा क्षेत्र और स्थिर व्यवसायिक गतिविधियों की अधिकता इसके पीछे एक प्रमुख कारण हो सकती है।
इंदौर में स्वरोजगार अधिक, लेकिन औसत आय कम
सर्वे के अनुसार इंदौर में कार्यबल का लगभग 50.4% हिस्सा स्वरोजगार से जुड़ा है, जबकि भोपाल में यह आंकड़ा 44.6% है। इसके बावजूद इंदौर की औसत आय भोपाल से कम है।
यह संकेत देता है कि इंदौर में स्वरोजगार का स्वरूप छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायों पर अधिक आधारित हो सकता है, जिससे औसत आय अपेक्षाकृत कम रह जाती है।
महिलाओं की कार्य भागीदारी और कार्य घंटे
सर्वे में महिलाओं की भागीदारी पर भी विशेष ध्यान दिया गया। आंकड़ों के अनुसार:
- इंदौर की महिलाएं औसतन 40.6 घंटे प्रति सप्ताह काम करती हैं
- भोपाल की महिलाएं औसतन 37.7 घंटे प्रति सप्ताह काम करती हैं
- जबलपुर की महिलाएं औसतन 40.7 घंटे प्रति सप्ताह काम करती हैं
- ग्वालियर की महिलाएं तुलनात्मक रूप से कम कार्य घंटे दर्ज करती हैं
महत्वपूर्ण बात यह है कि इंदौर और भोपाल दोनों शहरों में लगभग 59% महिलाएं नियमित नौकरी में कार्यरत हैं, जो महिला रोजगार भागीदारी का सकारात्मक संकेत है।
चार शहरों की तुलना से उभरी तस्वीर
सर्वे के आधार पर चारों शहरों की स्थिति इस प्रकार सामने आई:
- इंदौर: अधिक स्वरोजगार, लेकिन कम औसत आय
- भोपाल: कम अंतर से अधिक काम के घंटे, लेकिन सबसे अधिक आय
- ग्वालियर: मध्यम आय और सीमित रोजगार अवसर
- जबलपुर: अपेक्षाकृत स्थिर लेकिन कम आय स्तर
विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्र विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतर केवल काम के घंटों से नहीं समझा जा सकता। रोजगार की गुणवत्ता, सरकारी नौकरियों की हिस्सेदारी, सेवा क्षेत्र की मजबूती और कौशल आधारित रोजगार इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं।
भोपाल में सरकारी और उच्च वेतन वाली नौकरियों की अधिकता इसे आगे रख सकती है, जबकि इंदौर में छोटे व्यापार और स्वरोजगार की अधिकता औसत आय को प्रभावित करती है।
शहरी अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
इस सर्वे के परिणाम शहरी नीति निर्धारकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। यह स्पष्ट होता है कि केवल रोजगार की संख्या नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इंदौर में उच्च मूल्य वाले रोजगार और उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए, तो वहां की औसत आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
निष्कर्ष
एनएसओ का यह सर्वे मध्यप्रदेश के शहरी रोजगार और आय ढांचे की एक नई और महत्वपूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करता है। भोपाल और इंदौर के बीच आया यह अंतर नीति निर्माण, रोजगार रणनीति और शहरी विकास के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में यह आंकड़े राज्य की आर्थिक नीतियों को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
