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गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वरजी चातुर्मास इंदौर: भव्य और दिव्य ऐतिहासिक घोषणा से गूंजा मोहनखेड़ा तीर्थ, उमड़ा आस्था का अद्भुत महासंगम

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Published On: 3 April 2026
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गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वरजी चातुर्मास इंदौर की ऐतिहासिक घोषणा मोहनखेड़ा तीर्थ में हुई, जहां धर्म, भक्ति और आस्था का भव्य महासंगम देखने को मिला।

गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वरजी चातुर्मास इंदौर

चातुर्मास घोषणा का महत्व

जैन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और साधना का पवित्र काल होता है। गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वरजी चातुर्मास इंदौर की घोषणा ने इस वर्ष धर्मप्रेमियों के लिए एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया है।चातुर्मास के दौरान साधु-साध्वी एक स्थान पर स्थिर रहकर धर्म प्रवचन, साधना और समाज को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यह समय आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक उन्नति का होता है।

मोहनखेड़ा तीर्थ में भव्य आयोजन

मोहनखेड़ा स्थित दादा राजेन्द्र सूरीश्वरजी महाराज की समाधि तीर्थ स्थली और जयन्तसेन म्यूजियम में आयोजित यह कार्यक्रम ऐतिहासिक बन गया।

चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित इस भव्य महोत्सव में गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वरजी चातुर्मास इंदौर की घोषणा उनके श्रीमुख से की गई। पूरा परिसर धर्म, भक्ति और उल्लास से गूंज उठा।यह आयोजन केवल एक घोषणा नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक उत्सव था, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।

श्रद्धालुओं का अद्भुत जनसैलाब

इस आयोजन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मोहनखेड़ा, राजगढ़, झाबुआ, नागदा, उज्जैन, इंदौर, अहमदाबाद, सूरत, मुंबई, विजयवाड़ा, बैंगलोर और यहां तक कि जापान से भी श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को वैश्विक स्वरूप प्रदान किया।

हर श्रद्धालु की भावना एक ही थी—गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वरजी चातुर्मास इंदौर का हिस्सा बनना और इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनना।

धार्मिक वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा

साधु-साध्वी भगवंतों की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को दिव्य बना दिया। गुरु गच्छ परंपरा की गौरवशाली छटा हर ओर दिखाई दी।

भक्ति की तरंगें, मंत्रोच्चार, आराधना और गुरु कृपा का अनुभव हर श्रद्धालु के हृदय में हो रहा था। यह आयोजन एक आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया।

विशेष घोषणाएं और सम्मान

इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं और सम्मान भी किए गए—

  • बड़ावदा में जिनालय प्रतिष्ठा हेतु 8 मई का शुभ मुहूर्त घोषित
  • कैबिनेट मंत्री चेतन्य कश्यप को “जैन संघ विभूषण” सम्मान
  • ओलीजी आराधना लाभार्थी परिवार का विशेष बहुमान

ये सभी घटनाएं इस महोत्सव को और भी गौरवशाली बनाती हैं।

इंदौर श्रीसंघ को चातुर्मास स्वीकृति

सभी संघों की विनतियों को सुनने के बाद जब गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वरजी चातुर्मास इंदौर की स्वीकृति दी गई, तो पूरा परिसर खुशी से झूम उठा।ढोल-नगाड़ों की गूंज, रंग-गुलाल और जयघोष के बीच श्रद्धालु आनंद में मग्न हो गए। यह दृश्य वास्तव में अविस्मरणीय था।

सांस्कृतिक और भक्ति कार्यक्रम

कार्यक्रम में संगीतमय भक्ति प्रस्तुति ने सभी को भावविभोर कर दिया। संगीतकार दीपक करणपुरिया की प्रस्तुति ने माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया।कार्यक्रम का संचालन मोहित तातेड ने प्रभावी ढंग से किया, जिससे आयोजन व्यवस्थित और आकर्षक बना रहा।

समाज के लिए संदेश

गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वरजी चातुर्मास इंदौर का यह आयोजन समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है—

  • संयम और साधना का महत्व
  • आत्मजागरण की आवश्यकता
  • धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा

चातुर्मास केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का अवसर है।

निष्कर्ष

मोहनखेड़ा तीर्थ में आयोजित गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वरजी चातुर्मास इंदौर की घोषणा एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक क्षण बन गई।यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत प्रभावशाली रहा। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति, भक्ति का वातावरण और गुरु कृपा ने इसे अविस्मरणीय बना दिया।यह चातुर्मास निश्चित रूप से इंदौर और पूरे जैन समाज के लिए एक नई आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत है।

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