मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के दिल्ली दौरे: राजनीतिक हलकों में उठी नई अटकलें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के हालिया दिल्ली दौरे ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर अनेक राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही हैं। नवरात्रि के पहले तक इन दौरों को प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों से जोड़ा गया था। हालांकि, अभी तक किसी भी प्रकार की नियुक्ति या मंत्रिमंडल विस्तार की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने केंद्र में अपने बंगले में फाइलों को निबटाया क्योंकि मध्य प्रदेश में अपने दौरे और व्यस्तताओं के कारण समय निकालना मुश्किल था। यह भी बताया जा रहा है कि डॉ यादव ने केंद्रीय नेताओं, खासकर केंद्रीय मंत्री अमित शाह और शिवराज सिंह चौहान से कई मुलाकातें की हैं। इन मुलाकातों ने प्रदेश में कुछ बड़े राजनीतिक फैसलों की उम्मीद बढ़ा दी है।
राजनीतिक जानकार यह भी मानते हैं कि हालिया कफ सिरप त्रासदी और बच्चों की मौत का मामला भी दिल्ली तक पहुंच चुका है। इस मामले ने प्रदेश सरकार और भाजपा के लिए सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव पैदा किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे का एक कारण प्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संकट प्रबंधन और राजनीतिक रणनीति तय करना भी हो सकता है।
भाजपा में संगठन मंत्रियों की वापसी: हेमंत खंडेलवाल की नई योजना
प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही संगठन में नई नीति अपनाने के मूड में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी टीम में सांसदों, विधायकों और नेताओं के परिजनों को स्थान नहीं दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, खंडेलवाल पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा द्वारा हटाए गए संगठन मंत्रियों को वापस लाने की तैयारी में हैं। यह संगठन मंत्री 2021 में वीडी शर्मा द्वारा हटाए गए थे। इनमें शैलेंद्र बरुआ, आशुतोष तिवारी, जितेंद्र लिटोरिया, श्याम महाजन, जयपाल चावड़ा और केशव सिंह भदौरिया शामिल थे।
बताया गया है कि इन नेताओं में से अधिकांश को राज्य सरकार ने मंत्री का दर्जा देकर निगम-मंडलों में एडजस्ट किया गया था। अब खबर यह है कि खंडेलवाल की नई प्रदेश कार्यकारिणी में ये संगठन मंत्री फिर से शामिल हो सकते हैं। यह नया गठन दिवाली से पहले घोषित होने की संभावना है।
दिग्विजय सिंह और उमंग सिंघार की मुलाकात: दिखावटी या रणनीतिक?
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और उमंग सिंघार की हालिया मुलाकातें केवल दिखावटी नहीं हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद उमंग सिंघार ने दिग्विजय सिंह के बंगले जाकर कई राजनीतिक संदेश दिए थे।
इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भले ही उमंग की बुआ जमुना देवी और दिग्विजय के बीच पहले संबंध अच्छे नहीं थे, लेकिन राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी अस्थायी होती है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दिग्विजय और उमंग के बीच मतभेद अभी भी गहरे और सुलझाने योग्य नहीं हैं।
सूत्र बताते हैं कि इस मुलाकात का मुख्य कारण आदिवासी जननायक टंट्या मामा भील की फिल्म को लेकर चर्चा थी। इसके अलावा यह भी माना जा रहा है कि दोनों नेताओं की यह मुलाकात आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए हो सकती है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की बिहार में रणनीति: यादव समाज को रिझाने की चुनौती
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के लिए बिहार विधानसभा चुनाव एक बड़ी चुनौती लेकर आए हैं। भाजपा ने उन्हें यादव बहुल्य विधानसभा सीटों में जीत दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी है। यह चुनौती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार में यादव समाज पर लालू यादव और उनके परिवार का प्रभाव काफी मजबूत है।
इस चुनावी रणभूमि में मुख्यमंत्री का काम है कि वे यादव समाज को भाजपा की ओर रिझाएं और समर्थन जुटाएं। इस चुनौती को देखते हुए उनकी सभाओं और रोड शो की तैयारी जोरों पर है। सूत्रों के अनुसार, वे 17 अक्टूबर को बिहार जा सकते हैं। इससे पहले, 14 सितंबर को वे बिहार में यादव समाज के कार्यक्रम में शामिल हो चुके हैं।
इस अभियान में मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ महेंद्र सिंह, संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, विश्वास सारंग और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी शामिल हैं। हालांकि, सभी की नजर मुख्यमंत्री डॉ यादव पर ही टिकी है।
पूर्व विधायक की VIDE कमेंट: वीडी शर्मा के लिए टिप्पणी
भाजपा के एक पूर्व विधायक गुड्डन पाठक ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के बारे में एक टिप्पणी कर चर्चा बटोरी। उन्होंने वीडी शर्मा की तुलना भारतीय इतिहास के सुलकी सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक से की। पाठक ने कहा कि जैसे सुल्तान ने चमड़े के सिक्के चलवा कर इतिहास में अपनी पहचान बनाई, उसी तरह वीडी शर्मा ने भी छतरपुर में चमड़े के सिक्के चलवा कर अपना नाम दर्ज करवाया।
पूर्व विधायक ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि वीडी की कार्यशैली से संगठन की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया और 3 साल से वन-टू-वन विचार विमर्श लंबित रहा। पाठक ने अंत में उम्मीद जताई कि अगले जन्मदिन तक वीडी शर्मा त्रुटियों को सुधारने के लिए सहमत होंगे। यह टिप्पणी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी है।
निष्कर्ष: मध्य प्रदेश की राजनीति में नई हलचल
मध्य प्रदेश में वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखकर कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के दिल्ली दौरे, भाजपा संगठन में बदलाव, मंत्री-नियुक्तियों की संभावनाएं, और बिहार चुनाव में यादव समाज को रिझाने की रणनीति प्रदेश की राजनीति को नया आकार देने जा रही हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि हालिया घटनाएं यह संकेत देती हैं कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश में कई सियासी हलचलें देखने को मिल सकती हैं। चाहे वह मंत्रिमंडल विस्तार हो, भाजपा संगठन में फेरबदल या फिर डॉ मोहन यादव की बिहार यात्रा, इन सभी गतिविधियों पर राजनीतिक निगाहें लगी हुई हैं।
मध्य प्रदेश की राजनीति के इन गतिशील परिवर्तनों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि आने वाले महीनों में राजनीतिक समीकरण और भी रोचक और महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
