भोपाल में बनेगा नया 4-लेन वेस्टर्न बायपास, 1 घंटे की यात्रा घटकर आधे घंटे में पूरी
भोपाल। राजधानी भोपाल में ट्रैफिक की दिक्कतें जल्द ही कम होने वाली हैं। सरकार ने शहर के लिए एक नए वेस्टर्न 4-लेन बायपास की मंजूरी दे दी है। इस सड़क के लिए 25 गांवों की करीब 557 एकड़ जमीन ली जाएगी। बायपास की लंबाई 35.60 किलोमीटर होगी। इसके बनने से अभी 1.5 घंटे में तय होने वाला सफर सिर्फ 30 मिनट में पूरा हो जाएगा।
परियोजना पर कितना खर्च होगा?
- इस पूरे काम पर लगभग 470 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
- जमीन अधिग्रहण (लोगों की जमीन लेने और मुआवजा देने की प्रक्रिया) को 6 से 8 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।
- इसके लिए पहले ही 100 करोड़ रुपये रायसेन कलेक्टर के पास जमा थे, अब यह रकम भोपाल कलेक्टर को दी जाएगी।
जमीन और मुआवजा
- जिन लोगों की जमीन इस प्रोजेक्ट में जाएगी, उन्हें नोटिस मिलेगा।
- जमीन मालिकों को अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 30 दिन का समय दिया जाएगा।
- उसके बाद कलेक्टर तय करेंगे कि किसे कितना मुआवजा दिया जाए।
- प्रभावित परिवारों को कलेक्टर गाइडलाइन से दोगुना मुआवजा मिलेगा ताकि उनका पुनर्वास आसानी से हो सके।
बायपास का रूट
- यह सड़क रतनपुर रोड से शुरू होगी।
- फिर कोलार और रातीबड़ होकर निकलेगी।
- अंत में यह भोपाल-देवास रोड से जुड़ते हुए फंदा कलां तक जाएगी।
वन्यजीवों की सुरक्षा के इंतजाम
- बायपास का एक हिस्सा रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर जोन से गुजरता है।
- पहले यहाँ 6.1 किमी क्षेत्र आ रहा था, जिसे घटाकर 5.45 किमी किया गया है।
- जानवरों की आवाजाही सुरक्षित रखने के लिए:
- 7 जगहों पर साउंड-प्रूफ ऊँची सड़कें (एलिवेटेड रोड) बनाई जाएंगी।
- सड़क के दोनों ओर 10 मीटर ऊँची फेंसिंग होगी।
- इससे बाघ और अन्य जंगली जानवर नीचे से सुरक्षित निकल पाएंगे।
- इन सुरक्षा इंतजामों पर ही लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
प्रोजेक्ट कैसे बनेगा और चलेगा?
- यह सड़क हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर बनेगी।
- इसका मतलब है कि 60% खर्च ठेकेदार कंपनी (PNP इंफ्राटेक लिमिटेड) करेगी।
- बाकी 40% खर्च सरकार दो साल में किस्तों में देगी।
- कंपनी अगले 15 साल तक सड़क की देखभाल भी करेगी।
टोल टैक्स वसूली
- सड़क पर एक टोल नाका लगेगा।
- यहां से वसूला गया टोल सीधा MPRDC (मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) के खाते में जाएगा।
- इसका इस्तेमाल सड़क के रखरखाव और संचालन में होगा।
