NEET-UG Paper Leak Case: CBI का बड़ा खुलासा, पेपर लीक के लिए दिए गए थे 5 लाख रुपये; 111 सवाल असली प्रश्नपत्र से मिले मैच
NEET-UG Paper Leak: नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी ने अदालत में दावा किया है कि लातूर के एक कोचिंग सेंटर संचालक ने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए एनटीए पैनल में शामिल एक केमिस्ट्री शिक्षक को 5 लाख रुपये दिए थे। सीबीआई के मुताबिक, लीक हुए प्रश्नपत्र के कई सवाल असली परीक्षा के प्रश्नपत्र से हूबहू मेल खाते पाए गए हैं।
NEET-यूजी पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई ने स्पेशल कोर्ट में आरोपी की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कई अहम जानकारियां साझा की हैं। एजेंसी ने बताया कि लातूर स्थित रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस के संचालक शिवराज रघुनाथ मोतेगांवकर पर परीक्षा से पहले पेपर हासिल करने का आरोप है।
सीबीआई के अनुसार, मोतेगांवकर ने एनटीए पैनल में शामिल केमिस्ट्री शिक्षक पीवी कुलकर्णी से लीक प्रश्नपत्र प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर 5 लाख रुपये का भुगतान किया था।
बेटे के एडमिशन के जरिए हुई थी संपर्क की शुरुआत
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि मोतेगांवकर ने अपने बेटे का एडमिशन पीवी कुलकर्णी की कोचिंग क्लास में कराया था। इसी दौरान उनके बीच संपर्क बना और कथित तौर पर पेपर लीक की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
सीबीआई का आरोप है कि परीक्षा से पहले ही मोतेगांवकर और अन्य आरोपियों ने नीट-यूजी का लीक प्रश्नपत्र हासिल कर लिया था। इसके बाद प्रश्नों को छात्रों तक पहुंचाने की कोशिश की गई।
मोबाइल जांच में मिलीं 36 तस्वीरें
सीबीआई ने अदालत में बताया कि जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन की जांच की गई। इसमें 36 तस्वीरें बरामद हुईं, जिनमें केमिस्ट्री विषय के कुल 132 हाथ से लिखे हुए सवाल पाए गए।
जांच एजेंसी का कहना है कि ये सवाल परीक्षा से पहले तैयार किए गए थे। इन तस्वीरों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि प्रश्नपत्र कब और किस माध्यम से आरोपियों तक पहुंचा।
111 सवाल असली प्रश्नपत्र से मिले
सीबीआई के अनुसार, मोबाइल से मिली तस्वीरों में मौजूद सवालों की जांच की गई तो उनमें से 111 प्रश्न राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा तैयार किए गए वास्तविक प्रश्नपत्र से मैच हुए।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि यह समानता केवल सामान्य नहीं थी, बल्कि कई सवाल बिल्कुल उसी क्रम और तरीके से मिले, जिससे पेपर लीक की आशंका को बल मिलता है।
हैंडराइटिंग और मेटाडेटा से मिले अहम सुराग
सीबीआई ने अदालत में यह भी दावा किया कि मोबाइल में मिली तस्वीरों में लिखे प्रश्न मोतेगांवकर की ही हैंडराइटिंग में थे।
इसके अलावा फोन की मेटाडेटा जांच में सामने आया कि ये तस्वीरें 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा से करीब दस दिन पहले खींची गई थीं। इससे जांच एजेंसी को यह संकेत मिला कि प्रश्न परीक्षा से पहले ही उपलब्ध हो चुके थे।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि तस्वीरों और डिजिटल सबूतों की जांच के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
पैसे के लेन-देन की भी जांच
जांच एजेंसी ने बताया कि लीक प्रश्नों के बदले दिए गए पैसे की जांच भी की जा रही है। सीबीआई के अनुसार, पेपर लीक के लिए दी गई रकम को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सह-आरोपी मनोज भगवानराव शिरूरे के इशारे पर सामने आई है।
एजेंसी का कहना है कि मामले में आर्थिक लेन-देन, आरोपियों के बीच संपर्क और पेपर पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की जांच जारी है।
अब तक 13 आरोपी गिरफ्तार
NEET-यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई अब तक कुल 13 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी विभिन्न राज्यों में आरोपियों से पूछताछ कर रही है और पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
सीबीआई का फोकस यह पता लगाने पर है कि प्रश्नपत्र किस स्तर से लीक हुआ, किन-किन लोगों तक पहुंचा और इसमें कितने अभ्यर्थी या अन्य व्यक्ति शामिल थे।
लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला
NEET-यूजी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। हर साल लाखों छात्र इसमें शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक का मामला छात्रों और अभिभावकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
जांच एजेंसियां इस मामले में सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं ताकि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
सीबीआई द्वारा अदालत में पेश किए गए इन तथ्यों के बाद नीट-यूजी पेपर लीक मामले में जांच को एक नया मोड़ मिला है। आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना है।
