NEET-UG 2026 Re-Exam Date: पेपर लीक के बाद 21 जून को दोबारा होगी परीक्षा, बड़े नेटवर्क का खुलासा, जांच तीन राज्यों तक पहुंची
NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि अब यह परीक्षा 21 जून 2026 को दोबारा आयोजित की जाएगी। यह फैसला 3 मई को हुई परीक्षा रद्द किए जाने के बाद लिया गया है, जिसमें पेपर लीक और अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए थे।
इस फैसले से देशभर के करीब 22 लाख मेडिकल अभ्यर्थियों पर सीधा असर पड़ा है, जो इस परीक्षा के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने की तैयारी कर रहे थे।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
इस पूरे मामले की शुरुआत उस कथित “गेस पेपर” से हुई, जिसे परीक्षा से पहले ही कई छात्रों तक पहुंचा दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गेस पेपर के लगभग 120 सवाल असली NEET-UG परीक्षा के प्रश्नों से मेल खाते पाए गए।
इसके अलावा बायोलॉजी सेक्शन के कई सवाल भी लगभग समान पाए गए, जिससे परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। जांच में सामने आया कि यह सामग्री परीक्षा से करीब एक महीने पहले राजस्थान के सीकर जैसे कोचिंग हब में पहुंच चुकी थी।
आरोप है कि इस गेस पेपर को लाखों रुपये में बेचा गया और परीक्षा से ठीक एक रात पहले भी कुछ छात्रों तक यह सामग्री पहुंचाई गई।
राजस्थान SOG की जांच और छापेमारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने जांच शुरू की और कई स्थानों पर छापेमारी की। जांच का दायरा अब राजस्थान से बाहर निकलकर तीन राज्यों तक पहुंच गया है।
एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और इसका संचालन किस स्तर पर किया जा रहा था।
जयपुर से मास्टरमाइंड हिरासत में
जांच के दौरान जयपुर से मनीष यादव नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है, जिसे इस पूरे पेपर लीक नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
इसके अलावा महाराष्ट्र के नासिक से शुभम खैरनार नाम के एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है। शुभम भोपाल के एक कॉलेज से BAMS की पढ़ाई कर रहा था और अंतिम वर्ष का छात्र बताया जा रहा है।
नासिक कनेक्शन और डिजिटल लीक का खुलासा
जांच में एक बड़ा खुलासा यह हुआ है कि NEET पेपर की पहली डिजिटल कॉपी नासिक भेजी गई थी। इसके बाद ही इस पेपर को आगे विभिन्न एजेंटों और छात्रों तक पहुंचाया गया।
एजेंसियों का मानना है कि इसी डिजिटल कॉपी के जरिए पूरे नेटवर्क में प्रश्नों का वितरण हुआ और इसे एक संगठित तरीके से फैलाया गया।
सवालों का क्रम भी बिल्कुल समान
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि केवल सवाल ही नहीं, बल्कि कथित गेस पेपर में प्रश्नों का क्रम भी असली परीक्षा से बिल्कुल मेल खाता था।
इससे यह आशंका और मजबूत हुई कि यह कोई सामान्य कोचिंग गेस पेपर नहीं बल्कि सुनियोजित लीक का हिस्सा था।
कीमत 30 हजार से लेकर 5 लाख रुपये तक
सूत्रों के मुताबिक इस कथित गेस पेपर की कीमत शुरुआत में करीब 5 लाख रुपये तक बताई जा रही है। जैसे-जैसे परीक्षा की तारीख नजदीक आई, इसकी कीमत घटकर 30 हजार रुपये तक पहुंच गई।
जांच के दौरान कई मोबाइल फोन में ऐसे दस्तावेज मिले जिनमें “Forwarded Many Times” जैसे टैग भी दिखाई दिए, जिससे डिजिटल फॉरवर्डिंग नेटवर्क की पुष्टि होती है।
CBI को सौंपी गई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पूरे केस की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क कितने राज्यों में फैला हुआ था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है।
छात्रों पर बड़ा असर
इस पूरे विवाद के कारण देश के लाखों छात्रों की तैयारी प्रभावित हुई है। परीक्षा रद्द होने और फिर नई तारीख घोषित होने से छात्रों को एक बार फिर अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है।
कोचिंग संस्थानों ने भी अपने नए बैच और टेस्ट शेड्यूल में बदलाव शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त समय छात्रों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन मानसिक दबाव भी बढ़ेगा।
निष्कर्ष
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। हालांकि NTA ने अब 21 जून को नई परीक्षा तिथि घोषित कर दी है, लेकिन इस पूरे नेटवर्क की जांच अभी भी जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
