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NEET पेपर लीक मामला: सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा विस्तृत हलफनामा, सरकार और CJP के बीच आज अहम बैठक

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Published On: 24 July 2026
NEET Paper Leak Hearing: SC Questions Centre, Fast-Track Courts Proposed
— NEET Paper Leak Hearing: SC Questions Centre, Fast-Track Courts Proposed

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NEET पेपर लीक मामला: सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा विस्तृत हलफनामा, सरकार और CJP के बीच आज अहम बैठक

नई दिल्ली | देशभर में चर्चा का विषय बने NEET UG पेपर लीक मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार से विस्तृत हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा है कि जांच की वर्तमान स्थिति क्या है, अब तक क्या कार्रवाई हुई है और भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या स्थायी व्यवस्था की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह इस संवेदनशील मामले की लगातार निगरानी करेगा और सरकार द्वारा दाखिल किए जाने वाले हलफनामे के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय की जाएगी। इस बीच, पेपर लीक को लेकर आंदोलन कर रहे संगठन CJP और केंद्र सरकार के बीच आज दूसरी दौर की वार्ता भी प्रस्तावित है। दोनों पक्षों की यह बैठक दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित होगी, जिस पर देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों की निगाहें टिकी हुई हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा विस्तृत जवाब

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार को यह भी बताना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कौन-कौन से संस्थागत सुधार किए जा रहे हैं।

अदालत ने सरकार से कहा कि वह अपने हलफनामे में निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी दे—

  • अब तक की जांच किस चरण में पहुंची है।
  • किन-किन लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
  • पेपर लीक नेटवर्क के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई।
  • राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की सुरक्षा के लिए क्या नई व्यवस्था लागू की जा रही है।
  • डिजिटल और तकनीकी सुरक्षा को कैसे मजबूत किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों छात्रों के भविष्य और देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है। इसलिए अदालत पूरे मामले पर गंभीरता से नजर बनाए रखेगी।

पूरे वर्ष निगरानी करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह इस मामले को केवल एक बार की सुनवाई तक सीमित नहीं रखेगी। न्यायालय समय-समय पर सरकार से प्रगति रिपोर्ट मांगेगा और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी निर्देश जारी करेगा।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी इस मामले की गंभीरता को दर्शाती है। इससे जांच एजेंसियों और संबंधित संस्थानों पर जवाबदेही भी बढ़ेगी।

सरकार और CJP के बीच आज दूसरी दौर की बातचीत

इधर, NEET पेपर लीक को लेकर आंदोलन कर रहे संगठन CJP और केंद्र सरकार के बीच शुक्रवार को दूसरी बार बातचीत होने जा रही है।

यह बैठक दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित होगी। इससे पहले 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के सरकारी आवास पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन उस बैठक में कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी थी।

सरकार का कहना है कि उसने आंदोलनकारी संगठन को कई बार बातचीत के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन संगठन ने सरकारी आवास पर बैठक करने के बजाय किसी तटस्थ स्थान पर वार्ता की मांग की थी। इसी मांग को स्वीकार करते हुए अब कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में दूसरी बैठक आयोजित की जा रही है।

इस बैठक में आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों पर चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा सुरक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।

26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने समाप्त किया अनशन

पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक अनशन किया।

गुरुवार देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया।

हालांकि, अनशन समाप्त होने के बावजूद आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आंदोलनकारी संगठन ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगें पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार छात्रों के आंदोलन के दबाव में बातचीत के लिए तैयार हुई है।

उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते और पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

संगठन का कहना है कि देशभर के लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और केवल जांच से काम नहीं चलेगा, बल्कि जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की तैयारी

पेपर लीक मामलों में शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार भी सक्रिय दिखाई दे रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात कहा कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे ताकि ऐसे मामलों का त्वरित निपटारा हो सके।

सरकार का मानना है कि यदि दोषियों को शीघ्र सजा मिलेगी तो भविष्य में इस प्रकार के अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी दिए अहम निर्देश

इधर, बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी महाराष्ट्र में पेपर लीक से जुड़े मामलों की गंभीरता को देखते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं।

अदालत ने नागपुर और औरंगाबाद में दो विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने के निर्देश दिए हैं। इन अदालतों में पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अलग अदालतों के गठन से लंबित मामलों का तेजी से निपटारा संभव होगा और छात्रों को शीघ्र न्याय मिलेगा।

CJI सूर्यकांत ने मीडिया रिपोर्टों का किया खंडन

सुनवाई के दौरान एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मीडिया में चल रही कुछ खबरों का खंडन किया।

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई से इनकार कर दिया है।

इस पर CJI ने स्पष्ट कहा कि यह खबर पूरी तरह गलत और भ्रामक है।

उन्होंने बताया कि अदालत के समक्ष ऐसी कोई विधिवत रिट याचिका दाखिल ही नहीं की गई थी, इसलिए सुनवाई से इनकार करने का प्रश्न ही नहीं उठता।

“रिट याचिका और प्रतिनिधित्व अलग-अलग चीजें हैं”

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि शुक्रवार सुबह 10 बजे तक अदालत के समक्ष इस मामले से संबंधित कोई औपचारिक रिट याचिका मौजूद नहीं थी।

उन्होंने बताया कि केवल एक Representation (प्रतिनिधित्व) भेजा गया था, जिसे कानूनी दृष्टि से रिट याचिका नहीं माना जा सकता।

CJI ने कहा—

“मैं किसी प्रतिनिधित्व को रिट याचिका कैसे मान सकता हूं?”

उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी मामले को सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता।

वकीलों को भी दी प्रक्रिया अपनाने की सलाह

मुख्य न्यायाधीश ने उन अधिवक्ताओं पर भी टिप्पणी की जो औपचारिक याचिका दाखिल किए बिना ही तत्काल सुनवाई की अपेक्षा रखते हैं।

उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना प्रत्येक पक्ष की जिम्मेदारी है।

बिना वैधानिक दस्तावेज दाखिल किए अदालत से तत्काल सुनवाई की अपेक्षा करना न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।

मीडिया की रिपोर्टिंग पर जताई नाराजगी

CJI सूर्यकांत ने मीडिया की कुछ रिपोर्टों पर भी नाराजगी व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों से यह प्रचारित किया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया, जबकि वास्तविक स्थिति बिल्कुल अलग थी।

उन्होंने कहा कि अदालत के समक्ष कोई विधिवत याचिका थी ही नहीं, इसलिए सुनवाई का प्रश्न नहीं उठता।

मुख्य न्यायाधीश ने मीडिया संस्थानों से तथ्य जांचने के बाद ही समाचार प्रकाशित और प्रसारित करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि बिना सत्यापन के ऐसी खबरें प्रकाशित करना गैर-जिम्मेदाराना पत्रकारिता की श्रेणी में आता है।

छात्रों की निगाहें अगली सुनवाई पर

NEET UG पेपर लीक विवाद ने देशभर के लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।

अब सभी की निगाहें तीन महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं—

  • केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जाने वाला विस्तृत हलफनामा।
  • सरकार और CJP के बीच होने वाली दूसरी दौर की बातचीत।
  • सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और उसके निर्देश।

यदि सरकार अपने हलफनामे में परीक्षा सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी उपाय प्रस्तुत करती है, तो इससे भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत होने की उम्मीद की जा सकती है। वहीं, आंदोलनकारी संगठन भी सरकार के अगले कदमों पर अपनी रणनीति तय करेगा।

निष्कर्ष

NEET UG पेपर लीक मामला अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों के विश्वास से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त निगरानी, केंद्र सरकार से मांगा गया विस्तृत हलफनामा, सरकार और आंदोलनकारी संगठन के बीच जारी वार्ता तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहल इस बात का संकेत हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं। देशभर के लाखों अभ्यर्थी अब इस उम्मीद में हैं कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत एवं पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाएगी।

 

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