शंकरा आई फाउंडेशन इंडिया की गोल्डन जुबली: 50 वर्षों की सेवा और समर्पण का उत्सव
इंदौर के शंकरा आई सेंटर में हुआ समारोह; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्चुअल रूप से जुड़े
इंदौर। जरूरतमंद लोगों तक गुणवत्तापूर्ण नेत्र चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने और दृष्टिहीनता की रोकथाम के उद्देश्य से कार्यरत शंकरा आई फाउंडेशन इंडिया ने अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर इंदौर स्थित शंकरा आई सेंटर में गोल्डन जुबली समारोह आयोजित किया। इस अवसर पर संस्था की पांच दशकों की सेवा, समर्पण और सामाजिक प्रतिबद्धता को याद किया गया। समारोह में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ला, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सांसद शंकर लालवानी और संस्था के संस्थापक पद्मश्री डॉ. आर.वी. रमणी सहित अन्य गणमान्यजन भी उपस्थित रहे।
कोयंबटूर से शुरू हुई सेवा यात्रा 10 राज्यों तक पहुंची
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने वर्चुअल संबोधन में संस्था की पांच दशकों की यात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 1977 में तमिलनाडु के कोयंबटूर में डॉ. आर.वी. रमणी और डॉ. राधा रमणी ने जरूरतमंदों की सेवा के उद्देश्य से इस पहल की शुरुआत की थी। एक छोटी शुरुआत का देश के 10 राज्यों तक पहुंचना और इतने वर्षों तक सेवा का संकल्प लगातार निभाना संस्था की उल्लेखनीय उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री ने संस्था की इस यात्रा को सेवा-भाव और निरंतर प्रयासों का उदाहरण बताया। उन्होंने गोल्डन जुबली के अवसर पर फाउंडेशन से जुड़े लोगों को बधाई दी और आगे भी इसी प्रतिबद्धता के साथ जरूरतमंदों के लिए कार्य करते रहने की शुभकामनाएं दीं।
जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क उपचार


अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने शंकरा आई फाउंडेशन इंडिया के सेवा-आधारित चिकित्सा मॉडल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संस्था में लगभग 80 प्रतिशत जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क नेत्र चिकित्सा सेवाएं दी जाती हैं, जबकि शेष 20 प्रतिशत मरीज उपचार के लिए भुगतान करते हैं। उनके अनुसार, जरूरतमंदों तक चिकित्सा सुविधा पहुंचाने का यह प्रयास संस्था के सामाजिक दायित्व और सेवा-भाव को दर्शाता है।
डॉ. यादव ने समाजसेवा और जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समाज के हित में किए जाने वाले सेवा कार्यों के लिए लगातार प्रेरित करते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक लोगों तक पहुंचाने में ऐसे संस्थागत प्रयासों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल कॉलेजों, एंबुलेंस सेवाओं और ट्रॉमा सेंटरों की सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शंकरा आई फाउंडेशन इंडिया आने वाले वर्षों में भी सेवा-भाव से समाज के लिए काम करता रहेगा। गोल्डन जुबली को संस्था की उपलब्धियों के साथ-साथ भविष्य की जिम्मेदारियों और संकल्पों को आगे बढ़ाने का अवसर बताते हुए उन्होंने शुभकामनाएं दीं।
पांच लाख बच्चों की निःशुल्क नेत्र जांच का लक्ष्य
समारोह में संस्था के संस्थापक पद्मश्री डॉ. आर.वी. रमणी ने नेत्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों और भविष्य की योजनाओं पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शंकरा आई फाउंडेशन इंडिया लंबे समय से नेत्र स्वास्थ्य और समाजसेवा के क्षेत्र में निरंतर काम कर रहा है।
डॉ. रमणी ने ‘रेनबो स्क्रीनिंग प्रोग्राम’ का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से पांच लाख बच्चों की निःशुल्क नेत्र जांच करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान करना और उन्हें उचित उपचार तथा मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में मदद करना है। बच्चों की समय पर जांच से दृष्टि संबंधी परेशानी सामने आने पर आवश्यक सहायता और उपचार की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
भविष्य में सेवाओं का दायरा बढ़ाने का संकल्प


गोल्डन जुबली समारोह संस्था की पांच दशकों की उपलब्धियों को याद करने के साथ भविष्य की योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर भी बना। जरूरतमंदों के लिए नेत्र चिकित्सा सेवाएं जारी रखने और अधिक लोगों तक उपचार पहुंचाने की प्रतिबद्धता इस आयोजन के केंद्र में रही।
शंकरा आई फाउंडेशन इंडिया की यात्रा सेवा, समर्पण और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान देने के प्रयासों को सामने रखती है। संस्था ने गोल्डन जुबली के अवसर पर नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ाने और जरूरतमंद मरीजों तक उपचार पहुंचाने के संकल्प को दोहराया।
शंकरा आई फाउंडेशन इंडिया, इंदौर
