नवमी पुण्य स्मृति थांदला जैन आयोजन में पुण्य सम्राट को भावपूर्ण श्रद्धांजलि, तपस्वियों का बहुमान, नवकार जाप और अनुकम्पा दान के प्रेरणादायक दृश्य।
नवमी पुण्य स्मृति थांदला जैन आयोजन: तपस्वियों का बहुमान और अनुकम्पा दान
नवमी पुण्य स्मृति थांदला जैन आयोजन का आध्यात्मिक महत्व
नवमी पुण्य स्मृति थांदला जैन आयोजन आस्था और भक्ति का एक अनूठा संगम बनकर सामने आया। जैन धर्म में प्राणी मात्र के प्रति दया, करुणा और अनुकम्पा को सम्यक्त्व का प्रमुख लक्षण माना गया है। यही कारण है कि संत महापुरुषों के जन्म और देवलोक गमन को समाज उत्सव के रूप में मनाता है।
रत्नत्रय—ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप—की आराधना करते हुए समाज सेवा का यह अद्भुत उदाहरण इस आयोजन में देखने को मिला।
थांदला में नवमी पुण्य स्मृति थांदला जैन आयोजन का भव्य आयोजन
थांदला में श्री सोधर्म बृहत्पोग्छीय युग प्रभावकाचार्य, नवकार महामंत्र के परम साधक, राष्ट्रसंत पुण्य सम्राट श्रीमद् विजयजयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा. की नवम पुण्य स्मृति अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई।
इस विशेष अवसर पर विश्व नवकार दिवस का भी संयोग रहा, जिसने आयोजन को और अधिक आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की।
नवकार मंत्र जाप और पूजा
प्रातः 7 बजे केसरियानाथ बड़े मंदिर में पुण्य सम्राट जयंत गुरु इक्कीसा का पाठ किया गया।
इसके पश्चात पुण्य सम्राट के चित्र पर वास्केप पूजा करते हुए उनके गुणों का अनुमोदन किया गया।प्रातः 8:02 से 9:02 बजे तक स्थानीय पौषध भवन में विराजित महासती निखिलशीलाजी म.सा. आदि ठाणा-4 के सानिध्य में सामूहिक नवकार महामंत्र जाप किया गया।
तपस्वियों का बहुमान एवं पारणा
नगर में चल रहे ऐतिहासिक 90 वर्षीतप आराधकों का भव्य बहुमान किया गया।
सभी तपस्वियों को सम्मानपूर्वक पारणा करवाकर उनके तप और साधना के प्रति समाज ने अपनी श्रद्धा प्रकट की।यह दृश्य अत्यंत प्रेरणादायक रहा, जहाँ तप और त्याग के प्रति गहरी आस्था दिखाई दी।
अनुकम्पा दान और सेवा कार्य
नवमी पुण्य स्मृति थांदला जैन आयोजन के अंतर्गत गुरुभक्तों ने स्थानीय शासकीय अस्पताल पहुंचकर मरीजों की कुशलता की कामना की।इस अवसर पर फल, बिस्किट आदि का वितरण किया गया, जो जैन धर्म के सेवा और करुणा भाव का सजीव उदाहरण है।
संध्या आरती एवं श्रद्धांजलि
शाम को बड़े मंदिर में भगवानजी और दादा गुरुदेव राजेंद्रसूरीश्वरजी म.सा. की आरती के पश्चात पुण्य सम्राट की आरती उतारी गई।पूरे वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संचार हुआ।
समाज की व्यापक सहभागिता
इस भव्य आयोजन में संघ के वरिष्ठजन—उमेश बी पींचा, रमनलाल मुथा, कमलेश जैन “दायजी”, रुपेश पोरवाल, उमेश आर पीचा, विमल पीचा, उमेश लुणावत, संदीप लोढ़ा, संजय फुलफगर, चंचल भंडारी, नितेश पोरवाल, मोक्ष पोरवाल, मनीष गोलेछा, भूपेंद्र नाहटा, प्रीत पोरवाल तथा महिलाओं में—महिला परिषद प्रदेश कार्यकारिणी पूर्णिमा पोरवाल, ललिता चत्तर, नम्रता कटारिया, किरण पोरवाल, अर्पिता गोलछा आदि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
नवमी पुण्य स्मृति थांदला जैन आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा, साधना और समर्पण का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।तपस्वियों का बहुमान, नवकार मंत्र जाप और अनुकम्पा दान जैसे कार्य समाज को एक सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।यह आयोजन न केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक रहा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बना।



