राष्ट्रसंत आचार्य भगवंत जयन्तसेन सुरिश्वरजी महाराजा साहेब का 90वां अवतरण दिवस: मुंबई के भारत नगर जैन संघ में भव्य उत्सव, संतों व भक्तों ने किया गुणगान
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माया नगरी मुंबई के भारत नगर जैन संघ में राष्ट्रसंत, लोकसंत, पुण्य सम्राट और करोड़ों भक्तों के आराध्य आचार्य भगवंत जयन्तसेन सुरिश्वरजी महाराजा साहेब का 90वां अवतरण दिवस बड़े ही आध्यात्मिक, भव्य और अद्भुत तरीके से मनाया गया। देशभर से आए संतों, महात्माओं और सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के अथाह तप, त्याग, ज्ञान और उपकारों का गुणगान करते हुए यह पर्व श्रद्धा व भक्ति से मनाया।
गुरुदेव की आज्ञानुवर्ती मुनिराजों की निश्रा में हुआ भव्य समारोह
इस विशेष अवसर पर परम पूज्य मुनिराज श्री सिद्धरत्न विजयजी म.सा., मुनिराज श्री प्रशमसेन विजयजी म.सा., मुनिराज श्री अर्हमसेन विजयजी म.सा. सहित ठाणा के अनेक मुनिराजों की शुभ निश्रा में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
गुरुदेव के दिव्य व्यक्तित्व और विशाल जीवन कार्यों को याद करते हुए सभी संतों ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि और गुणानुवाद प्रस्तुत किया।
गुरुदेव का 1 लाख 60 हजार किलोमीटर का अलौकिक विहार—एक जन्म में कई जन्मों का कार्य: मुनि सिद्धरत्न विजयजी म.सा
परम पूज्य मुनिराज श्री सिद्धरत्न विजय जी म.सा ने अपने वक्तव्य में बताया:
“गुरुदेव ने अपने जीवन में लगभग 1,60,000 किलोमीटर का विशाल विहार किया। सम्पूर्ण भारत में जिनशासन के प्रचार-प्रसार और धर्म की सेवा में जो अद्भुत कार्य उन्होंने एक ही जन्म में कर दिखाया, वह कई जन्मों के तप, त्याग और पुरुषार्थ के बराबर है। हम सभी ऐसे महापुरुष को बार-बार वंदन करते हैं।”
यह बात जैन समुदाय की उस आध्यात्मिक यात्रा को दर्शाती है, जिसे गुरुदेव ने अपनी आज्ञानुवर्ती साधु-समाज के साथ निरंतर आगे बढ़ाया।
सभी पंथों और सम्प्रदायों को जोड़ने वाले संत—गुरुदेव के गुणों की प्रशंसा
परम पूज्य मुनिराज श्री प्रशमसेन विजयजी म.सा ने कहा:
“गुरुदेव का सभी सम्प्रदायों, पंथों और जैन समाज के सभी वर्गों में ऐसा मेल-मिलाप था कि उसका अनुमान लगाना भी कठिन है। वे वास्तव में एकता, शांति और संयम के आदर्श स्तंभ थे। गुरुदेव के गुणों का वर्णन करने के लिए हमारे पास शब्द ही कम पड़ जाते हैं।”
उनके इस वक्तव्य ने गुरुदेव के विशाल हृदय, मधुर व्यवहार और समाज में सद्भाव का संदेश देने वाले व्यक्तित्व को पुनः जीवंत कर दिया।
सुप्रसिद्ध सिंगर रेखा जैन नेनावा ने मधुर भजनों से बांधी भक्ति की लहर
पुण्य सम्राट के 90वें अवतरण दिवस पर नेनावा की सुप्रसिद्ध भक्ति गायिका रेखा जैन ने अपनी मधुर, भावपूर्ण आवाज में गुरुदेव के मंगल गुणों का गायन किया।
उनके भजनों ने पूरे पंडाल को भक्ति और भावनाओं से सराबोर कर दिया।
सैकड़ों श्रद्धालु संगीत, भक्ति और आध्यात्मिकता के इस संगम में झूमते दिखाई दिए।
माल्यार्पण, आरती और दिव्य पूजा का भव्य आयोजन
गुरुदेव की तस्वीर पर माल्यार्पण, पुष्पांजलि और परंपरागत आरती कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
समारोह में शामिल ट्रस्टीगण ने बताया कि:
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दोपहर में विशेष पूजन
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रात्रि में 90 दीपकों के साथ भक्ति संध्या
का आयोजन किया जाएगा।
90 दीपकों की यह संध्या गुरुदेव के 90 दिव्य वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक होगी।
गुरूभक्तों का सम्मान—के विक्रम सुराणा व राकेश जैन का सत्कार
भारत नगर जैन संघ द्वारा रतलाम से पधारे गुरूभक्त राकेश जैन और
मीडिया से के विक्रम सुराणा का तिलक, माल्यार्पण एवं नारियल से विशेष सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी गुरुभक्तों ने यह सम्मान देखकर हर्ष व्यक्त किया।
समारोह में उपस्थित संत, ट्रस्टीगण व श्रद्धालु
इस भव्य आयोजन में भारत नगर जैन संघ के ट्रस्टीगण और जैन समुदाय के अनेक प्रतिष्ठित सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें शामिल हैं:
- सुप्रसिद्ध सिंगर रेखा जैन नेनावा
- हिरालालजी भीनमाल
- लक्ष्मणराजजी मुथा सुराणा
- राणमलजी
- बाबुलालजी बागोड़ा
- नेमिचंद जी
- R.M. भंसाली
- मनोहरमलजी बागोड़ा
- मुलचंदजी कावेडी
- कुंदनमलजी दादाल
- दिनेश जी मोरसीम
- गौतम जी कांकरिया
- कांतिलाल जी भंसाली
- उत्तमचंदजी
- विनोद कुमार सुराणा
- निलेश भाई
- के विक्रम सुराणा
- राकेश जी रतलाम
- सुरेन्द्र भाई संघवी
- तथा सकल जैन संघ के अनेक सदस्य।
इन सभी ने एक स्वर में कहा कि गुरुदेव का 90वां अवतरण दिवस जैन समाज के लिए आस्था, प्रेरणा और आध्यात्मिक उत्थान का उत्सव है।
गुरुदेव जयन्तसेन सुरिश्वरजी महाराजा—संयम, तप और धर्मसेवा का महान स्तंभ
इस समारोह ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि आचार्य भगवंत जयन्तसेन सुरिश्वरजी महाराजा साहेब का जीवन केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए आदर्श है।
उनके:
- संयम,
- अहिंसा के प्रति निष्ठा,
- लाखों किलोमीटर के विहार,
- जिनशासन के प्रचार-प्रसार,
- पंथ-समन्वय,
- और समाज उत्थान
का महत्व आज भी उतना ही प्रेरणादायी है जितना उनके साधना काल में था।
निष्कर्ष
भारत नगर जैन संघ में गुरुदेव के 90वें अवतरण दिवस का यह भव्य आयोजन
भक्ति, श्रद्धा, एकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम रहा।
संतों के आशीर्वचन, भक्ति संगीत, माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन और हजारों भक्तों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया।





