नई दिल्ली। 19 अक्टूबर 2025 – भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के 125वें स्थापना वर्ष (2026-27) के उपलक्षण में दो दिवसीय राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन का आयोजन राजधानी दिल्ली में होने जा रहा है। इस महवपूर्ण सम्मेलन का आयोजन 25 एवं 26 अक्टूबर, 2025 को दिल्ली के बाहुबली एन्क्लेव (रजि.) में किया जाएगा। इस सम्मेलन में पवित्र आचार्य आचार्य प्रज्ञसागरजी मुनिराज के सान्निध्य में जैन धर्म व तीर्थ सुरक्षा से जुड़े गंभीर पहलुओं पर विचार-विमर्श होगा। इस अवसर पर देशभर से 50 से अधिक विद्वान इसके प्रतिभागी होंगे।
जैन संस्कृति एवं तीर्थ सुरक्षा: मीडिया-मंच पर एक नई दिशा
आचार्य प्रज्ञसागरजी ने इस आयोजन के संबंध में अपने वक्तव्य में कहा कि आज के समय में जैन धर्म व उसकी संस्कृति को अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाना तथा जैन तीर्थों की सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज की पहली प्राथमिकता बन चुकी है। भारतीय पत्रकारिता के माध्यम से जैन परंपराओं, तीर्थों व धर्म-संस्कृति की सच्ची जानकारी को जन-जन तक पहुँचाना आवश्यक है।
इस पत्रकार सम्मेलन के दौरान पत्रकारों को दिल्ली के प्राचीन जिनालयों का दर्शन कराया जाएगा तथा चार महत्वपूर्ण विषयों पर मौलिक लेख प्रस्तुत किए जाएंगे। यह आयोजन सिर्फ संवाद का मंच नहीं रहेगा, बल्कि जैन संस्कृति, तीर्थ सुरक्षा और मीडिया की भूमिका को ठोस रूप देने की दिशा में एक सार्थक अभियान बनेगा।
सम्मेलन के मुख्य विषय
इस दो दिवसीय आयोजन में निम्न चार विषयों पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाएगा:
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जैन जनसंख्या में गिरावट तथा उसकी वृद्धि के उपाय: कैसे जैन समुदाय का人口 आज चुनौतियों का सामना कर रहा है और उसकी संख्या में वृद्धि के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जैन धर्म के अनुयायियों की संख्या कैसे बढ़े: वैश्विक परिप्रेक्ष्य में जैन धर्म को कैसे अधिक-से-अधिक लोगों तक पहुँचाया जा सके।
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तीर्थों के लिए फंडिंग व स्व-जागरूकता योजनाएँ: जैन तीर्थों की सुरक्षा और संवर्धन के लिए फंडिंग मॉडल व जागरूकता अभियानों पर चर्चा।
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124 वर्षों की उपलब्धियाँ व 125वें स्थापना वर्ष के लिए योजनाएँ व पत्रकारों की भूमिका: इस संगठन ने अबतक क्या-क्या हासिल किया है तथा आगामी वर्ष के लिए क्या-क्या योजनाएँ हैं। साथ ही पत्रकारों से ये अपेक्षा कि वे कैसे सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
पत्रकारों के लिए सहभागिता और सम्मान-प्राप्ति
अखिल भारतीय जैन पत्र सम्पादक संघ के अध्यक्ष जगदीश जी जैन (आगरा) और महामंत्री अखिल बंसल ने जानकारी दी कि इस सम्मेलन में देश के विभिन्न भागों से 50 से अधिक विद्वान शामिल होंगे। सम्मेलन में श्रेष्ठ आलेखों का चयन किया जाएगा, जिन्हें आगामी ‘तीर्थवंदना’ पत्रिका में प्रकाशित किया जाएगा। इसके साथ-साथ लेख प्रस्तुत करने वाले पत्रकारों का सम्मान भी किया जाएगा। लेख प्रस्तुत करने के लिए प्रत्येक पत्रकार को ए4 आकार के दो पृष्ठों पर मौलिक, हस्तलिखित या टंकित आलेख सौंपने होंगे — कहीं से कट-पेस्ट या एआई आधारित कोई लेख स्वीकार्य नहीं होगा।
संगठन व समाज का प्रतिबद्ध योगदान
इस आयोजन के आयोजक श्री दिगंबर जैन सभा (रजि.) व बाहुबली एन्क्लेव के अध्यक्ष नवीन जैन ने साझा किया कि जैन समाज इस तरह की जागरूकता-उन्मुख पहल के लिए सदैव तत्पर रहता है। संगठन का लक्ष्य है कि जैन धर्म, संस्कृति और तीर्थों की सुरक्षा-संरक्षण की दिशा में मीडिया को एक सक्रिय सहयोगी बनाए।
प्रचार मंत्री जयेंद्र जैन ‘निप्पू चन्देरी’ ने बताया कि यह सम्मेलन धर्म-समाज-मीडिया तीनों के बीच एक समन्वय स्थापित करने की एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मीडिया युग में जैन संस्कृति की प्रामाणिक जानकारी तथा इसके मूल्यों का प्रसार अनिवार्य है, ताकि आने-वाली पीढ़ियाँ अपने गौरवशाली इतिहास व परंपराओं से जुड़ी रह सकें।
क्यों है यह आयोजन महत्वपूर्ण?
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मीडिया और धर्म-संस्कृति का संयोजन: पत्रकार सम्मेलन जैन धर्म व संस्कृति को जन-मानस तक पहुँचाने में मीडिया को सक्षम मंच प्रदान करेगा।
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तीर्थ सुरक्षा एवं संवर्धन की दिशा: जैन तीर्थों का संरक्षण आज अधिक-से-अधिक चिन्तित विषय बन गया है; फंडिंग, जन-जागरूकता व योजनाओं की दिशा से इसका समाधान संभव होगा।
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आगामी 125वें स्थापना वर्ष का आरंभ: यह आयोजन संगठन के 124वाँ वर्ष पूरे होने एवं 125वें स्थापना वर्ष की तैयारियों का अग्रदूत है।
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लेखन-प्रतियोगिता के माध्यम से संवाद: पत्रकारों द्वारा लेख प्रस्तुत करना व श्रेष्ठ लेखों का चयन जैन धर्म-विस्तार के लिए सकारात्मक कदम है।
आगामी आयोजन की जानकारी
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तारीख: 25 एवं 26 अक्टूबर 2025
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स्थान: बाहुबली एन्क्लेव (रजि.), दिल्ली
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संपर्क:
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जगदीश जैन (आगरा) – 7668255981
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अखिल बंसल – 992655786
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चैनल महालक्ष्मी – 9910690825
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इस तरह, यह राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन न सिर्फ जैन संस्कृति और तीर्थों की सुरक्षा-संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर बनेगा, बल्कि मीडिया के ज़रिए जैन धर्म को एक नए आयाम पर ले जाने का प्रयास भी करेगा। आने वाले वर्षों में जैन समुदाय और उसकी विरासत को संजोने-संवर्धन करने के लिए यह आयोजन एक प्रेरक प्रारंभ होगा।
