तीन जैनाचार्यों के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद का राष्ट्रीय अधिवेशन
जैन ज्योतिष को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने का लिया संकल्प, देश-विदेश से पहुंचे ज्योतिषाचार्यों ने वास्तुशास्त्र, कुंडली मिलान, हस्तरेखा और जैन मंत्रों पर किया मंथन
रिपोर्टर: मनोज जैन नायक
मुरैना जैन आगम की अनुपम कृति जैन ज्योतिष को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से संकल्पित अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद (पंजी.) का दो दिवसीय नवम राष्ट्रीय अधिवेशन भव्यता और आध्यात्मिक गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। अधिवेशन की विशेषता यह रही कि इसमें तीन जैनाचार्यों का पावन सान्निध्य एवं मंगल आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे ज्योतिषाचार्यों एवं विद्वानों ने जैन ज्योतिष के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया। अधिवेशन के दौरान जैन ज्योतिष की प्रामाणिकता, उपयोगिता, वास्तुशास्त्र, कुंडली मिलान, हस्तरेखा और जैन मंत्रों के उपयोग सहित विभिन्न विषयों पर विद्वानों ने अपने विचार रखे।
आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के सान्निध्य में हुआ शुभारंभ
राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ ऋषभ विहार में विराजित चर्या शिरोमणि पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में हुआ।
इस अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे ज्योतिषाचार्यों ने ज्योतिष के संबंध में समाज में व्याप्त विभिन्न भ्रांतियों के निराकरण पर अपने विचार व्यक्त किए। साथ ही जैन ज्योतिष के सिद्धांतों, प्रामाणिकता और उपयोगिता पर चर्चा की गई।
आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने अपने मंगल आशीर्वचन में कहा कि जैन ज्योतिष अनादिकाल से विद्यमान है। इसके सिद्धांतों को समझकर और उन्हें जीवन में अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन का कल्याण कर सकता है।
इस अवसर पर मंदिर कार्यकारिणी की ओर से देशभर से आए विद्वानों का तिलक एवं माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। उन्हें साहित्य भेंट कर सम्मानित भी किया गया।
धारूहेड़ा में आचार्य श्री समाधि सागर जी का मिला सान्निध्य
अधिवेशन के अगले क्रम में परिषद के सदस्य अतिशय क्षेत्र कल्पतरु सर्वोदय तीर्थ स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, धारूहेड़ा पहुंचे। यहां विराजित आचार्य श्री समाधि सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में अधिवेशन का आयोजन किया गया।
आचार्य श्री समाधि सागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि ज्योतिष के माध्यम से आने वाले समय के संकेतों को समझकर व्यक्ति जीवन में आने वाली कठिनाइयों के प्रति सजग रह सकता है।
क्षेत्र के ट्रस्टी प्रद्युम्न जैन ने उपस्थित विद्वानों को क्षेत्र के अतिशयों एवं धार्मिक महत्व की जानकारी दी। इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वानों को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। श्रद्धालुओं एवं परिषद सदस्यों ने श्रीजी की सामूहिक आरती में भी सहभागिता की।
तिजारा में आचार्य श्री विमर्श सागर जी के सान्निध्य में हुआ मंथन

इसके बाद परिषद के सदस्य प्रसिद्ध अतिशय क्षेत्र देहरा तिजारा जी पहुंचे। यहां आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतर्गत विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।
देशभर से आए ज्योतिष विशेषज्ञों ने वास्तुशास्त्र, कुंडली मिलान, हस्तरेखा एवं जैन मंत्रों के उपयोग सहित जैन ज्योतिष से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज ने जैन ज्योतिष पर अपने विचार रखते हुए मिथ्यात्व से दूर रहने तथा जैन आगम में बताए गए सिद्धांतों एवं उपायों को अपनाने पर बल दिया।
इस अवसर पर आचार्यश्री की कृतियां एवं साहित्य भी विद्वानों को भेंट किए गए। वापसी के दौरान परिषद के सदस्यों एवं विद्वानों ने सिद्धांत क्षेत्र शिकोहपुर के दर्शन का लाभ भी लिया।
जैन ज्योतिष को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने का संकल्प
अधिवेशन का प्रमुख उद्देश्य जैन आगम आधारित ज्योतिष के सिद्धांतों का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए इसे विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित करना रहा। परिषद से जुड़े ज्योतिषाचार्यों ने इस दिशा में सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।
अधिवेशन में इस बात पर भी मंथन किया गया कि जैन ज्योतिष से जुड़े सिद्धांतों और प्रामाणिक साहित्य को अधिक से अधिक लोगों तक किस प्रकार पहुंचाया जाए।
नेपाल से दुबई और बैंकॉक तक किया प्रचार-प्रसार
अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद के संस्थापक एवं अध्यक्ष जैन ज्योतिषाचार्य रवि जैन ‘गुरुजी’, दिल्ली ने बताया कि परिषद द्वारा जैन ज्योतिष को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि भारत के विभिन्न प्रांतों के साथ नेपाल, अबूधाबी, दुबई और बैंकॉक (थाईलैंड) सहित विदेशों में भी जैन ज्योतिष का प्रचार-प्रसार किया जा चुका है। भविष्य में विश्व के अन्य देशों में भी जैन ज्योतिष के प्रचार-प्रसार और विस्तार की योजना है।
ज्योतिषाचार्यों और विद्वानों का किया सम्मान
दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान विभिन्न आयोजन स्थलों की कार्यकारिणियों को परिषद की ओर से अभिनंदन पत्र भेंट किए गए।
इसके साथ ही अधिवेशन में शामिल ज्योतिषाचार्यों एवं विद्वानों का तिलक, माल्यार्पण, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मान किया गया। अलग-अलग राज्यों और देशों से आए विद्वानों की सहभागिता ने अधिवेशन को व्यापक स्वरूप प्रदान किया।
देश-विदेश के विद्वानों ने की सहभागिता
राष्ट्रीय अधिवेशन में डॉ. प्रो. टीकम चंद जैन, हुकुमचंद जैन ग्वालियर, विमल कुमार जैन जबलपुर, सुशील कुमार जैन बुराड़ी, डॉ. सुमेर चंद जैन दिल्ली, कविता जैन गुरुग्राम, पं. महावीर प्रसाद जैन दिल्ली, पं. सुयश जैन इंदिरापुरम और पं. नितिन जैन इंदौर सहित अनेक विद्वान शामिल हुए।
इसके अलावा विकास जैन ग्वालियर, एडवोकेट शिल्पा जैन जयपुर, डॉ. नेहा जैन जयपुर, जयदीप जैन भोपाल, जिनेंद्र सिंघई छतरपुर और उर्मिल जैन कनाडा सहित देश-विदेश से आए अनेक ज्योतिषाचार्यों एवं विद्वानों ने अधिवेशन में सहभागिता की।
तीन जैनाचार्यों के सान्निध्य में सम्पन्न दो दिवसीय नवम राष्ट्रीय अधिवेशन के माध्यम से जैन ज्योतिष के विभिन्न पहलुओं पर विचार-मंथन के साथ इसके देश-विदेश में प्रचार-प्रसार और विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में कार्य करने का संकल्प लिया गया।
