—Advertisement—

“नरसिंहपुर के शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार, राजनांदगांव नक्सली मुठभेड़ में दिया सर्वोच्च बलिदान”

Author Picture
Published On: 20 November 2025
Khand 4

—Advertisement—

Narsinghpur Shaheed Ashish Sharma News: शहीद निरीक्षक आशीष शर्मा का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, नक्सली मुठभेड़ में हुआ था सर्वोच्च बलिदान

नरसिंहपुर/बालाघाट। मध्य प्रदेश के वीर सपूत और हॉक फोर्स के बहादुर निरीक्षक आशीष शर्मा को गुरुवार को उनके पैतृक गांव बोहानी (नरसिंहपुर) में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में हुए संयुक्त नक्सली सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों की अचानक फायरिंग में घायल होने के बाद उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली थी।
पूरे मध्य प्रदेश में Shaheed Ashish Sharma के इस बलिदान को लेकर गहरा शोक और गर्व का माहौल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी उनके बलिदान को नमन करते हुए परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएँ व्यक्त की थीं।

नक्सलियों ने अचानक की गोलीबारी, निरीक्षक आशीष शर्मा हुए गंभीर रूप से घायल

मंगलवार देर शाम छत्तीसगढ़–मध्य प्रदेश–महाराष्ट्र की त्रि-सीमा पर सुरक्षाबलों द्वारा United Anti-Naxal Operation चलाया जा रहा था। इसी दौरान हॉक फोर्स, कोबरा, सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम जंगल में गश्त कर रही थी।
अचानक घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने तीन से चार राउंड फायरिंग शुरू कर दी। इस गोलीबारी में हॉक फोर्स के निरीक्षक आशीष शर्मा को जांघ और कंधे में गोली लगी।
गंभीर हालत में साथी जवानों ने उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचाया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव और गहरी चोटों की वजह से डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
उनकी शहादत की खबर मिलते ही पूरा मध्य प्रदेश शोक में डूब गया।

दो बार वीरता पदक प्राप्त—हमेशा सबसे आगे रहने वाले अधिकारी

Shaheed Inspector Ashish Sharma न सिर्फ एक जाबांज अधिकारी थे, बल्कि नक्सल ऑपरेशनों के विशेषज्ञ भी माने जाते थे।
वे दो बार वीरता पदक प्राप्त कर चुके थे और कई अहम ऑपरेशनों का नेतृत्व कर चुके थे।
बुधवार को भी वे संयुक्त सर्च अभियान में ऑपरेशन लीडर की भूमिका संभाल रहे थे, जब उन्होंने माओवादियों से भिड़ते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।

atamrofc ashish sharma

बालाघाट पहुँचा पार्थिव शरीर, पूरे शहर ने दी भावुक विदाई

गुरुवार सुबह शहीद आशीष शर्मा का पार्थिव शरीर बालाघाट लाया गया।
जहाँ के आंबेडकर चौक से पुलिस लाइन तक एक भावनात्मक और भव्य श्रद्धांजलि यात्रा निकाली गई।
फूलों से सजे वाहन में रखे उनके पार्थिव शरीर के साथ

  • हॉक फोर्स
  • सीआरपीएफ
  • कोबरा कमांडो
  • जिला पुलिस बल
    के बड़ी संख्या में जवान शामिल हुए।

रास्ते भर लोगों ने नम आँखों से “शहीद आशीष शर्मा अमर रहें” के नारे लगाकर उन्हें अंतिम सलाम किया।
यह दृश्य हर किसी को भावुक कर देने वाला था—साथियों की आँखें नम थीं और कई जवान अपने वीर साथी को याद करते हुए रो पड़े।

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि

पुलिस लाइन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में

  • कलेक्टर मृणाल मीना,
  • पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा,
  • प्रशासनिक अधिकारी,
  • जनप्रतिनिधि
    और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

एसपी आदित्य मिश्रा स्वयं बेहद भावुक हो उठे। जवान आपस में एक-दूसरे को संभालते नजर आए।
हर किसी के मन में यही बात थी कि “आशीष जैसे बहादुर अधिकारियों की वजह से ही हम सुरक्षित हैं।

सभी ने पार्थिव शरीर पर पुष्प चढ़ाकर उन्हें अंतिम सम्मान दिया।

पार्थिव शरीर पहुँचा पैतृक गांव बोहानी (नरसिंहपुर)

श्रद्धांजलि सभा के बाद शोक संवेदना से भरी लंबी यात्रा के साथ शहीद का पार्थिव शरीर बालाघाट से उनके पैतृक गांव बोहानी, जिला नरसिंहपुर के लिए रवाना किया गया।
गाँव की गलियों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई अपने वीर बेटे को एक नजर देखने के लिए व्याकुल था।

गाँव में पहुँचते ही पूरा माहौल “भारत माता की जय”, “शहीद आशीष शर्मा अमर रहें” के नारों से गूँज उठा।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, मुख्यमंत्री की उपस्थिति संभव

शहीद आशीष शर्मा के अंतिम संस्कार को राजकीय सम्मान दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, सीएम डॉ. मोहन यादव स्वयं भी अंतिम विदाई में शामिल होने वाले थे।
राजकीय सम्मान में

  • गार्ड ऑफ ऑनर,

  • सलामी,

  • पुष्पांजलि
    और सैन्य परंपराओं का पूरा पालन किया गया।

परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा था, लेकिन बेटे के शौर्य और बलिदान पर उनके चेहरे पर गर्व भी साफ दिखाई दे रहा था।
उनकी पत्नी, माता-पिता, भाई और बच्चे—सभी ने नम आँखों से अपने वीर को अंतिम बार विदा किया।

नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी क्षति—प्रदेश और देश ने खोया एक बहादुर योद्धा

आशीष शर्मा की शहादत न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि देश की नक्सल विरोधी रणनीति के लिए एक बड़ी क्षति मानी जा रही है।
वे हमेशा हर कठिन ऑपरेशन में सबसे आगे रहते थे।

उनके साथियों का कहना है—
आशीष साहब डरना जानते ही नहीं थे। उनकी एक आवाज से जवानों में नई ऊर्जा आ जाती थी।

उनके नेतृत्व में कई सफल ऑपरेशन हुए, जिनकी वजह से नक्सलियों की गतिविधियों को कई बार बड़ा नुकसान पहुँचाया गया।

पूरा मध्य प्रदेश गर्वित—वीरता की यह कहानी हमेशा अमर रहेगी

शहीद आशीष शर्मा की वीरता की कहानी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
उनका यह सर्वोच्च बलिदान देश की सुरक्षा व्यवस्था में अमिट योगदान है।

प्रदेशवासियों के दिलों में आज केवल एक ही भावना है—
ऐसे वीर सपूत को सलाम—जो देश की रक्षा करते हुए हँसते-हँसते शहीद हो गया।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp