णमोकार तीर्थ महामहोत्सव में अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक, महामस्तकाभिषेक और सैकड़ों साधु-संतों का सान्निध्य। जानिए इस अद्भुत आयोजन की पूरी कथा, स्थान, संतों के नाम और विशेषताएं।
णमोकार तीर्थ महामहोत्सव: शांति, अहिंसा और आध्यात्मिक चेतना का महापर्व
णमोकार तीर्थ महामहोत्सव एक ऐसा आध्यात्मिक उत्सव है, जो केवल जैन समाज ही नहीं बल्कि पूरी मानवता को करुणा, शांति और आत्मिक उत्थान का संदेश देता है। यह आयोजन महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित पावन णमोकार तीर्थ की दिव्य भूमि पर होने जा रहा है, जो ऐतिहासिक सिद्ध क्षेत्रों और पर्वतीय श्रृंखलाओं के मध्य स्थित है।
यह वही भूमि है जिसे पौराणिक मान्यता अनुसार रामटेकड़ी भी कहा जाता है, जहाँ प्रभु श्रीराम के चरण पड़े थे। आज वही भूमि णमोकार तीर्थ महामहोत्सव के माध्यम से फिर से विश्व पटल पर आध्यात्मिक प्रकाश फैला रही है।
णमोकार तीर्थ का परिचय
णमोकार तीर्थ केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का जीवंत केंद्र है। यहाँ विश्व का एकमात्र “बोलता हुआ णमोकार मंत्र” आधारित समवशरण बना है।
5.5 एकड़ में फैला यह समवशरण, 108 फीट ऊँचा सफेद संगमरमर से निर्मित है, जिसमें 32 फीट ऊँची चंद्रप्रभु भगवान की भव्य प्रतिमा स्थापित है।
णमोकार तीर्थ महामहोत्सव का उद्देश्य
णमोकार तीर्थ महामहोत्सव का मूल उद्देश्य है—
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विश्व में शांति का प्रसार
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अहिंसा का प्रचार
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आत्मशुद्धि की प्रेरणा
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नैतिक और आध्यात्मिक जीवन की स्थापना
यह आयोजन यह सिखाता है कि सच्चा धर्म वही है, जो जीवन को करुणा से भर दे।
तीर्थ की अद्भुत रचनाएं
🔹 प्रमुख आकर्षण
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24 जिनालय
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त्रिकाल चौबीसी
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नवदेवता
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नंदीश्वर द्वीप
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पंचमेरु
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24 स्वरूपों वाली पद्मावती माता की प्रतिमाएं
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51 फीट अरिहंत और 31 फीट पंचपरमेष्ठी प्रतिमाएं
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नौका विहार और मिनी ट्रेन दर्शन सुविधा
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डिजिटल प्रभावना केंद्र
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गुरुमंदिर, ग्रंथालय, संत भवन, धर्मशालाएं
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111 फीट ऊँचा ध्वजदंड
यह सब मिलकर णमोकार तीर्थ महामहोत्सव को एक अद्वितीय आध्यात्मिक केंद्र बनाते हैं।
प्रमुख संतों का सान्निध्य
णमोकार तीर्थ महामहोत्सव में सैकड़ों संतों का पावन सान्निध्य प्राप्त होगा, जिनमें प्रमुख हैं—
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गणाचार्य 108 श्री कुन्थुसागर जी महाराज
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सारस्वताचार्य 108 श्री देवनंदी जी महाराज
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मुनि अमोघकीर्ति जी
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मुनि अमरकीर्ति जी
साथ ही—
आचार्य श्री पद्मनंदी जी महाराज,
आचार्य श्री सिद्धांतसागर जी महाराज,
आचार्य श्री सुविधिसागर जी महाराज,
आचार्य श्री गुणधरनंदी जी महाराज,
आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी महाराज,
आचार्य श्री पुष्पदंतसागर जी महाराज,
आचार्य श्री विनम्रसागर जी महाराज,
आचार्य श्री तीर्थनंदी जी महाराज,
आचार्य श्री गुलाबभूषण जी महाराज,
आचार्य श्री श्रुतधरनंदी जी महाराज,
आचार्य श्री गुणभद्रनंदी जी महाराज,
आचार्य श्री सूर्यसागर जी महाराज,
आचार्य श्री प्रसन्नऋषि जी महाराज,
आचार्य श्री डॉ प्रणाम सागर जी,
आचार्य श्री सुयशगुप्ती जी महाराज,
आचार्य श्री दयाऋषी जी महाराज,
आचार्य श्री विद्यानंदी जी महाराज,
उपाध्याय श्री विरंजनसागर जी,
उपाध्याय श्री विंभजनसागर जी,
मुनि श्री पावनकीर्ति जी,
मुनि श्री जयकीर्ति जी,
मुनि श्री सकलकीर्ति जी,
मुनि श्री शुभमकीर्ति जी,
मुनि श्री आर्शकीर्ति जी,
मुनि श्री सिद्धकीर्ति जी,
मुनि श्री शांतिकीर्ति जी,
मुनि श्री अध्यात्मकीर्ति जी,
मुनि श्री महिमासागर जी,
मुनि श्री अर्चितसागर जी,
क्षुल्लक श्री समर्पण सागर जी,
क्षुल्लक श्री ध्यानसागर जी,
आर्यिका श्री कांतीश्री माताजी,
आर्यिका श्री प्रज्ञाश्री माताजी,
आर्यिका श्री सौभाग्यमती माताजी,
आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी,
आर्यिका सुयोगमति माताजी,
आर्यिका विमल प्रभा माताजी,
आर्यिका जिनदेवी माताजी,
आर्यिका क्षमाश्री माताजी,
आर्यिका चिन्मयश्री माताजी,
आर्यिका विशाखाश्री माताजी,
आर्यिका स्वस्तिश्री माताजी,
सुज्ञान श्री माताजी
इन सभी का सान्निध्य णमोकार तीर्थ महामहोत्सव को ऐतिहासिक बना देगा।
पंचकल्याणक और महामस्तकाभिषेक
इस महोत्सव में तीर्थंकर भगवान के—
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जन्म
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दीक्षा
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तप
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केवलज्ञान
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निर्वाण
जैसे पंचकल्याणक प्रसंग विधिपूर्वक सम्पन्न होंगे।
साथ ही भव्य महामस्तकाभिषेक भी होगा।
अतिशय युक्त स्थल की दिव्यता
यह स्थल अतिशय युक्त है। यहाँ नाग-नागिन जोड़ी ने ऋषि पंचमी के दिन गुरुदेव के समीप आकर लगभग 35 मिनट तक णमोकार मंत्र सुना और आशीर्वाद लिया—जिसे सैकड़ों लोगों ने प्रत्यक्ष देखा।
संगठन और संयोजक मंडल
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ट्रस्ट अध्यक्ष: श्री निलम जी अजमेरा
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प्रतिष्ठा महोत्सव संयोजक: श्री निलम जी अजमेरा
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अध्यक्षता: श्री संतोष पैंढारी, नागपुर
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महामंत्री: श्री कमल ठोलियां
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कोषाध्यक्ष: श्री दिनेश सेठी
सभी गुरुभक्तों के सहयोग से णमोकार तीर्थ महामहोत्सव साकार हो रहा है।
मार्ग और सुविधा
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रेल: नासिक रोड – 45 किमी, मनमाड – 35 किमी
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हवाई: ओझर एयरपोर्ट – 60 किमी
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समीप: शिरडी, त्र्यंबकेश्वर
सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश
णमोकार तीर्थ महामहोत्सव सिखाता है—
“जुड़ना बड़ी बात नहीं, जुड़े रहना बड़ी बात है।”
यह आयोजन हमें करुणा, संयम, और आत्मशुद्धि की ओर ले जाता है।
भूमिपुत्र पवनघुवारा
[संयोजक जुलूस समिति, णमोकार तीर्थ]
