गोपाल गौशाला परिसर में नवनिर्मित शीतला माता मंदिर में हुई प्राण प्रतिष्ठा
यज्ञ, हवन और महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया भाग
Nagda । पाडल्या रोड स्थित गोपाल गौशाला परिसर में गुरुवार को नवनिर्मित शीतला माता, गुना बाबजी एवं अन्य देवी-देवताओं के मंदिर में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा विधिपूर्वक संपन्न हुई। इस अवसर पर आयोजित हवन, पूजन और यज्ञ समारोह में स्थानीय श्रद्धालु, महिलाएं और पुरुष बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में धार्मिक भक्ति और सांस्कृतिक आयोजनों का सुंदर संयोजन देखा गया।
गोपाल गौशाला ट्रस्ट और दशहरा उपलक्ष्य समिति द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस समारोह में भक्तों ने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की और मंदिर की स्थापना के महत्व को समझा। इस मंदिर का निर्माण न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त करता है बल्कि समाज में सामूहिक श्रद्धा और सांस्कृतिक एकजुटता को भी बढ़ावा देता है।
विधि-विधान से संपन्न हुआ प्राण प्रतिष्ठा समारोह
प्रारंभ में मंदिर परिसर में सुबह से ही पूजा-अर्चना का माहौल बना हुआ था। पंडित कमलेश शर्मा सहित अन्य विद्वान पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ हवन, यज्ञ और पूजन की सभी धार्मिक विधियों का संचालन किया। यज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं ने हवन में आहुतियां देकर अपने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।
इस अवसर पर यजमानों के रूप में नाथुलाल बांगड़, वल्लभ मोहता, महेश कुमार सोनी और सुरेश कुमार सोनी अपनी पत्नियों के साथ उपस्थित रहे। उन्होंने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना में भाग लिया और यज्ञ की पूर्णाहुति तक लगातार धार्मिक अनुष्ठान का संचालन किया।
पंडितों ने प्रत्येक पूजा अनुष्ठान को विधिपूर्वक सम्पन्न किया। हवन में मंत्रोच्चार, अग्नि पूजन और यज्ञ सामग्री का सही तरीके से उपयोग किया गया। इस प्रकार यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने का भी एक अवसर साबित हुआ।
महाआरती और प्रसाद वितरण
यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात दोपहर में मंदिर परिसर में महाआरती का आयोजन किया गया। इसमें यजमान जोड़े और श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित थे। महाआरती के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।
आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण भी किया गया। सभी ने प्रसाद ग्रहण करते हुए आशीर्वाद और मंगलकामनाएं प्राप्त कीं। इस अवसर पर उपस्थित भक्तों की भागीदारी उल्लेखनीय रही। उन्होंने अपनी आस्था और श्रद्धा के साथ मंदिर की भव्य प्राण प्रतिष्ठा का आनंद लिया।
मंदिर निर्माण में सहयोग और आर्थिक पहल
गोपाल गौशाला परिसर में नवनिर्मित शीतला माता मंदिर का निर्माण गोपाल गौशाला ट्रस्ट को दशहरा उपलक्ष्य समिति द्वारा दी गई लगभग 3 लाख रुपये की सहयोग राशि से संभव हुआ।
मंदिर का निर्माण न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय नागरिकों के लिए एक नए सामुदायिक और सांस्कृतिक केंद्र की भूमिका भी निभाता है। इससे क्षेत्र में भक्तों को नियमित पूजा-अर्चना के लिए एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित स्थान मिल गया है।
मंदिर परिसर में पीपल, बरगद और नीम के तीन वृक्षों की एक साथ उपस्थिति इस स्थान को धार्मिक दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। स्थानीय लोग इसे त्रिवेणी के रूप में मानते हैं। यह स्थल अब न केवल पूजा-अर्चना का केंद्र है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का प्रतीक भी बन गया है।

त्रिवेणी और धार्मिक महत्व
तीनों वृक्ष—पीपल, बरगद और नीम—मंदिर के समीप एक साथ मौजूद हैं। इन वृक्षों की उपस्थिति के कारण मंदिर परिसर का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। यह स्थल न केवल पूजा-अर्चना के लिए बल्कि धार्मिक अनुष्ठानों, सत्संग और सामुदायिक गतिविधियों के लिए भी जाना जाता है।
स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, इस त्रिवेणी स्थल पर पूजा-अर्चना करने से आशीर्वाद और लाभ की प्राप्ति अधिक होती है। यह धार्मिक परंपरा सदियों से चली आ रही है और वर्तमान मंदिर निर्माण इसे और अधिक संरचित और आधिकारिक रूप देती है।
शिलालेख का लोकार्पण और स्वागत समारोह
समारोह के दौरान गोपाल गौशाला ट्रस्ट के अध्यक्ष और दशहरा उपलक्ष्य समिति के संरक्षक बालेश्वर दयाल जायसवाल ने मंदिर निर्माण से संबंधित शिलालेख का लोकार्पण किया। इस अवसर पर नागरिकों ने उनका स्वागत किया और सम्मानित किया।
श्रद्धालुओं ने श्री जायसवाल को साफा पहनाकर, पुष्पमालाएं पहनाकर सम्मानित किया। इस तरह न केवल मंदिर का आधिकारिक उद्घाटन हुआ, बल्कि स्थानीय लोगों ने धार्मिक आस्था और संस्कृति के प्रति अपनी भागीदारी भी व्यक्त की।
बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और पदाधिकारी रहे उपस्थित
इस धार्मिक आयोजन में गोपाल गौशाला ट्रस्ट और दशहरा उपलक्ष्य समिति के कई पदाधिकारी तथा स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। प्रमुख उपस्थितियों में शामिल थे:
- समरथमल सिसौदिया
- भैरूलाल टांक
- पुरणमल शर्मा
- दशहरा उपलक्ष्य समिति के अध्यक्ष बद्रीलाल पोरवाल
- महामंत्री जगदीश मेहता
- सचिव सुबोध स्वामी
- प्रशांत मेहता
- कोषाध्यक्ष लोकेन्द्र कामरिया
- संजय शर्मा
- चेनसिंह रघुवंशी
- लोकुमल खत्री
- कैलाश सनोलिया
- अमरचन्द्र जैन
- प्रहलाद रघुवंशी
- गुलजारीलाल त्रिवेदी
- ओम सेठिया
- प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक चौहान
- सीएल वर्मा
- प्रकाश मालपानी
- हेमलता तोमर
- पूर्व पार्षद अर्चना वर्मा
- राजकुमारी मालपानी
- मीना अग्रवाल
उपस्थित श्रद्धालुओं ने मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में अपनी आस्था और श्रद्धा का प्रदर्शन किया।

धार्मिक और सामाजिक महत्व
मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा से केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक लाभ भी जुड़ा है।
- यह स्थल स्थानीय समुदाय के लिए पूजा-अर्चना का स्थायी केंद्र बन गया है।
- श्रद्धालुओं को सामूहिक रूप से धार्मिक अनुष्ठान और हवन-पूजन में भाग लेने का अवसर मिला।
- यह मंदिर क्षेत्र में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने का भी कार्य करेगा।
स्थानीय लोग मानते हैं कि इस मंदिर और त्रिवेणी स्थल की उपस्थिति से न केवल धार्मिक गतिविधियों का विस्तार होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में यह सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों का भी केंद्र बन सकता है।
निष्कर्ष
गोपाल गौशाला परिसर में नवनिर्मित शीतला माता मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि समाज और संस्कृति के लिए भी लाभकारी रहा।
भक्तों ने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना, यज्ञ और महाआरती में भाग लेकर आस्था और भक्ति का प्रदर्शन किया। मंदिर निर्माण में सहयोग देने वाली दशहरा उपलक्ष्य समिति और गोपाल गौशाला ट्रस्ट ने मिलकर यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न करवाया।
मंदिर परिसर में त्रिवेणी स्थल और पीपल, बरगद, नीम वृक्षों की उपस्थिति इसे आध्यात्मिक दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। इस प्रकार यह स्थल स्थानीय समाज के लिए पूजा-अर्चना, सामुदायिक गतिविधियों और धार्मिक जागरूकता का स्थायी केंद्र बन गया है।
रिपोर्ट: जीवनलाल जैन, नागदा
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