नागदा में होगा भव्य ‘200 अवधान द्विशतावधान’, मुनिश्री की अद्भुत स्मरणशक्ति बनेगी प्रेरणा
नागदा (ब्रजेश बोहरा): धार्मिक और आध्यात्मिक इतिहास में एक नई मिसाल कायम करने जा रहा है नयनरम्य नागदा नगर। पूज्य गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरीश्वरजी महाराज की 200वीं जन्मशताब्दी के उपलक्ष्य में, नगर में ‘200 अवधान द्विशतावधान’ का भव्य आयोजन होने जा रहा है। यह ऐतिहासिक कार्यक्रम 23 अक्टूबर, गुरुवार को ज्योति श्री रिसोर्ट, नागदा में सुबह 9 बजे से शुरू होगा। इस विशेष अवसर पर जैन समाज और धर्मप्रिय श्रद्धालु मुनिश्री की विलक्षण स्मरणशक्ति और अद्भुत साधना का साक्षात्कार करेंगे।
इस आयोजन का मुख्य आकर्षण होंगे त्रिस्तुतिक श्रीसंघ के प्रथम शतावधानी, पुण्य सम्राट गुरुदेव श्री जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्यरत्न मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा.। मुनिश्री अपनी अद्भुत स्मरणशक्ति, अतिरेक एकाग्रता और आत्मबल का परिचय देते हुए इस समारोह में 200 अवधान प्रस्तुत करेंगे। मुनिश्री का यह प्रथम द्विशतावधान नागदा नगर में उनके स्वतंत्र चातुर्मास के दौरान पेश किया जाएगा, जो जैन समाज के लिए गर्व का विषय है।
पूर्व में मुनिश्री ने वर्ष 2015 में श्री पेपराल तीर्थ चातुर्मास और वर्ष 2016 में रतलाम चातुर्मास के दौरान शतावधान प्रस्तुत किया था। उस समय, मध्यप्रदेश शासन के मंत्री श्री चेतन्य काश्यप ने मुनिश्री को “त्रिस्तुतिक श्रीसंघ के प्रथम शतावधान” का अलंकरण प्रदान किया था। अब नागदा में उनका यह द्विशतावधान समारोह जैन समाज में नई प्रेरणा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करेगा।
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन श्री श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ एवं जयन्तराज चातुर्मास समिति, नागदा की आज्ञा एवं देखरेख में किया जा रहा है। इसके मुख्य लाभार्थी होंगे अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद् शाखा, नागदा। परिषद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा, प्रान्तीय मंत्री दिलीप ओरा और शाखा अध्यक्ष दिलीप गांधी ने समस्त श्री संघों और परिषद परिवार से आग्रह किया है कि वे इस ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक अवसर पर नागदा पधारकर धर्मलाभी बनें।
नागदा द्विशतावधान का आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह जैन समाज में धर्म, ज्ञान और स्मरणशक्ति का अद्भुत संगम है। मुनिश्री की अद्भुत स्मरणशक्ति और उनकी ध्यान साधना की विधि युवाओं और समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत बनेगी। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को न केवल धार्मिक अनुभव मिलेगा, बल्कि मुनिश्री के माध्यम से जैन दर्शन और आत्मविकास की भी गहरी समझ प्राप्त होगी।
कार्यक्रम में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को मुनिश्री के द्विशतावधान प्रदर्शन का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा। द्विशतावधान का अर्थ है कि मुनिश्री एक ही समय में दो अलग-अलग विषयों या विषयगत स्मरण कार्यों का प्रदर्शन कर सकते हैं, जो उनकी अद्भुत मानसिक शक्ति और ध्यान क्षमता को दर्शाता है। यह कार्यक्रम जैन धर्म और त्रिस्तुतिक श्रीसंघ के इतिहास में नया अध्याय जोड़ने वाला है।
इस भव्य आयोजन के माध्यम से नागदा का नाम धर्म और साधना के इतिहास में गूंजेगा। यह कार्यक्रम केवल मुनिश्री की स्मरणशक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि जैन समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने का माध्यम भी होगा। आयोजन समिति ने कहा है कि इस अवसर पर सभी वर्गों के लोग शामिल होकर अपनी आध्यात्मिक यात्रा को समृद्ध कर सकते हैं।
मुनिश्री के 200 अवधान से जुड़ा यह आयोजन जैन समाज में शिक्षा, आत्मविकास और ध्यान साधना की महत्ता को उजागर करेगा। युवा और बुजुर्ग, सभी श्रद्धालु इस कार्यक्रम के माध्यम से अपने जीवन में अनुशासन, एकाग्रता और आत्मबल की सीख ले सकते हैं। परिषद परिवार ने यह सुनिश्चित किया है कि आयोजन का प्रत्येक पहलू धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से समर्पित होगा।
इस भव्य समारोह में भाग लेकर नागदा नगर और आसपास के क्षेत्र के लोग मुनिश्री की अद्भुत स्मरणशक्ति और द्विशतावधान कौशल का साक्षात्कार करेंगे। जैन समाज कार्यक्रम के रूप में यह आयोजन केवल एक ऐतिहासिक क्षण नहीं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से प्रेरणादायक अनुभव भी साबित होगा।
अंततः, नागदा में आयोजित यह 200 अवधान द्विशतावधान कार्यक्रम जैन समाज और त्रिस्तुतिक श्रीसंघ के लिए गर्व का विषय है। यह मुनिश्री की विलक्षण स्मरणशक्ति और ध्यान साधना का अद्भुत उदाहरण पेश करेगा और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और बौद्धिक दृष्टि से समृद्ध करेगा। नागदा की जनता और समाज के लोग इस ऐतिहासिक अवसर का लाभ उठाकर धर्म, साधना और स्मरणशक्ति के अनमोल अनुभव को अपने जीवन में उतार सकते हैं।

