Nagda में मिनी ब्लड बैंक की स्थापना की मांग, मरीजों को जीवन संकट का सामना
Nagda (उज्जैन)। मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी और औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तहसील नागदा में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी गहन चिंता का विषय बन गई है। लाखों की आबादी वाले इस क्षेत्र में मूलभूत स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता ने मरीजों और उनके परिजनों को संकट में डाल दिया है। खासकर रक्त (ब्लड) जैसी जीवन-रक्षक सुविधा की कमी ने कई गंभीर मामलों को जन्म दिया है। इस संदर्भ में भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से नागदा सिविल हॉस्पिटल में मिनी ब्लड बैंक स्थापित करने की मांग की है।
Nagda में स्वास्थ्य सुविधाओं की वर्तमान स्थिति
वर्तमान में नागदा के मरीजों को रक्त जैसी आवश्यक चिकित्सा सुविधा के लिए लगभग 50-55 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है। इसके चलते समय, धन और जान तीनों पर संकट उत्पन्न होता है। जिला मीडिया प्रभारी राहुल शर्मा ने बताया कि पहले नागदा सिविल हॉस्पिटल में मिनी ब्लड बैंक की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन अब यह बंद है। वहीं, निजी अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक भी लंबे समय से बंद पड़ा है।
रक्तदान करने वाले लोग उपलब्ध हैं, लेकिन संग्रहण और स्टोरेज की व्यवस्था न होने के कारण मरीजों के परिजनों को उज्जैन, रतलाम या अन्य शहरों की ओर जाना पड़ता है। नागदा और खाचरोद क्षेत्र की लगभग 2 से 2.5 लाख आबादी में थैलेसीमिया, गर्भवती महिलाएं, एनीमिक मरीज और दुर्घटना पीड़ित शामिल हैं। समय पर रक्त न मिल पाने की स्थिति में परिजनों को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है।
मिनी ब्लड बैंक की आवश्यकता
विशेषज्ञों का कहना है कि रक्त की जीवन अवधि लगभग 20-25 दिन होती है। यदि समय पर इसका उपयोग न हो तो इसे सुरक्षित उपयोग के लिए बड़े अस्पतालों में भेजा जा सकता है। लेकिन नागदा जैसी आबादी वाले क्षेत्र में मिनी ब्लड बैंक की अनुपस्थिति मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है:
- नागदा सिविल हॉस्पिटल में तत्काल मिनी ब्लड बैंक की स्थापना।
- सभी रक्त समूह (A, B, AB, O) की पर्याप्त यूनिट्स की उपलब्धता।
- एक प्रशिक्षित तकनीशियन की नियुक्ति।
- रक्त संग्रहण, स्टोरेज और ट्रांसफ्यूजन की पूरी व्यवस्था।
- स्थानीय संस्थाओं के सहयोग से नियमित रक्तदान शिविर का आयोजन।
मरीज और परिजनों की मुश्किलें
रक्त की अनुपलब्धता के कारण कई मरीज अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद उचित उपचार से वंचित रहते हैं। परिजन मानसिक तनाव के साथ-साथ आर्थिक बोझ का सामना करते हैं। उन्हें निजी खर्च पर दूसरे शहरों में जाकर रक्त लाना पड़ता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। ऐसे हालात में मिनी ब्लड बैंक की स्थापना केवल सुविधा नहीं बल्कि हजारों लोगों के जीवन की सुरक्षा का सवाल बन जाता है।
संगठन की प्रतिक्रिया और समर्थन
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव ने कहा,
“स्वास्थ्य सुविधाएं प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार हैं। नागदा जैसे बड़े क्षेत्र में ब्लड बैंक का अभाव अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। शासन-प्रशासन को तत्काल इस दिशा में ठोस कदम उठाते हुए मिनी ब्लड बैंक की स्थापना सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि किसी भी मरीज को रक्त के अभाव में जीवन न गंवाना पड़े।”
अन्य पदाधिकारियों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भी इस मांग का समर्थन किया। प्रदेश मीडिया प्रभारी जीवनलाल जैन, जिला मीडिया प्रभारी गगन बोहरा, नागदा जर्नलिस्ट क्लब संस्थापक राजेश सकलेचा, अध्यक्ष मांगीलाल पोरवाल, अधिमान्य पत्रकार कल्याण एकता संघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष जया बघेल, राजू गुप्ता सहित अन्य लोगों ने इसे जनहित का अत्यंत आवश्यक विषय बताया।
संगठन के सदस्य शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, डॉ. प्रेम कुमार वैद्य, रामवेश सिंह राजावत, युवराज सिंह राठौर, मनीष गुप्ता ने संयुक्त रूप से कहा,
“नागदा में मिनी ब्लड बैंक की स्थापना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि हजारों लोगों के जीवन की सुरक्षा का प्रश्न है। हम शासन से मांग करते हैं कि इस जनहितकारी कार्य को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र कार्रवाई की जाए, ताकि नागदा, खाचरोद एवं ग्रामीण क्षेत्रों की जनता को राहत मिल सके।”
स्थानीय और राष्ट्रीय दृष्टिकोण
विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े अस्पतालों में रक्त भेजने की तुलना में स्थानीय मिनी ब्लड बैंक अधिक प्रभावी और जीवनरक्षक सिद्ध हो सकता है। इस तरह की सुविधा मरीजों को समय पर जीवनदायिनी रक्त उपलब्ध कराती है और दुर्घटना, थैलेसीमिया या प्रसूति जैसी आपात स्थितियों में समय पर इलाज संभव बनाती है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी यह एक मॉडल बन सकता है। अगर छोटे शहरों और तहसील क्षेत्रों में मिनी ब्लड बैंक स्थापित किए जाएं, तो यह केवल नागदा ही नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का उदाहरण बनेगा।
निष्कर्ष
नागदा में मिनी ब्लड बैंक की स्थापना केवल एक मांग नहीं, बल्कि जनता की जीवन रक्षा की आवश्यकता बन चुकी है। लाखों की आबादी वाले इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी ने कई मामलों में जान को खतरे में डाल दिया है। शासन-प्रशासन को चाहिए कि इस दिशा में तुरंत कार्रवाई करे और सिविल हॉस्पिटल में मिनी ब्लड बैंक स्थापित करे।
यदि ऐसा होता है, तो न केवल नागदा और खाचरोद के मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सुरक्षा की स्थिति में सुधार होगा। समय रहते कार्रवाई करने से हजारों लोगों के जीवन को बचाया जा सकता है और सामाजिक सुरक्षा के मानक भी स्थापित होंगे।
