Nagada: राष्ट्रीय स्वाभिमान यज्ञ समारोह: हिन्दी का महत्व और समाज में जागरूकता बढ़ाने का मंच
Nagada: हिन्दी प्रचार सेवा समिति, नागदा द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्वाभिमान यज्ञ समारोह का आयोजन मदर मेरी उच्च माध्यमिक विद्यालय के विशाल सभागृह में भव्य रूप से किया गया। समारोह में पूर्व विधायक दिलीपसिंह गुर्जर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने हिन्दी भाषा के महत्व, समाज में इसके प्रयोग और भारतीय संस्कृति के संरक्षण पर विशेष जोर दिया।
पूर्व विधायक गुर्जर ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी भी समाज में विचारों का आदान-प्रदान, अध्ययन-शिक्षण और ज्ञान-दान के लिए अपनी मातृभाषा सबसे सहज माध्यम होती है। चाहे देश, काल और परिस्थितियाँ बदलें, लेकिन हिन्दी ने हमेशा जनमानस तक पहुँचने में मदद की है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार, संपर्क और व्यवहार के लिए हिन्दी ही सबसे उपयोगी भाषा है। उनका मानना है कि हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय समाज की संस्कृति और पहचान का प्रतीक भी है।
समारोह के दौरान साहित्यकारों और समाजसेवियों ने भी हिन्दी की महत्ता पर प्रकाश डाला। सुरेश रघुवंशी ने बताया कि समारोह में हरचरणसिंह चावला ने आख्यानक शैली में हिन्दी भाषा के महत्व, इसकी सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा हर भारतीय के व्यक्तित्व का अभिन्न अंग है और इसका संरक्षण हमारे समाज की जिम्मेदारी है।
दयाराम धाकड़ ने अपने विचारों में कहा कि वैश्वीकरण और आधुनिकता के दौर में भी हिन्दी भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र बनी हुई है। उनका मानना है कि आज हिन्दी न केवल भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। उन्होंने कहा कि हमें परिवार और समाज में हिन्दी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सतत प्रयास करना होगा।
निलेश मेहता ने भी हिन्दी भाषा की प्रतिष्ठा को बनाए रखने और समाज में इसे प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों, शिक्षकों और पत्रकारों का दायित्व है कि हिन्दी भाषा को हमेशा गतिशील और सतत प्रयासों से समाज में स्थापित रखें।
प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक चौहान ने कहा कि हिन्दी केवल दबाव या प्रभाव की भाषा नहीं है, बल्कि सद्भाव और संवाद की भाषा है। इसे भारतवासियों में दृढ़ता से बनाए रखना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संस्कृत और हिन्दी के बीच गहरा सम्बन्ध है और यह दोनों भाषाएँ बुद्धिमानों की भाषा रही हैं।
हनुमानसिंह शेखावत ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि कोई भी देश राष्ट्रभाषा के बिना अधूरा है। भारत संवैधानिक दृष्टि से हिन्दी की स्थिति को मजबूत करता है। समाज में हिन्दी के प्रचार-प्रसार और संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है।
Nagada समारोह की विधियां और कार्यक्रम
Nagada समारोह का शुभारंभ मां गायत्री के सस्वर पाठ से हुआ। इसके बाद हनुमानसिंह शेखावत के निर्देशन में ध्वज स्थापना की गई, जिसका वंदन सन्दरलाल उपाध्याय कोकिल ने किया। अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन किया।
सरस्वती वन्दना की प्रस्तुति 12वीं विज्ञान की छात्रा रहनुमा परवीन ने दी। अतिथियों का परिचय समिति अध्यक्ष डॉ. पं. लक्ष्मीनारायण सत्यार्थी ने दिया, जबकि स्वागत भाषण मदर मेरी विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती मारिया शेखावत ने प्रस्तुत किया। वैदिक मंत्रों के साथ समंगल तिलक का आयोजन वेदिका शर्मा द्वारा किया गया।
समारोह में साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का समन्वय किया गया। अतिथियों ने स्मृति चिन्ह, शाल, श्रीफल और उपवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। सारस्वत अतिथि निलेश मेहता और आत्माराम अनकिया को कलम योद्धा और कलम गुरु सम्मान प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, पूर्व विधायक दिलीपसिंह गुर्जर, राधे जायसवाल, दयाराम धाकड़, हरचरणसिंह चावला, हनुमानसिंह शेखावत, मारिया शेखावत, आत्माराम अनकिया, आतुबाबा और गौतम लश्करी को भी स्मृति चिन्ह और अभिनन्दन किया गया।
रमेश मुनीम और सुरेश रघुवंशी को देहदान के लिए सम्मानित किया गया। अतिथियों का स्वागत सुमन गुच्छ और पुष्पमाल से किया गया। स्वागत में शामिल लोगों में श्रीमती निशा धीमन, टीना परमार, दिव्या नायक, ज्योति चौरसिया, पिंकी शर्मा, राकेश जिन्दल, शैलेन्द्र शर्मा, इन्दर सांकला, कृष्णचन्द्र पुरोहित, मनोज शर्मा, कैलाश सोनी सार्थक, सुन्दर जोशी सूरज, कैलाशचन्द्र खनार, सुरेश रघुवंशी, अशोक शर्मा मृदुल, गोपाल सुनहरे, निर्भय रघुवंशी, हिरालाल प्रजापत, ओमप्रकाश कड़लुआ, रोहन कड़लुआ, सुन्दरलाल उपाध्याय शामिल थे।
साहित्यिक परीक्षा और काव्य पाठ
अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य परीक्षा में 29 परीक्षार्थियों को विद्या विनोद, विद्या रत्न, विद्या विशारद उपाधियाँ प्रदान की गईं। कार्यक्रम में अशोक शर्मा मृदुल ने मालवी भाषा में काव्य पाठ प्रस्तुत किया। समिति का वार्षिक ब्यौरा वाचन सुन्दर जोशी सूरज ने किया। संचालन डॉ. पं. सत्यार्थी ने काव्यात्मक शैली में किया, जबकि आभार कैलाशचन्द्र खनार ने माना।
समारोह के दौरान सभी उपस्थित लोगों ने हिन्दी भाषा के संरक्षण और सामाजिक महत्व पर जोर दिया। यह कार्यक्रम न केवल भाषा के प्रचार-प्रसार का अवसर था, बल्कि समाज में जागरूकता, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के संदेश को भी फैलाने का मंच साबित हुआ।
समारोह का समापन शान्तिपाठ और अल्पाहार के साथ हुआ, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से संस्कृति, शिक्षा और समाज सेवा के प्रति अपने संकल्प को मजबूत किया।
