नागदा में निजी स्कूलों के खिलाफ अभिभावकों का मोर्चा, RTE उल्लंघन और अवैध शुल्क वसूली के आरोप; एसडीएम को सौंपा 12 सूत्रीय ज्ञापन
संवाददाता: जीवनलाल जैन
नागदा (उज्जैन)। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा में निजी विद्यालयों की कथित मनमानी, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) के उल्लंघन, अवैध शुल्क वसूली तथा अन्य अनियमितताओं को लेकर अभिभावकों का आक्रोश खुलकर सामने आया। अखिल भारतीय बलाई महासंघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने जिला कलेक्टर उज्जैन के नाम एक विस्तृत 12 सूत्रीय ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) नागदा को सौंपा। ज्ञापन में निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषी संस्थानों पर कार्रवाई करने तथा अभिभावकों को राहत देने की मांग की गई है।
महासंघ का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी विद्यालय या संस्था को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और शिक्षा का अधिकार अधिनियम का प्रभावी पालन सुनिश्चित कराना है।
RTE के कथित उल्लंघन का लगाया आरोप
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मुद्दा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) के कथित उल्लंघन का उठाया गया है। महासंघ और अभिभावकों का आरोप है कि नगर के कई निजी विद्यालय RTE के तहत प्रवेश प्राप्त विद्यार्थियों से भी विभिन्न प्रकार के शुल्क वसूल रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि RTE के तहत अध्ययनरत विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना विद्यालयों की कानूनी जिम्मेदारी है। इसके बावजूद उनसे विकास शुल्क, गतिविधि शुल्क, वार्षिक शुल्क तथा अन्य मदों में राशि वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि iअवैध वसूली प्रमाणित होती है तो संबंधित अभिभावकों को उनकी राशि वापस दिलाई जाए।
पुस्तकें और यूनिफॉर्म एक ही दुकान से खरीदने का दबाव
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि कई निजी विद्यालय छात्रों के अभिभावकों पर एक निश्चित दुकान से ही पुस्तकें, कॉपियां, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने का दबाव बनाते हैं।
उनका कहना है कि इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा समाप्त होती है और अभिभावकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। यदि कोई अभिभावक अन्य दुकान से सामग्री खरीदना चाहता है तो उसे विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
महासंघ ने मांग की कि इस प्रकार की व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाई जाए और अभिभावकों को अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी अधिकृत विक्रेता से सामग्री खरीदने की स्वतंत्रता दी जाए।
विद्यालयों की मान्यता और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल
ज्ञापन में केवल शुल्क वसूली ही नहीं, बल्कि विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
महासंघ का आरोप है कि कई निजी विद्यालयों में—
- भवन सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा।
- अग्निशमन (फायर सेफ्टी) व्यवस्था अधूरी है।
- स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है।
- शौचालयों की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
- खेल मैदान और अन्य आवश्यक सुविधाओं का अभाव है।
- मान्यता संबंधी नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा।
ज्ञापन में इन सभी बिंदुओं पर संयुक्त निरीक्षण कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
12 सूत्रीय मांगों के माध्यम से उठाए कई अहम मुद्दे
अखिल भारतीय बलाई महासंघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कुल 12 प्रमुख मांगें शामिल की गई हैं।
इनमें प्रमुख रूप से—
- नागदा के सभी निजी विद्यालयों की उच्च स्तरीय जांच।
- RTE के तहत कथित अवैध शुल्क वसूली की जांच।
- वसूली गई राशि अभिभावकों को वापस कराना।
- 25 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था का सत्यापन।
- अभिभावकों की खुली जनसुनवाई आयोजित करना।
- विद्यालयों द्वारा एक निश्चित दुकान से पुस्तकें एवं यूनिफॉर्म खरीदने के दबाव पर रोक।
- संबंधित मामलों की निष्पक्ष पुनः जांच।
- पूर्व जांच दल की कार्यवाही की समीक्षा।
- विद्यालयों की सुरक्षा एवं मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण।
- शुल्क संरचना और मान्यता संबंधी जानकारी सार्वजनिक करना।
- निर्धारित समय सीमा में जांच पूरी करना।
- जांच प्रतिवेदन अभिभावकों के समक्ष प्रस्तुत करना।
महासंघ का कहना है कि इन मांगों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सकता है।
RTE की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि प्रत्येक निजी विद्यालय के बाहर शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी सूचना-पट पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित कराई जाए।
महासंघ का कहना है कि अधिकांश अभिभावकों को अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी नहीं होती, जिसका लाभ कुछ संस्थाएं उठाती हैं। यदि विद्यालयों के बाहर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होगी तो अभिभावक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगे और अनियमितताओं की शिकायत भी कर सकेंगे।
अभिभावकों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
ज्ञापन में कहा गया कि लगातार बढ़ती शिक्षा लागत ने मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
अभिभावकों का कहना है कि प्रवेश शुल्क, वार्षिक शुल्क, परिवहन शुल्क, गतिविधि शुल्क, पुस्तकें, यूनिफॉर्म और अन्य खर्चों के कारण शिक्षा अत्यधिक महंगी होती जा रही है।
महासंघ का मानना है कि यदि नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए तो अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिल सकती है।
निष्पक्ष जांच की मांग
महासंघ ने प्रशासन से अनुरोध किया कि पूरे मामले की जांच किसी निष्पक्ष और उच्च स्तरीय समिति से कराई जाए।
ज्ञापन में कहा गया है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि अभिभावकों का प्रशासन पर विश्वास बना रहे।
साथ ही यदि किसी विद्यालय द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
15 दिन में कार्रवाई की मांग



ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई कि पूरे मामले की जांच 15 दिनों के भीतर पूरी कर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए।
महासंघ का कहना है कि लंबे समय तक जांच लंबित रहने से अभिभावकों की समस्याएं बढ़ती हैं। इसलिए समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
महासंघ और अभिभावकों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा में निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे एसडीएम कार्यालय के समक्ष शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेंगे।
उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण होगा। यदि ऐसी स्थिति बनती है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
महासंघ का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी निजी विद्यालय की छवि खराब करना नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और कानून के अनुरूप बनाना है।
उनका मानना है कि यदि सभी विद्यालय समान नियमों का पालन करें, RTE के प्रावधानों को ईमानदारी से लागू करें और अभिभावकों के साथ पारदर्शी व्यवहार करें तो इस प्रकार के विवाद स्वतः समाप्त हो सकते हैं।
बड़ी संख्या में अभिभावक और सामाजिक प्रतिनिधि रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में अभिभावक एवं सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से अखिल भारतीय बलाई महासंघ के प्रदेश महामंत्री ओमप्रकाश परमार नागराज, किसान यूनियन मंच के प्रदेश अध्यक्ष कवि देवीसिंह गुर्जर, आरसी परमार, वासुदेव चौहान, श्याम परमार, शैलू चौहान, अनिल चौहान, सूरज जाट, पप्पू धानक, राजेश शुरवात, रतन निंबोला, अशोक जादव, राकेश परमार, सुनील सोनार्थी, अखिलेश गहलोत, जीवन परमार, धर्मेंद्र सिंह भाटीसूडा, हिमांशु चौहान, मोहित मालवीय, अभिषेक मालवीय, मोदित बामनिया, भारत परमार, सुरेंद्र गुप्ता, कृष्णपाल परमार, धीरज चौहान, बाबू चौहान, नरेंद्र, मनीष परमार, रमेश सिंगोरिया, मुकेश मथानिया, दीपक निंबोला सहित अनेक अभिभावक और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
निष्कर्ष
नागदा में निजी विद्यालयों के खिलाफ उठी यह आवाज केवल शुल्क वृद्धि का मुद्दा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून के पालन की मांग भी है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित विद्यालयों पर कार्रवाई हो सकती है, वहीं यदि शिकायतें निराधार पाई जाती हैं तो स्थिति स्पष्ट होगी।
