नागदा में मंदिरों के पास मीट दुकानें हटाने को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता शंकरलाल प्रजापत ने जनसुनवाई में आवेदन दिया। हाई कोर्ट आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल।
रिपोर्ट: जीवनलाल लाल जैन, नागदा
दिनांक: 24/02/2026
प्रस्तावना
नागदा में मंदिरों के पास मीट दुकानें पिछले कई महीनों से विवाद का विषय बनी हुई हैं। धार्मिक स्थलों के आसपास खुले में मांस-मटन और मुर्गी की बिक्री को लेकर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी है। इसी मुद्दे को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता शंकरलाल प्रजापत ने जनसुनवाई में आवेदन देकर प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग की है।
यह मामला अब केवल एक स्थानीय शिकायत नहीं, बल्कि नियम, प्रशासनिक जवाबदेही और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील विषय बन चुका है।
नागदा में मंदिरों के पास मीट दुकानें: क्या है पूरा मामला?
मध्यप्रदेश के नागदा नगर में कई मंदिरों के आसपास खुले में मीट दुकानों के संचालन की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
आरोप हैं कि:
- मंदिरों के समीप मांस-मटन की बिक्री हो रही है
- खुले में मीट बेचा जा रहा है
- पूर्व में दिए गए आवेदन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई
- लाइसेंस रद्द होने के बाद भी दुकानें संचालित हैं
यह स्थिति धार्मिक भावनाओं और प्रशासनिक नियमों दोनों के लिए चुनौती मानी जा रही है।
जनसुनवाई में दिया गया आवेदन
24 फरवरी 2026 को जनसुनवाई में सामाजिक कार्यकर्ता शंकरलाल प्रजापत ने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को आवेदन सौंपा।
उनकी प्रमुख मांगें:
- नागदा में मंदिरों के पास मीट दुकानें तत्काल हटाई जाएं
- खुले में मांस विक्रय पर रोक लगे
- रद्द किए गए लाइसेंस के बावजूद चल रही दुकानों पर कार्रवाई हो
- नगर पालिका को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं
उन्होंने यह भी कहा कि कई बार नगर पालिका को आवेदन देने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
हाई कोर्ट आदेश और प्रशासनिक स्थिति
प्रजापत ने अपने आवेदन में उल्लेख किया कि इंदौर हाई कोर्ट की अवमानना याचिका सिविल नंबर 2130/2020 के आदेशों का पालन नहीं हो पा रहा है।मध्यप्रदेश हाई कोर्ट से जुड़े आदेशों के अनुपालन को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं।साथ ही, खाद्य एवं औषधि प्रशासन उज्जैन द्वारा 20 लाइसेंस रद्द किए जाने के बावजूद दुकानों के संचालन का आरोप भी लगाया गया है।
एक करोड़ की लागत से बना मीट मार्केट भवन
नगर पालिका द्वारा लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से एक नया मीट मार्केट भवन निर्मित किया गया था।
लेकिन आरोप है कि:
- निर्धारित भवन में मीट विक्रय नहीं हो रहा
- रात के समय असामाजिक गतिविधियां होती हैं
- खुले में बिक्री जारी है
यह स्थिति प्रशासनिक संसाधनों के उपयोग पर भी सवाल खड़े करती है।
सीएम हेल्पलाइन और नगर पालिका पर सवाल
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि:
- सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें बिना ओटीपी बंद कर दी जाती हैं
- नगर पालिका कर्मचारी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे
- नियमों का पालन करवाने में लापरवाही बरती जा रही है
मध्यप्रदेश शासन द्वारा मीट दुकानों को व्यवस्थित करने की रूपरेखा पहले ही बनाई जा चुकी थी। अधिक जानकारी के लिए आप मध्यप्रदेश शासन की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं:
प्रशासन की भूमिका और आगे की संभावनाएं
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नागदा में मंदिरों के पास मीट दुकानें हटाने को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाएगा?
संभावित कार्रवाई:
- संयुक्त निरीक्षण दल का गठन
- लाइसेंस सत्यापन
- निर्धारित मीट मार्केट भवन में शिफ्टिंग
- खुले में बिक्री पर प्रतिबंध
यदि नियमों का सख्ती से पालन होता है तो विवाद स्वतः समाप्त हो सकता है।
सामाजिक और कानूनी संतुलन की आवश्यकता
यह विषय केवल धार्मिक भावना से नहीं, बल्कि शहरी नियोजन, लाइसेंसिंग और सार्वजनिक स्वच्छता से भी जुड़ा है।
संतुलन जरूरी है:
- धार्मिक स्थलों की गरिमा
- व्यापारियों के वैध अधिकार
- प्रशासन की जवाबदेही
- कानून का समान पालन
निष्कर्ष
नागदा में मंदिरों के पास मीट दुकानें अब एक बड़ा स्थानीय मुद्दा बन चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता शंकरलाल प्रजापत द्वारा जनसुनवाई में उठाया गया यह कदम प्रशासनिक सक्रियता की परीक्षा है।यदि हाई कोर्ट आदेश, लाइसेंस नियम और नगर पालिका की गाइडलाइन का सही पालन होता है, तो यह विवाद समाधान की ओर बढ़ सकता है।अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

