Nagda (ब्रजेश बोहरा)
Nagda : मध्यप्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से उठ रही मांग अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेने जा रही है। राज्य में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग को लेकर प्रदेशभर के पत्रकार 1 मई को राजधानी भोपाल कूच करेंगे। इस प्रस्तावित आंदोलन को लेकर पत्रकार संगठनों में व्यापक उत्साह का माहौल है और पूरे प्रदेश के विभिन्न जिलों में इसकी तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं।
पत्रकार संगठनों का कहना है कि वर्तमान समय में पत्रकारिता का कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों पर दबाव, धमकियों, दुर्व्यवहार और कई बार हमलों जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में पत्रकार सुरक्षा कानून की आवश्यकता अब केवल मांग नहीं, बल्कि समय की अनिवार्यता बन चुकी है।
पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग क्यों हुई तेज
प्रदेश के पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने वाला मीडिया आज स्वयं असुरक्षा के माहौल में कार्य कर रहा है। कई जिलों से आए मामलों में यह सामने आया है कि पत्रकारों को उनकी रिपोर्टिंग के कारण निशाना बनाया गया, कई बार उन्हें प्रशासनिक और सामाजिक दबाव का भी सामना करना पड़ा।
पत्रकार संगठनों का स्पष्ट मत है कि यदि राज्य में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाता है, तो इससे पत्रकारों को कानूनी संरक्षण मिलेगा और वे बिना किसी भय के निष्पक्ष और स्वतंत्र पत्रकारिता कर सकेंगे।
मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पत्रकार समाज की आवाज बनते हैं, लेकिन यदि उनकी ही आवाज दबाई जाएगी तो लोकतंत्र कमजोर होगा। इसलिए यह कानून न केवल पत्रकारों की सुरक्षा के लिए, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए भी आवश्यक है।
प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी
1 मई को होने वाले इस भोपाल कूच को लेकर प्रदेशभर में पत्रकार संगठनों ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। कई जिलों में बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिसमें अधिक से अधिक पत्रकारों को इस आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
गांव, तहसील और जिला स्तर तक पत्रकार संगठनों ने संपर्क अभियान शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया और व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से भी पत्रकारों को भोपाल पहुंचने का आह्वान किया जा रहा है।
संगठनों का मानना है कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि पत्रकारों के अधिकारों की लड़ाई है, जिसे एकजुट होकर ही सफल बनाया जा सकता है।
ब्रजेश बोहरा का बयान
मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला इकाई नागदा उपाध्यक्ष ब्रजेश बोहरा ने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून लागू होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज पत्रकारिता करना आसान नहीं रह गया है। कई बार रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों को असामाजिक तत्वों और दबंगों के विरोध का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि यदि यह कानून लागू होता है तो पत्रकार निडर होकर समाज के सच को सामने ला सकेंगे और निष्पक्ष पत्रकारिता को मजबूती मिलेगी। उन्होंने सभी पत्रकार साथियों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक आंदोलन का हिस्सा बनें और अपनी एकता का परिचय दें।
शलभ भदौरिया का आह्वान
मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रांताध्यक्ष शलभ भदौरिया ने प्रदेशभर के पत्रकारों से भोपाल पहुंचकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह केवल भीड़ जुटाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा की निर्णायक लड़ाई है।
उन्होंने सभी पत्रकारों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि यह समय एकजुटता का है और हर पत्रकार को इस आंदोलन में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष पूरे पत्रकार समाज का है और इसका लाभ हर पत्रकार को मिलेगा।
शलभ भदौरिया ने कहा कि किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि उसके न पहुंचने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यह एक सामूहिक आंदोलन है, और हर व्यक्ति की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
“करो या मरो” के जज्बे के साथ आंदोलन
पत्रकार संघ के प्रांताध्यक्ष ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक औपचारिक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह पत्रकार समाज की प्रतिष्ठा और सुरक्षा से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने सभी पत्रकारों से “करो या मरो” के जज्बे के साथ इस आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि यदि आज पत्रकार अपनी सुरक्षा के लिए नहीं खड़े होंगे, तो आने वाले समय में परिस्थितियां और भी कठिन हो सकती हैं। इसलिए यह आंदोलन भविष्य की पत्रकारिता की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
भोपाल में होगा बड़ा एकत्रीकरण
पत्रकार संगठनों ने जानकारी दी है कि 1 मई को भोपाल के न्यू मार्केट क्षेत्र में प्रदेशभर से आए पत्रकार बड़ी संख्या में एकत्रित होंगे। यहां पर एक विशाल सभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें पत्रकार अपनी एकता और शक्ति का प्रदर्शन करेंगे।
इस दौरान पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग को लेकर ज्ञापन भी सौंपा जाएगा और सरकार से शीघ्र कार्रवाई की अपील की जाएगी।
प्रदेश के अन्य जिलों से समर्थन
इस आंदोलन को प्रदेश के विभिन्न जिलों से व्यापक समर्थन मिल रहा है। कई जिलों के पत्रकार संगठनों ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वे बड़ी संख्या में भोपाल पहुंचेंगे और आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेंगे।
नागदा से भी पत्रकारों का एक दल जिला इकाई नागदा अध्यक्ष राजेश रघुवंशी के नेतृत्व में भोपाल रवाना होगा। यह दल 1 मई को आंदोलन में शामिल होकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करेगा।
पत्रकारों की एकता का संदेश
इस आंदोलन का एक महत्वपूर्ण संदेश पत्रकारों की एकता को मजबूत करना भी है। संगठनों का कहना है कि यदि पत्रकार एकजुट रहेंगे तो कोई भी उनकी आवाज को दबा नहीं सकता।
“पत्रकार एकता जिंदाबाद” और “मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ जिंदाबाद” जैसे नारों के साथ पूरे प्रदेश में एकता का संदेश फैलाया जा रहा है।
लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका
लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। वे जनता और सरकार के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं। पत्रकार न केवल सूचनाएं पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का भी कार्य करते हैं।
ऐसे में यदि पत्रकार स्वयं असुरक्षित महसूस करेंगे तो इसका प्रभाव पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ेगा। इसलिए पत्रकार सुरक्षा कानून केवल पत्रकारों की मांग नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक कदम है।
भविष्य की दिशा
पत्रकार संगठनों का मानना है कि यदि यह आंदोलन सफल होता है, तो यह मध्यप्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
इसके बाद अन्य राज्यों में भी इस तरह की मांगों को मजबूती मिलेगी और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज होगी।
निष्कर्ष
1 मई को होने वाला भोपाल कूच केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि पत्रकार समाज की एकजुटता, अधिकारों और सुरक्षा की निर्णायक लड़ाई है। प्रदेशभर से जुटने वाले पत्रकार यह संदेश देने जा रहे हैं कि वे अपने अधिकारों के लिए एकजुट हैं और किसी भी परिस्थिति में अपनी आवाज को दबने नहीं देंगे।
यह आंदोलन आने वाले समय में मध्यप्रदेश की पत्रकारिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित हो सकता है।
