जनोन्मुखी पत्रकारिता वक्त की जरूरत”: Nagda में श्रमजीवी पत्रकार संघ के सम्मेलन में पत्रकारिता की भूमिका पर हुई गंभीर चर्चा
Nagda मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ का एक दिवसीय सम्मेलन बुधवार को नागदा स्थित रंगोली रिसोर्ट में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। सम्मेलन में प्रदेशभर से आए पत्रकारों, वरिष्ठ पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, चुनौतियों और लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर खुलकर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में पत्रकारिता की विश्वसनीयता, स्वतंत्रता और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीर मंथन हुआ।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
Nagda सम्मेलन में मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेशाध्यक्ष शलभ भदौरिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष राजेश रघुवंशी ने की। मंच पर विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र धाकड़, पूर्व विधायक जितेंद्र गहलोत, वरिष्ठ मजदूर नेता सुल्तान सिंह शेखावत, नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि ओपी गेहलोत तथा अग्निपथ के संपादक अर्जुन सिंह चंदेल विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
सम्मेलन की शुरुआत अतिथियों के स्वागत के साथ हुई, जिसके बाद पत्रकारिता और लोकतंत्र के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श का सिलसिला शुरू हुआ।

अर्जुन सिंह चंदेल ने पत्रकारिता पर उठाए अहम सवाल
Nagda सम्मेलन में अग्निपथ के संपादक अर्जुन सिंह चंदेल ने अपने बेबाक और तीखे अंदाज में पत्रकारों को आत्ममंथन करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकार अक्सर स्वयं को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानते हैं, लेकिन भारतीय संविधान में कहीं भी प्रेस, मीडिया या पत्रकारिता को चौथे स्तंभ के रूप में उल्लेखित नहीं किया गया है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई यह दावा करता है कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संविधान के किस प्रावधान में इसका उल्लेख है।
चंदेल ने कहा कि लोकतंत्र के तीनों संवैधानिक स्तंभों को वेतन, सुविधाएं और पेंशन जैसी व्यवस्थाएं प्राप्त हैं, जबकि पत्रकारों के लिए ऐसी कोई संवैधानिक व्यवस्था नहीं है। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों के लिए दी जाने वाली श्रद्धानिधि योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि पत्रकारों को अपनी स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने पत्रकारिता के स्तर में आई गिरावट पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मीडिया को आत्ममंथन कर अपनी विश्वसनीयता मजबूत करने की आवश्यकता है।
“जनोन्मुखी पत्रकारिता ही समय की मांग”
प्रदेशाध्यक्ष शलभ भदौरिया ने अपने संबोधन में पत्रकारिता के विभिन्न स्वरूपों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में लंबे समय से तीन प्रकार की पत्रकारिता देखने को मिलती रही है—सेठाश्रित पत्रकारिता, राजाश्रित पत्रकारिता और जनोन्मुखी पत्रकारिता।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सबसे अधिक आवश्यकता जनोन्मुखी पत्रकारिता की है, जो आम जनता की समस्याओं, अधिकारों और मुद्दों को प्रमुखता से सामने लाए।
भदौरिया ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन के मुखिया के रूप में उनका दायित्व केवल प्रशंसा करना नहीं, बल्कि पत्रकारों की कमियों को सामने लाकर उन्हें दूर करने की दिशा में प्रेरित करना भी है।
उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि नेताओं द्वारा पत्रकारों की प्रशंसा करना उनकी राजनीतिक मजबूरी हो सकती है, लेकिन पत्रकारों को स्वयं अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी रखे विचार
अपने संबोधन में शलभ भदौरिया ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, तो इसके लिए संसद में औपचारिक प्रस्ताव पारित होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में पत्रकार उसी संवैधानिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत कार्य करते हैं, जो देश के प्रत्येक नागरिक को प्राप्त है। इसलिए पत्रकारों को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने दायित्वों का भी पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए।
विधायक ने पत्रकारों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
सम्मेलन को संबोधित करते हुए विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह ने कहा कि पत्रकारिता आज भी समाज का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि चुनौतियों के बावजूद पत्रकारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो इस पेशे के प्रति लोगों के विश्वास को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपने कार्य को राष्ट्रहित की भावना से करता है, तो उसका कार्य केवल व्यक्तिगत नहीं रहता, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी योगदान देता है।
पूर्व विधायक ने निष्पक्ष पत्रकारिता पर दिया जोर
पूर्व विधायक जितेंद्र गहलोत ने अपने संबोधन में कहा कि समाचार का हमेशा एक दूसरा पक्ष भी होता है। इसलिए पत्रकारों का दायित्व है कि वे सभी पक्षों को समझकर संतुलित और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करें।
उन्होंने पत्रकारों से तथ्यों की पुष्टि करने और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता देने की अपील की।
आत्मनिर्भर बनने का दिया सुझाव
सम्मेलन में उपस्थित वरिष्ठ मजदूर नेता सुल्तान सिंह शेखावत ने पत्रकारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी। उन्होंने सुझाव दिया कि पत्रकार संगठन सहकारिता मॉडल के माध्यम से नए रोजगार और आर्थिक अवसर विकसित कर सकते हैं, जिससे पत्रकारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
बड़ी संख्या में पत्रकार रहे उपस्थित
Nagda कार्यक्रम में शासन एवं संगठन समन्वय समिति सदस्य एवं वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र पुरोहित, प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र राठौर, प्रांतीय कार्य समिति सदस्य डॉ. गोविंद सौलंकी, उज्जैन संभाग अध्यक्ष मनोज जैन, छतरपुर संभाग महासचिव प्रतीक खरे, उज्जैन जिलाध्यक्ष डॉ. राहुल कटारिया सहित नागदा और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे।
आयोजन समिति ने सभी अतिथियों का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया। कार्यक्रम का समापन जिला महासचिव जितेंद्र चौहान द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।
पत्रकारिता के भविष्य पर सार्थक मंथन
सम्मेलन में पत्रकारिता की स्वतंत्रता, निष्पक्षता, विश्वसनीयता और जनहित जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बदलते समय में पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनता की आवाज बनना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन करना होना चाहिए। सम्मेलन ने पत्रकारों को आत्ममंथन, पेशेवर नैतिकता और जनोन्मुखी पत्रकारिता के महत्व का स्पष्ट संदेश दिया।
