नागदा जं.: शांतिनाथ राजेन्द्रसूरी जैन मंदिर में 25वां ध्वजारोहण, मंत्रोच्चारण से गुंजा परिसर—परमरस पंचान्हिका महोत्सव का तीसरा दिन सम्पन्न
नागदा जं।
श्री श्वे. मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ नागदा जं. द्वारा जैन कालोनी स्थित शांतिनाथ राजेन्द्रसूरी जैन ज्ञान मंदिर में रविवार को परमरस पंचान्हिका महोत्सव के तीसरे दिन 25वां वार्षिक ध्वजारोहण हर्ष और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।
मुनिश्री प्रत्यक्षरत्नविजयजी मसा और मुनिश्री पवित्ररत्नविजयजी मसा की निश्रा में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर “ऊँ पुण्याहाम्, प्रीहंताम” जैसे पवित्र मंत्रों से गुंजायमान रहा।
स्नात्र पूजन से शुरुआत – ध्वज पूजन के बाद शिखर पर चढ़ा ध्वज
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 7.30 बजे स्नात्र पूजन से हुई।
9 बजे आचार्यश्री एवं मुनिप्रवर की निश्रा में सत्तरभेदी पूजन आयोजित हुआ।
10.30 बजे ध्वज पूजन के बाद भगवान की प्रतिमा की तीन प्रदक्षिणा कर ध्वज को मंदिर शिखर पर आरोहित किया गया।
विधान विधिकारक हेमंत कांकरिया व डॉ. विपिन वागरेचा रहे तथा सुरेश नाहटा ने इसे संगीतमय स्वर दिए।
ध्वजारोहण के बाद आचार्यश्री एवं मुनिप्रवर द्वारा श्रद्धालुओं को महामांगलिक का लाभ कराया गया।
धर्मसभा में प्रवचन – लाभार्थी परिवारों का बहुमान
धर्मसभा में मुनिश्री प्रत्यक्षरत्नविजयजी मसा और आचार्यकल्पयशसूरीश्वरजी मसा ने संबोधित करते हुए धर्म के महत्व, समय के सदुपयोग और पुण्य के प्रभाव पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में श्रीसंघ एवं ट्रस्ट मंडल द्वारा ध्वजारोहण व स्वामीवात्सलय के लाभार्थी परिवारों का सम्मान किया गया।
संचालन मनोज वागरेचा और आभार ब्रजेश बोहरा ने व्यक्त किया।
स्वामीवात्सलय और भक्ति संध्या
धर्मसभा के बाद स्वामीवात्सलय का लाभ जे.के. संघवी एवं के.के. संघवी परिवार ने लिया।
ध्वजारोहण का विशेष लाभ दाखाबाई शांतिलाल सकलेचा परिवार को प्राप्त हुआ।
रात्रि में 8 बजे हुई महाआरती एवं भक्ति संध्या में श्रद्धालुओं ने भजनों पर भावपूर्वक भक्ति का आनंद लिया। इसका लाभ अभय कुमार–ऋषभ कुमार बोहरा परिवार द्वारा लिया गया।
मुनिश्री प्रत्यक्षरत्नविजयजी मसा का संदेश: “पुण्य से ही मिलता है भगवान का दर्शन”
मुनिश्री ने कहा कि पुण्य उदय से व्यक्ति मंदिर में विराजमान भगवान का दर्शन कर पाता है, जबकि कई लोग पास में रहते हुए भी भौतिक व्यस्तताओं के कारण दर्शन से वंचित रह जाते हैं।
उन्होंने कहा कि भौतिकता में उलझा व्यक्ति 84 लाख जीव योनि में परिभ्रमण बढ़ा लेता है।
आचार्यकल्पयशसूरीश्वरजी मसा का संदेश: “समय का सदुपयोग ही जीवन का धन”
आचार्यश्री ने समझाया कि मनुष्य को मिले समय का सदुपयोग अत्यंत आवश्यक है। धर्म आराधना मानव जन्म को सफल बनाती है।
कल आचार्यश्री जयंतसेनसूरीश्वरजी मसा के 90वें जन्म दिवस पर विशेष कार्यक्रम
मीडिया प्रभारी डॉ. वागरेचा ने बताया कि मंगलवार को परमरस पंचान्हिका महोत्सव के अंतिम दिन निम्न कार्यक्रम होंगे—



