Nagda जल संकट को लेकर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने उज्जैन जिले के नागदा वार्ड-25 में जल आपूर्ति में भेदभाव का आरोप लगाया है। ट्रस्ट ने नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई और सभी परिवारों को समान जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
Nagda जल संकट: वार्ड-25 में पानी को लेकर भेदभाव का आरोप, मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से की हस्तक्षेप की मांग
Nagda, उज्जैन19 जून 2026
Nagda जल संकट बना वार्ड-25 के लिए बड़ी समस्या
Nagda जल संकट को लेकर उज्जैन जिले के Nagda शहर के वार्ड क्रमांक-25 जीवाजी नगर में रहने वाले नागरिकों ने गंभीर शिकायतें दर्ज कराई हैं। भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने इस मुद्दे को राज्य सरकार के समक्ष उठाते हुए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।ट्रस्ट का आरोप है कि क्षेत्र में पानी की पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में परिवारों को बोरिंग के पानी के कनेक्शन से वंचित रखा जा रहा है।
वार्ड-25 के 150 से 200 परिवार प्रभावित
ट्रस्ट द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार जीवाजी नगर के लगभग 150 से 200 घरों में पानी की पाइपलाइन मौजूद है। इसके बावजूद कई परिवारों को पर्याप्त जल आपूर्ति नहीं मिल रही है।स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें केवल 15 मिनट के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है, जिससे दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना मुश्किल हो गया है।निवासियों ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया और सीएम हेल्पलाइन पर भी वास्तविक स्थिति से अलग जानकारी प्रस्तुत की जा रही है।
जल आपूर्ति में भेदभाव के आरोप
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि क्षेत्र के कुछ परिवारों को नियमित जल आपूर्ति मिल रही है जबकि अन्य परिवारों को पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।इसी कारण नागदा जल संकट अब स्थानीय स्तर पर जनहित और मानवाधिकार से जुड़ा मुद्दा बन गया है।
मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने उठाई आवाज
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के राष्ट्रीय सचिव शिवम तिवारी ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को पत्र लिखा है।पत्र में मांग की गई है कि वार्ड-25 में जल वितरण व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा सभी प्रभावित परिवारों को समान रूप से पानी उपलब्ध कराया जाए।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से की गई प्रमुख मांगें
ट्रस्ट की मांग
- वार्ड-25 की जल आपूर्ति व्यवस्था की जांच
- सभी घरों को समान जल वितरण
- कथित भेदभावपूर्ण व्यवस्था समाप्त करना
- सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की समीक्षा
- प्रभावित नागरिकों को राहत प्रदान करना
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना
ट्रस्ट अध्यक्ष सुनील सिंह यादव का बयान
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव ने अपने संदेश में कहा:
“पानी एक मौलिक मानवाधिकार है। किसी भी क्षेत्र के नागरिकों के साथ जल आपूर्ति के मामले में भेदभाव करना न केवल प्रशासनिक विफलता है बल्कि उनके अधिकारों का हनन भी है।”उन्होंने कहा कि ट्रस्ट तब तक संघर्ष जारी रखेगा जब तक वार्ड-25 के प्रत्येक परिवार को पर्याप्त और समान जल आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो जाती।
संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने क्या कहा
संगठन के पदाधिकारियों:
- शिवम तिवारी
- कृष्णा यादव
- डॉ. प्रेम कुमार वैद्य
- रामवेश सिंह राजावत
- युवराज सिंह राठौर
- मनीष गुप्ता
- जीवनलाल जैन (चाय वाले)
ने संयुक्त वक्तव्य जारी करते हुए कहा:“भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट का प्रत्येक पदाधिकारी आम जनमानस के साथ खड़ा है। जब प्रशासनिक स्तर पर लोगों की सुनवाई नहीं होती तब ट्रस्ट जनता की पीड़ा को शासन तक पहुंचाने का कार्य करता है।”प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि संबंधित विभाग जल्द कार्रवाई करते हुए वार्ड-25 के निवासियों को राहत प्रदान करेगा।
Nagda जल संकट क्यों बन रहा है गंभीर विषय?
विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में सीमित जल आपूर्ति से स्वास्थ्य, स्वच्छता और दैनिक जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है।यदि किसी क्षेत्र में पाइपलाइन होने के बावजूद पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं कराया जाता तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।
नागरिकों को प्रशासन से क्या उम्मीद?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्हें किसी विशेष सुविधा की नहीं बल्कि समान और नियमित जल आपूर्ति की आवश्यकता है।नागरिक चाहते हैं कि:
- प्रत्येक घर तक पानी पहुंचे
- जल वितरण में पारदर्शिता हो
- शिकायतों का त्वरित समाधान हो
- प्रशासन क्षेत्रीय निरीक्षण करे
निष्कर्ष
Nagda जल संकट अब केवल पानी की समस्या नहीं बल्कि नागरिक सुविधाओं और समान अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बन गया है। भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट द्वारा राज्य सरकार के समक्ष मामला उठाए जाने के बाद अब लोगों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।यदि संबंधित विभाग समय रहते प्रभावी कदम उठाता है तो वार्ड-25 के सैकड़ों परिवारों को राहत मिल सकती है।


