मध्यप्रदेश में UCC की दिशा में बड़ा कदम: 9.5 लाख सुझाव, 93% समर्थन, मुस्लिम समुदाय से भी सकारात्मक संकेत
यूसीसी लागू करने की दिशा में तेजी
मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। इस संबंध में बनाए गए विधेयक के प्रारूप पर जनता से भारी प्रतिक्रिया मिली है। प्रारूप तैयार करने वाली समिति को अब तक 9.5 लाख से अधिक ऑनलाइन सुझाव प्राप्त हुए हैं, जो इस विषय पर अभूतपूर्व जनभागीदारी को दर्शाते हैं।
93 प्रतिशत लोगों ने किया समर्थन
प्राप्त सुझावों के विश्लेषण में सामने आया है कि लगभग 93 प्रतिशत लोगों ने यूसीसी का समर्थन किया है। यह आंकड़ा सरकार और समिति दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि समाज का बड़ा वर्ग इस बड़े कानूनी बदलाव के पक्ष में है।
मुस्लिम समुदाय से भी मिला अप्रत्याशित समर्थन
शुरुआत में यह माना जा रहा था कि मुस्लिम समुदाय इस प्रस्ताव का विरोध करेगा, लेकिन जमीनी तस्वीर इससे अलग निकली है। लगभग 44 हजार मुस्लिम लोगों ने अपने सुझाव दिए, जिनमें से करीब 21,500 यानी 49 प्रतिशत ने यूसीसी का समर्थन किया है।
यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह पारंपरिक धारणा को चुनौती देता है कि यह समुदाय पूरी तरह से इसके खिलाफ होगा।
मुस्लिम महिलाओं का मजबूत समर्थन
आंकड़ों में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है कि मुस्लिम महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में अधिक समर्थन दिखाया है।
- लगभग 71 प्रतिशत मुस्लिम महिलाएं यूसीसी के पक्ष में हैं
- जबकि केवल 38 प्रतिशत पुरुषों ने इसका समर्थन किया
यह अंतर सामाजिक बदलाव और विचारधारा में आ रहे परिवर्तन को दर्शाता है।
आम जनता से 12 प्रश्नों पर लिए गए सुझाव
यूसीसी प्रारूप तैयार करने के लिए गठित समिति, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना देसाई कर रही हैं, ने जनता से 12 प्रमुख प्रश्नों पर राय मांगी थी।
इस प्रक्रिया में:
- लगभग 42% पुरुष
- 58% महिलाएं
- और 100 से अधिक उभयलिंगी (Transgender) लोगों ने भाग लिया
यह दर्शाता है कि इस मुद्दे पर समाज के हर वर्ग ने सक्रिय भागीदारी दिखाई है।
महिलाओं की भागीदारी और समर्थन अधिक
आंकड़ों के अनुसार महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक रही है।
- 4 लाख महिलाओं में से लगभग 3.8 लाख (95%) ने यूसीसी का समर्थन किया
- 5.5 लाख पुरुषों में से लगभग 5.1 लाख (92%) ने समर्थन किया
यह स्पष्ट करता है कि महिलाओं में इस सुधार के प्रति अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण है।
विधानसभा सत्र में विधेयक पेश होने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। इससे पहले सभी सुझावों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि अंतिम प्रारूप तैयार किया जा सके।
राज्य स्तरीय सुनवाई और अलग-अलग राय
भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय सुनवाई के दौरान कुछ मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध भी दर्ज कराया था। उनका कहना था कि समुदाय इसे स्वीकार नहीं करेगा। हालांकि, ऑनलाइन सुझावों के आंकड़े इससे अलग तस्वीर पेश करते हैं।
अन्य राज्यों में पहले से लागू है यूसीसी
भारत में पहले ही कुछ राज्यों ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिया है:
- उत्तराखंड
- गुजरात
- असम
मध्यप्रदेश अब इन्हीं राज्यों की राह पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सामने आए आंकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि यह मुद्दा अब केवल एक प्रशासनिक या राजनीतिक पहल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक विमर्श का रूप ले चुका है। विधेयक के प्रारूप पर मिली 9.5 लाख से अधिक सुझावों की संख्या अपने आप में यह दर्शाती है कि आम नागरिक इस विषय पर गहरी रुचि और भागीदारी दिखा रहे हैं। इनमें से 93 प्रतिशत लोगों का समर्थन इस बात को और मजबूत करता है कि समाज का बड़ा हिस्सा कानूनी एकरूपता की दिशा में बदलाव को स्वीकार करने के लिए तैयार है।
विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय से मिले सुझाव इस चर्चा को और अधिक महत्वपूर्ण बनाते हैं, क्योंकि पारंपरिक रूप से इसे लेकर अलग राय की उम्मीद की जाती थी। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि इस समुदाय के भी एक महत्वपूर्ण हिस्से ने समर्थन व्यक्त किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि विचारों में परिवर्तन और सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ रही है। महिलाओं की अधिक भागीदारी और उनका उच्च समर्थन स्तर यह दर्शाता है कि सामाजिक सुधारों के प्रति उनकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
कुल मिलाकर, यह पूरा परिदृश्य बताता है कि मध्यप्रदेश में यूसीसी को लेकर एक नई सामाजिक सहमति बनती हुई दिखाई दे रही है, हालांकि कुछ मतभेद अभी भी मौजूद हैं।
