इंदौर में मुनिश्री साध्यसागर महाराज चातुर्मास कलश स्थापना समारोह मोदी जी की नसिया परिसर में आचार्य सिद्धांत सागर व विप्रणत सागर महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ।
मुनिश्री साध्यसागर महाराज चातुर्मास कलश स्थापना: आत्मचिंतन का संदेश, भव्य समारोह में उमड़ा जैन समाज
इंदौर। मुनिश्री साध्यसागर महाराज चातुर्मास कलश स्थापना का धार्मिक एवं आध्यात्मिक समारोह मोदी जी की नसिया परिसर में आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी महाराज एवं आचार्य श्री विप्रणत सागर जी महाराज के सानिध्य में मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजसेवी, महिला संगठन और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि श्रमण संस्कृति के महामहिम आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के कुल गौरव मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज बीसपंथी मंदिर, मल्हारगंज में चातुर्मास साधना कर रहे हैं। समारोह के दौरान मुनिश्री ने चातुर्मास की आध्यात्मिक महत्ता बताते हुए श्रावकों को आत्मचिंतन, संयम और स्वाध्याय की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
चातुर्मास आत्मा की ओर लौटने का अवसर
मुनिश्री साध्यसागर जी महाराज ने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक आयोजनों का समय नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर झांकने और आत्मा की ओर लौटने का अवसर है। उन्होंने कहा कि बाहरी गतिविधियों के साथ मनुष्य को अपने भीतर भी आत्मचिंतन करना चाहिए।
मुनिश्री ने कहा, “चातुर्मास आत्मा की ओर लौटने का अवसर है। इस दौरान हमें बाहरी आयोजनों के साथ अपने भीतर भी झांकना चाहिए। क्रोध को क्षमा, अहंकार को विनय और लोभ को त्याग से दूर करने का प्रयास ही चातुर्मास की सच्ची सार्थकता है।”
आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी महाराज एवं आचार्य श्री विप्रणत सागर जी महाराज ने भी चातुर्मास को श्रावकों के लिए धर्म, संयम, स्वाध्याय और आत्मचिंतन का विशेष अवसर बताया। क्षुल्लक श्री विनयनंदी जी महाराज ने भी उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान किए।
जैन परंपरा में आत्मसंयम, अहिंसा और आत्मशुद्धि को विशेष महत्व दिया जाता है। जैन धर्म के मूल सिद्धांतों में अहिंसा, करुणा और आत्मानुशासन प्रमुख माने जाते हैं।
पांच कलशों की स्थापना
वर्षायोग चातुर्मास के अवसर पर कलश स्थापना मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई। चातुर्मास कमेटी के मनमोहन झांझरी, श्री राजेश पांड्या एवं श्री अजयपाल टोंग्या ने बताया कि प्रथम चातुर्मास कलश लेने का सौभाग्य समाजसेवी श्रीपाल जी टोंग्या परिवार को प्राप्त हुआ।
द्वितीय कलश श्री धर्मेंद्र, पुष्पेंद्र एवं देवेंद्र पाटनी परिवार को प्राप्त हुआ। तृतीय कलश मेना एवं अशोक जी पहाड़िया परिवार को मिला। चतुर्थ कलश रवी देवी आजाद जैन बीड़ी वाला परिवार तथा पंचम कलश किशोर शाह परिवार को प्राप्त हुआ।
कलश स्थापना के इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने धार्मिक विधि-विधान के साथ मुनिश्री के चरणों में अपनी श्रद्धा समर्पित की।
धार्मिक क्रियाओं में समाज की सहभागिता
कार्यक्रम के प्रारंभ में सपना मनीष गोधा एवं अर्चना दिलीप गोधा ने ध्वजारोहण किया। इसके बाद नरेश सेठी, एमके जैन एवं हसमुख गांधी, प्रतिपाल जी टोंग्या ने दीप प्रज्वलन किया।
पाद प्रक्षालन का सौभाग्य सीपी शाह, पवन बेन एवं श्री अमित गांधी को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य स्वाध्याय मंडल बीसपंथी मंदिर को मिला।
विभिन्न महिला संगठनों एवं सामाजिक संगठनों ने भी मुनिश्री के चरणों में अर्घ समर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। आयोजन में समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता देखने को मिली।
मुनिश्री साध्यसागर महाराज का संदेश
मुनिश्री साध्यसागर महाराज चातुर्मास कलश स्थापना समारोह में दिए गए संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन और आत्मसंयम की प्रेरणा दी। मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य को अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से क्रोध, अहंकार और लोभ जैसे विकारों से दूर रहने का संदेश दिया। उनके अनुसार क्षमा, विनय और त्याग को जीवन में अपनाकर चातुर्मास की साधना को सार्थक बनाया जा सकता है।
चातुर्मास के दौरान धार्मिक प्रवचन, स्वाध्याय और आत्मचिंतन के माध्यम से श्रद्धालुओं को अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा मिलती है।
समारोह में मौजूद रहे अतिथि
समारोह में सांसद शंकर लालवानी, पूर्व गृह मंत्री बाला बच्चन, आनंद, नवीन गोधा, अशोक बड़जात्या, कैलाश वेद, जयदीप जैन, कमल रावका, प्रदीप बड़जात्या, प्रिंसिपल टोंग्या, पारस जैन, विजय सेठी, कमल काला, शेखर जैन, वीरेन्द्र बड़जात्या एवं सुनील गोधा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
महिला परिषद की संभागीय अध्यक्ष श्रीमती मुक्ता जैन, साधना दगडे एवं संगीता काला सहित महिला संगठनों की प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
अतिथि स्वागत श्री राजेश पांड्या, श्री अजय पाल टोंग्या, श्री अजय रावका एवं श्री विजयपाल टोंग्या भोला ने किया।
कार्यक्रम का संचालन और व्यवस्थाएं
कार्यक्रम का संचालन पंडित श्री अर्पित जैन वाणी एवं श्री धर्मेंद्र पाटनी ने किया। समस्त धार्मिक क्रियाएं पंडित नितिन झांझरी ने संपन्न कराईं।
समारोह में श्रद्धालुओं के लिए वात्सल्य भोज की व्यवस्था भी की गई। वात्सल्य भोज के पुण्यार्जक श्री गजेंद्र जैन, गिन्नी ग्रुप रहे।
मुनिश्री साध्यसागर जी महाराज के चातुर्मास के दौरान बीसपंथी मंदिर मल्हारगंज में धार्मिक कार्यक्रमों एवं प्रवचनों के माध्यम से समाजजनों को धर्म, संयम, स्वाध्याय और आत्मचिंतन की प्रेरणा मिलती रहेगी।
रिपोर्टर: राजेश जैन दद्दू, इंदौर






