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मुनिराज श्री डॉ संयम रत्न विजय जी के ओजस्वी प्रवचन से महिदपुर रोड में जागा अद्भुत धर्म उत्साह

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Published On: 17 May 2026
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मुनिराज श्री डॉ संयम रत्न विजय जी के महिदपुर रोड आगमन पर भव्य स्वागत हुआ। प्रवचन में मानव जीवन, धर्म और भक्ति का संदेश दिया गया।

मुनिराज श्री डॉ संयम रत्न विजय जी के प्रेरणादायी प्रवचन से महिदपुर रोड में उमड़ा धर्ममय वातावरण

मुनिराज श्री डॉ संयम रत्न विजय जी म. सा. के मंगल प्रवेश से महिदपुर रोड शहर धर्ममय वातावरण में सराबोर हो गया। पुण्य सम्राट एवं वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद् विजय नित्यसेन सुरीश्वर जी म. सा. एवं आचार्य देवेश श्रीमद् विजय जयरत्न सुरीश्वर जी म. सा. के आज्ञानुवर्ती पूज्य मुनिराज श्री डॉ संयमरत्न विजय जी म. सा. एवं मुनिराज श्री भुवनरत्न विजय जी म. सा. आदि ठाणा का भव्य मंगल प्रवेश रविवार सुबह 7 बजे नागदा चौराहा से ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच हुआ।

मुनिराज श्री डॉ संयम रत्न विजय जी का भव्य मंगल प्रवेश

मुनिराज श्री डॉ संयम रत्न विजय जी के महिदपुर रोड आगमन पर शहरभर में उत्साह और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। नागदा चौराहा से प्रारंभ हुई मंगल यात्रा में समाजजनों ने जगह-जगह गहुली कर पूज्य गुरुदेव का स्वागत किया और मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।ढोल-नगाड़ों, जयघोष और भक्ति भाव के बीच निकली शोभायात्रा ने पूरे शहर को धर्ममय बना दिया।

ज्ञान मंदिर में हुए ओजस्वी प्रवचन

सुबह 9:15 बजे ज्ञान मंदिर में आयोजित धर्मसभा में मुनिराज श्री डॉ संयम रत्न विजय जी ने ओजस्वी प्रवचन देते हुए मानव जीवन के महत्व को समझाया।

मनुष्य जन्म दुर्लभ

पूज्य गुरुदेव ने कहा—“मनुष्य जन्म चिंतामणि रत्न के समान है, यह हमें बार-बार प्राप्त नहीं होता।”उन्होंने बताया कि मनुष्य खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही संसार से जाता है, इसलिए जीवन में वैरभाव नहीं रखना चाहिए।

धर्म का वास्तविक स्वरूप समझाया

शांत भाव ही सच्चा धर्म

मुनिराज श्री डॉ संयम रत्न विजय जी ने कहा कि श्रद्धा और शांत भाव से धारण किया गया आचरण ही वास्तविक धर्म है।

मन को सजाने की प्रेरणा

उन्होंने कहा—“हमें तन नहीं, मन को सजाना चाहिए क्योंकि तन नश्वर है।”यह संदेश उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा।

जिनेंद्र भक्ति को बताया मोक्ष का मार्ग

प्रवचन में पूज्य मुनिराज श्री ने कहा कि संसार सागर से पार उतरने के लिए जिनेंद्र भक्ति ही सबसे बड़ा साधन है।परमात्मा भक्ति ही नाव समान उन्होंने कहा कि—“परमात्मा भक्ति नाव के समान है, जो जीव को संसार सागर से पार लगाती है।”

समाजजनों ने लिया धर्म लाभ

इस मंगल अवसर पर सा धार्मिक भक्ति का लाभ पारसमल, निलेश कुमार एवं रितेश कुमार भंडारी परिवार द्वारा लिया गया।पूरे कार्यक्रम में समाजजनों ने अत्यंत श्रद्धा और अनुशासन के साथ सहभागिता निभाई।

आगामी विहार एवं चातुर्मास की जानकारी

जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि पूज्य मुनिराज श्री का संध्या समय डेलची की ओर विहार होगा तथा प्रातःकाल महिदपुर सिटी पधारेंगे।

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उज्जैन की ओर होगा विहार

महिदपुर सिटी से पूज्य गुरुदेव उन्हेल होते हुए उज्जैन की ओर विहार करेंगे।

कानपुर में होगा चातुर्मास

पूज्य गुरुदेव का आगामी चातुर्मास उत्तर प्रदेश के कानपुर में आयोजित होगा, जिसका मंगल प्रवेश 22 जुलाई को होगा।

मुनिराज श्री के सांसारिक पिता का बहुमान

प्रवचन के दौरान पूज्य मुनिराज श्री के सांसारिक पिता श्री नंदलाल जी का सकल जैन श्री संघ द्वारा बहुमान किया गया।यह क्षण श्रद्धा और सम्मान से भरा हुआ रहा।

बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित

इस मंगलकारी अवसर पर सकल जैन श्री संघ, श्री संघ अध्यक्ष अजय चोरड़िया, नवयुवक परिषद, महिला परिषद, बहू परिषद, तरुण परिषद एवं बालिका परिषद सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।सभी ने धर्मसभा में भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया।

नागदा में धर्ममय बना वातावरण

मुनिराज श्री डॉ संयम रत्न विजय जी के प्रेरणादायी प्रवचनों से महिदपुर रोड नागदा शहर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।पूरे कार्यक्रम में श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन का सुंदर संगम देखने को मिला।

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