मंडलेश्वर में श्रद्धा-भक्ति से मना मुकुट सप्तमी एवं भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव
भगवान पार्श्वनाथ को अर्पित किया 23 किलो का भव्य निर्वाण लाडू, अभिषेक-शांतिधारा से लेकर मंडल विधान तक हुए धार्मिक आयोजन
संवाददाता: गौतम सालवे जिला ब्यूरो चीफ मंडलेश्वर
मंडलेश्वर। नगर में दिगम्बर जैन समाज द्वारा मुकुट सप्तमी एवं जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर जिनालय में सुबह से लेकर रात तक विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। बड़ी संख्या में जैन समाज के महिला-पुरुषों, युवाओं और बच्चों ने कार्यक्रमों में शामिल होकर भगवान पार्श्वनाथ की आराधना की और उनके बताए अहिंसा, संयम, त्याग एवं करुणा के मार्ग पर चलने की भावना व्यक्त की।
मोक्ष कल्याणक महोत्सव का प्रमुख आकर्षण भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में अर्पित किया गया 23 किलो का भव्य निर्वाण लाडू रहा। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान भगवान पार्श्वनाथ के जयकारों से पूरा जिनालय परिसर गूंज उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया।
आर्यिका श्री लक्ष्मी भूषण माताजी के सानिध्य में हुआ अभिषेक
महोत्सव के अंतर्गत परम पूज्य आर्यिका श्री 105 लक्ष्मी भूषण माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में भगवान श्री पार्श्वनाथ का विधि-विधान के साथ अभिषेक किया गया। भगवान के अभिषेक का सौभाग्य रक्षित कुमार जैन एवं रितेश कुमार जैन को प्राप्त हुआ।
अभिषेक के बाद पूज्य माताजी के मुखारबिंद से शांतिधारा संपन्न कराई गई। प्रथम शांतिधारा का सौभाग्य उषा जैन सागर परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य ब्रह्मचारिणी उषा दीदी को मिला। शांतिधारा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के जयकारे लगाए और विश्व शांति एवं सभी के कल्याण की मंगल भावना की।
धार्मिक अनुष्ठान के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु जिनालय में उपस्थित रहे। भक्तों ने भगवान के दर्शन कर परिवार एवं समाज की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
श्री पार्श्वनाथ मंडल विधान का हुआ भावपूर्ण आयोजन
महोत्सव में ब्रह्मचारिणी रिम्पी दीदी एवं ब्रह्मचारिणी उषा दीदी के सानिध्य में श्री पार्श्वनाथ मंडल विधान का भावपूर्ण आयोजन किया गया। समाजजनों ने भक्तिभाव के साथ विधान में शामिल होकर भगवान पार्श्वनाथ की आराधना की।
मंडल विधान के दौरान अखंड दीप प्रज्वलित किया गया। अखंड दीप प्रज्वलन का सौभाग्य ऋतु जैन एवं मालती बसंत जैन अनाज दुकान परिवार को प्राप्त हुआ।
मंडल कलश स्थापना का सौभाग्य रश्मि नवीन जैन, अक्षयबाला अजीत जैन, संध्या दिलीप जैन, मालती बसंत जैन एवं मीना महेंद्र जैन को प्राप्त हुआ। धार्मिक मंत्रोच्चार और भक्ति के बीच कलश स्थापना संपन्न हुई।
मंडल विधान में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ की पूजा-अर्चना करते हुए आध्यात्मिक उन्नति और सभी जीवों के कल्याण की भावना व्यक्त की।
भगवान पार्श्वनाथ को अर्पित किया 23 किलो का निर्वाण लाडू
भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर महोत्सव का विशेष आकर्षण 23 किलो का भव्य निर्वाण लाडू रहा। भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में निर्वाण लाडू अर्पित करने का सौभाग्य विनोद कुमार जैन, बसंत कुमार जैन एवं झिलमिल परिवार को प्राप्त हुआ।
इस दौरान संपूर्ण दिगम्बर जैन समाज मंडलेश्वर ने भी श्रद्धाभाव के साथ भगवान के चरणों में निर्वाण लाडू अर्पित कर मोक्ष कल्याणक की मंगल भावना की। निर्वाण लाडू अर्पित किए जाने के दौरान भगवान पार्श्वनाथ के जयकारों से जिनालय गूंज उठा।
श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के जीवन और उनकी तप-साधना को याद करते हुए धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
इन परिवारों को मिला रजतमय कलश स्थापना का सौभाग्य

महोत्सव में रजतमय कलश स्थापना भी विशेष आकर्षण रही। रजतमय कलश स्थापना का सौभाग्य अक्षयबाला अजीत जैन, रंजना प्रदीप जैन, सुलभा अश्विन जैन, मनोरमा बसंत जैन, रानी संतोष जैन, अरुण महावीर बाकलीवाल, सुप्रिया जितेंद्र जैन, सारिका अंतिम जैन एवं सूर्यकांता मांगीलाल बाकलीवाल परिवार को प्राप्त हुआ।
समाजजनों ने धार्मिक विधि-विधान के साथ कलश स्थापना में भाग लिया। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा।
धर्म पाठशाला में बच्चों को बताए धर्म और संस्कार
दोपहर में पूजनीय माताजी के सानिध्य में धर्म पाठशाला का आयोजन किया गया। इसमें बच्चों के साथ समाजजनों ने भी भाग लिया। धर्म पाठशाला के माध्यम से बच्चों को जैन धर्म, धार्मिक संस्कार और भगवान पार्श्वनाथ के जीवन से जुड़े आदर्शों की जानकारी दी गई।
बच्चों को बताया गया कि भगवान पार्श्वनाथ का जीवन अहिंसा, करुणा, संयम और त्याग का संदेश देता है। धार्मिक संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और बच्चों को धर्म से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित पाठशाला में बच्चों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
रात्रि में महाआरती से जगमगाया बड़ा मंदिर

दिनभर चले धार्मिक कार्यक्रमों के बाद रात्रि में बड़े मंदिर जी में भव्य महाआरती एवं भक्तिमय कार्यक्रम आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में समाजजन महाआरती में शामिल हुए। दीपों की रोशनी और भक्ति गीतों के बीच मंदिर का वातावरण आध्यात्मिक आनंद से भर गया।
महाआरती के बाद भगवान पार्श्वनाथ के जीवन, उनके उपदेशों और आदर्शों पर आधारित प्रश्न मंच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में समाजजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और भगवान पार्श्वनाथ के जीवन से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दिए। कार्यक्रम का उद्देश्य धार्मिक ज्ञान बढ़ाने के साथ नई पीढ़ी को भगवान पार्श्वनाथ के जीवन और सिद्धांतों से परिचित कराना रहा।
अहिंसा, संयम और करुणा के संदेश को किया याद
महोत्सव के दौरान समाजजनों ने भगवान पार्श्वनाथ के जीवन और उनके संदेशों का स्मरण किया। भगवान पार्श्वनाथ द्वारा बताए गए अहिंसा, संयम, त्याग और करुणा के मार्ग को जीवन में अपनाने की प्रेरणा ली गई।
सुबह के अभिषेक से लेकर रात्रि की महाआरती तक पूरे दिन जिनालय परिसर में धार्मिक उल्लास दिखाई दिया। भगवान पार्श्वनाथ के जयकारों, मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
आयोजन में दिगम्बर जैन समाज के पृथ्वीचंद जैन, प्रकाशचंद बाबूजी, मनोज कुमार जैन, धर्मेंद्र कुमार जैन, संयम जैन, नयन जैन, प्रदीप जैन, राजेंद्र धनोते, महावीर जैन और दिलीप जैन सहित बड़ी संख्या में समाज के महिला-पुरुष, युवा और बच्चे उपस्थित रहे। सभी ने श्रद्धापूर्वक धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक की मंगल भावना की।
