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“फ्रांस से आए श्री एलेक्सिस ने नागदा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा परियोजना और प्रगति परियोजना का फील्ड विजिट कर देखा सामुदायिक शिक्षा मॉडल”

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Published On: 4 November 2025
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शिक्षा और समुदाय का संगम: फ्रांस से आए श्री एलेक्सिस ने नागदा क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा परियोजना का किया फील्ड विजिट

नागदा जं. (निप्र)।
ग्राम्य शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन ला रही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा परियोजना (Quality Education Project) और प्रगति परियोजना (Project Pragati) के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय प्रयास सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में फ्रांस से आए एड एट एक्शन (Aide et Action) के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि श्री एलेक्सिस ने नागदा क्षेत्र के परियोजना गांवों का दो दिवसीय दौरा किया।

इस परियोजना का संचालन एड एट एक्शन और ग्रासिम इंडस्ट्रीज़ द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है, जबकि प्रगति परियोजना में एजुकेट गर्ल्स का सहयोग है। इस दौरे का उद्देश्य था—ग्रामीण समुदायों में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता, बच्चों में सीखने की गुणवत्ता और सामुदायिक भागीदारी के प्रभावों का आकलन करना।

टकरावदा से हुई शुरुआत – मातृ समिति के साथ संवाद

श्री एलेक्सिस ने अपने भ्रमण की शुरुआत टकरावदा गांव से की, जहाँ मातृ समिति (Mothers’ Committee) की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में उन्होंने माताओं और समुदाय की शिक्षा में बढ़ती भूमिका पर विशेष चर्चा की। उन्होंने कहा कि —

“जब समुदाय स्वयं बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेता है, तब परिवर्तन की शुरुआत अपने आप हो जाती है।”

इस मौके पर गांव की महिलाओं ने बताया कि परियोजना की वजह से अब वे न केवल अपने बच्चों की पढ़ाई में रुचि ले रही हैं बल्कि गांव के स्कूलों की गुणवत्ता सुधार में भी सक्रिय भागीदारी कर रही हैं।

नायन में लाइब्रेरी चौपाल ने खींचा ध्यान

इसके बाद प्रतिनिधि दल नायन गांव पहुंचा, जहाँ लाइब्रेरी चौपाल पहल के माध्यम से बच्चों और समुदाय में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है। गांव के बच्चे और अभिभावक एक साथ आकर पुस्तकों के माध्यम से ज्ञानवर्धन करते हैं।

इस अवसर पर नायन की सरपंच रेखा भीलवाड़ा, टकरावदा सरपंच मज्जू मुकेश भीलवाड़ा और दिवेल सरपंच गीता बाई बलवंत सिंह ने श्री एलेक्सिस का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि —

“गुणवत्तापूर्ण शिक्षा परियोजना ने न केवल हमारी पंचायतों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई है, बल्कि हमें एक मंच पर लाकर सामूहिक रूप से बच्चों के भविष्य के लिए काम करने की प्रेरणा दी है।”

 निपानिया में प्रगति शिविर – स्कूल से छूटी बालिकाओं के लिए नई उम्मीद

निपानिया गांव में श्री एलेक्सिस ने प्रगति शिविरों (Pragati Camps) का अवलोकन किया। इन शिविरों में स्कूल छोड़ चुकी बालिकाओं को दोबारा मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने शिविरों में अध्ययनरत किशोरियों और प्रेरकों (Mentors) से संवाद किया और उनकी सीखने की प्रक्रिया को समझा। किशोरियों ने बताया कि अब वे आत्मविश्वास के साथ न केवल पढ़ाई कर रही हैं बल्कि जीवन में आगे बढ़ने का सपना भी देख रही हैं।

 दिवेल में सामुदायिक कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब

पहले दिन का समापन दिवेल गांव में आयोजित एक विशाल सामुदायिक कार्यक्रम के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में 200 से अधिक ग्रामीणों ने भाग लिया। बच्चों, माताओं और समुदाय के सदस्यों ने शिक्षा से आए सकारात्मक परिवर्तनों को साझा किया।

श्री एलेक्सिस ने कहा कि —

“यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि शिक्षा अब केवल स्कूल तक सीमित नहीं रही, बल्कि समुदाय की सामूहिक सोच का हिस्सा बन चुकी है।”

 दूसरे दिन बच्चों की रचनात्मकता ने जीता दिल

दूसरे दिन भगतपुरी के आनंद घर (Anand Ghar) और परमारखेड़ी के आनंदालय (Anandalay) में बच्चों द्वारा प्रस्तुत नाटक, कहानी-वाचन और आनंदमय शिक्षण गतिविधियों ने सभी को प्रभावित किया।

इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सहयोग की भावना को विकसित करना है। बच्चों ने शिक्षा को खेल, कहानी और अनुभव से जोड़कर प्रस्तुत किया, जिससे सीखने की प्रक्रिया आनंदमय बनी।

 संयुक्त चिंतन सत्र में शिक्षा की नई परिभाषा

दौरे के समापन पर एक संयुक्त चिंतन सत्र (Reflection Session) आयोजित किया गया, जिसमें परियोजना टीम, पंचायत प्रतिनिधि, मातृ समितियां और प्रेरक शामिल हुए।

श्री एलेक्सिस ने इस अवसर पर कहा —

“गुणवत्तापूर्ण शिक्षा परियोजना न केवल शिक्षण परिणामों में सुधार ला रही है, बल्कि यह बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व और सहभागिता की भावना भी विकसित कर रही है। इस परियोजना के विभिन्न घटक जैसे — माता समिति, बाल संसद, लाइब्रेरी चौपाल, आनंदघर, आनंदालय, आनंदवाड़ी और प्रगति शिविर — समुदाय परिवर्तन की उत्कृष्ट मिसाल हैं।”

उन्होंने सभी टीम सदस्यों को ऐसे प्रयास निरंतर जारी रखने और ग्रामीण भारत में शिक्षा को और सशक्त बनाने का आह्वान किया।

सामुदायिक शिक्षा मॉडल बना उदाहरण

नागदा और आसपास के गांव अब सामुदायिक शिक्षा मॉडल के रूप में पहचान बना रहे हैं। यहां शिक्षा केवल स्कूल की चारदीवारी में नहीं, बल्कि हर घर, हर चौपाल और हर ग्रामसभा में चर्चा का विषय बन चुकी है।

ग्रासिम इंडस्ट्रीज़ और एड एट एक्शन की साझेदारी से चल रही यह परियोजना समाज में शिक्षा के प्रति स्थायी बदलाव की दिशा में एक सशक्त कदम मानी जा रही है।


📅 दिनांक: 02 नवंबर 2025
✍️ रिपोर्ट: आलोक मिश्रा
📞 मो. 91744 30306
📢 संवाददाता: जीवन लाल जैन, नागदा

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