इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन सड़क: सोशल मीडिया अफवाहों पर MPRDC ने दी सफाई
इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन मार्ग को लेकर सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से तेज़ी से वायरल हो रहे वीडियो और रीलों ने लोगों में भ्रम पैदा कर दिया था। इन वीडियोज़ में यह दावा किया गया कि सड़क निर्माण में प्लास्टिक के सरिए (प्लास्टिक रिइनफोर्स्ड बार) का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए। इस पर मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) ने तुरंत सफाई दी है।
वायरल वीडियो में दावा और अफवाहें
सोशल मीडिया पर दिखाए गए वीडियो में सड़क निर्माण के काम को घटिया और असुरक्षित बताया गया। वीडियो में दावा किया गया कि प्लास्टिक के सरियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो समय के साथ टूटने और सड़क की मजबूती को प्रभावित करने वाला है। इन वीडियोज़ को देखकर आम जनता और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं में चिंता की लहर दौड़ गई।
इस प्रकार की अफवाहें सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे। वीडियो में सड़क निर्माण को लेकर की गई आलोचनाओं ने कई लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि सड़क जल्द ही जर्जर हो सकती है।
MPRDC की सफाई: प्लास्टिक नहीं, GFRC का इस्तेमाल
MPRDC के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण में प्लास्टिक का कोई उपयोग नहीं हो रहा है। असल में, इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन मार्ग में ग्लास फाइबर रिइनफोर्स्ड पॉलिमर (GFRP) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह एक आधुनिक और अत्याधुनिक तकनीक है, जो स्टील के परंपरागत उपयोग का विकल्प प्रदान करती है।
प्रबंधक गगन भाभर ने बताया कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और रील में दिखाई गई प्लास्टिक सरियों का दावा भ्रामक है। वास्तव में सड़क निर्माण के लिए GFRP का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो वजन में हल्का होने के बावजूद अधिक मजबूत और टिकाऊ है।
GFRP तकनीक: स्टील से बेहतर विकल्प
GFRP की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह जंग नहीं खाता और समय के साथ खराब नहीं होता, जबकि स्टील लंबे समय में कमजोर हो सकता है। यह तकनीक हल्की होने के बावजूद बेहद मजबूत और टिकाऊ मानी जाती है। साथ ही, GFRP बिजली और गर्मी का संचालन नहीं करता, इसलिए इसे संवेदनशील क्षेत्रों जैसे अस्पताल, पावर प्लांट और अन्य सुरक्षा संवेदनशील जगहों पर भी सुरक्षित माना जाता है।
अधिकारियों ने बताया कि GFRP का निर्माण आईआरसी 137:2022 मानकों के अनुरूप किया गया है, जिससे सड़क की गुणवत्ता सुनिश्चित होती है। हालांकि इसे साइट पर मोड़ना और फिट करना थोड़ा कठिन है, लेकिन इसकी मजबूती और लंबी उम्र इस चुनौती को संतुलित कर देती है।
सड़क निर्माण से आगे: GFRP का व्यापक उपयोग
अब यह तकनीक केवल सिक्स लेन सड़क तक ही सीमित नहीं है। GFRP का उपयोग पुल, फुटओवर ब्रिज, कंक्रीट सड़कों, ड्रेनेज सिस्टम, रेलिंग, क्रैश बैरियर और अन्य संरचनाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। इसका मुख्य लाभ यह है कि यह लंबे समय तक टिकाऊ रहता है, जंग और जलवायु प्रभावों से सुरक्षित रहता है, और निर्माण में मजबूती प्रदान करता है।
MPRDC के अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में सड़क निर्माण और अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
सोशल मीडिया पर उठाए गए सवालों का जवाब
MPRDC प्रबंधक गगन भाभर ने स्पष्ट किया कि पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और रील में सड़क निर्माण में प्लास्टिक सरियों के इस्तेमाल का दावा गलत है। उन्होंने कहा, “मार्ग में स्टील के मटेरियल (सरिया) के स्थान पर ग्लास फाइबर रिइनफोर्स्ड पॉलिमर का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह पूरी तरह से आधुनिक तकनीक है और इसकी गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।”
अधिकारियों ने यह भी बताया कि GFRP तकनीक न केवल टिकाऊ और मजबूत है, बल्कि यह पर्यावरण और मानव सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी सुरक्षित मानी जाती है।
आम जनता के लिए संदेश
MPRDC ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल अफवाहों पर ध्यान न दें। वीडियो और रील में दिखाए गए प्लास्टिक सरियों का दावा पूरी तरह से गलत है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि सड़क निर्माण का कार्य उच्चतम मानकों के अनुसार किया जा रहा है और सड़क की मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित है।
इस सफाई के बाद उम्मीद की जा रही है कि आम जनता और सोशल मीडिया उपयोगकर्ता अब इस मुद्दे को लेकर भ्रमित नहीं होंगे।
निष्कर्ष
इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन परियोजना सिर्फ एक सड़क निर्माण का कार्य नहीं है, बल्कि यह नई तकनीक GFRP के उपयोग के माध्यम से राज्य में आधुनिक और टिकाऊ निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है। सोशल मीडिया पर वायरल अफवाहों को बेबुनियाद बताते हुए MPRDC ने स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण में किसी प्रकार का प्लास्टिक उपयोग नहीं हुआ है।
सड़क निर्माण में GFRP के इस्तेमाल से यह सुनिश्चित होता है कि सड़क लंबी उम्र वाली, मजबूत और जंग-प्रतिरोधी होगी। यह तकनीक भविष्य में पूरे राज्य में सड़क और अन्य नागरिक संरचनाओं के निर्माण में मानक स्थापित करेगी।
