MP में बड़ा हादसा टला: बिना चेतावनी छोड़ा गया ओंकारेश्वर बांध से पानी नर्मदा में फंसे 10 मजदूरों का रेस्क्यू
MP के ओंकारेश्वर बांध प्रबंधन की कथित लापरवाही के कारण शुक्रवार को नर्मदा नदी के मोरटक्का क्षेत्र में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। बांध से बिना पूर्व सूचना के अचानक अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने से नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। इसका सीधा असर नदी पर निर्माणाधीन रेलवे ब्रिज और उसके लिए बनाए गए एप्रोच रोड पर पड़ा। तेज बहाव के कारण एप्रोच रोड बह गया और निर्माण कार्य में लगे 10 मजदूर नदी के बीच फंस गए। घटना उस समय हुई जब नर्मदा नदी पर रेलवे ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा था। यह कार्य मंगलम बिल्डकान कंपनी द्वारा किया जा रहा है। शुक्रवार को मजदूर रोज की तरह निर्माण स्थल पर काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। कुछ ही समय में पानी इतना तेज हो गया कि मजदूर सुरक्षित स्थान तक नहीं पहुंच सके और नदी के बीच एक ऊँचे हिस्से पर फंस गए।
अचानक बढ़ा जलस्तर, MP के खेड़ीघाट ब्रिज पर मची अफरा-तफरी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बांध से पानी छोड़े जाने की कोई स्पष्ट और समय पर सूचना नहीं दी गई थी। मजदूरों और कंपनी के कर्मचारियों को अनुमान नहीं था कि पानी का स्तर इतनी तेजी से बढ़ेगा। जब तक स्थिति को समझा जाता, तब तक एप्रोच रोड का एक हिस्सा बह चुका था और मजदूर चारों ओर से पानी से घिर चुके थे। नदी के तेज बहाव और बढ़ते जलस्तर के कारण मौके पर अफरा-तफरी मच गई। मजदूरों ने किसी तरह ऊँचाई वाले हिस्से पर खड़े होकर अपनी जान बचाई और मदद का इंतजार करने लगे। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और स्थानीय लोग सक्रिय हुए। तत्काल नावों की व्यवस्था की गई और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
नावों से सुरक्षित निकाले गए मजदूर
काफी मशक्कत के बाद सभी 10 मजदूरों को नावों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रेस्क्यू के दौरान नदी का बहाव तेज था, जिससे बचाव कार्य में जोखिम बना रहा। हालांकि, समय रहते राहत कार्य पूरा कर लिया गया और किसी भी मजदूर को गंभीर चोट नहीं आई। मजदूरों के सुरक्षित बाहर आने के बाद प्रशासन और कंपनी के कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि किस तरह मजदूर नदी के बीच फंसे हुए हैं और नाव के जरिए उन्हें बाहर निकाला जा रहा है।

खेड़ीघाट क्षेत्र भी हुआ प्रभावित
ओंकारेश्वर बांध से छोड़े गए पानी का असर केवल निर्माण स्थल तक ही सीमित नहीं रहा। खेड़ीघाट क्षेत्र में भी नर्मदा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। नदी किनारे स्थित कई दुकानों में पानी भर गया, जिससे दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। कुछ दुकानों में रखा सामान पानी में डूब गया, वहीं कई व्यापारियों को अपना कारोबार अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। स्थानीय दुकानदारों ने बांध प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते पानी छोड़े जाने की सूचना दी जाती, तो वे अपना सामान सुरक्षित स्थान पर रख सकते थे और नुकसान से बच सकते थे।
बिना सूचना पानी छोड़े जाने पर नाराजगी
स्थानीय लोगों और दुकानदारों में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि ओंकारेश्वर जैसे बड़े बांध से जब भी पानी छोड़ा जाता है, तो उसकी पूर्व सूचना देना अनिवार्य होना चाहिए। अचानक पानी छोड़े जाने से न केवल मजदूरों की जान खतरे में पड़ी, बल्कि आम लोगों की आजीविका पर भी असर पड़ा। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि बांध प्रबंधन की इस लापरवाही की गंभीरता से जांच की जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
कंपनी मैनेजर ने लगाए गंभीर आरोप
मंगलम बिल्डकान कंपनी के मैनेजर पंकज पटेल ने ओंकारेश्वर बांध प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बांध प्रबंधन जितनी मात्रा में पानी छोड़ने की सूचना देता है, उससे कहीं अधिक पानी अचानक छोड़ दिया जाता है। इससे न केवल निर्माण कार्य प्रभावित होता है, बल्कि जान-माल का भी बड़ा खतरा बना रहता है। पंकज पटेल ने बताया कि इससे पहले भी उन्हें इसी तरह की स्थिति के कारण नुकसान झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि बार-बार शिकायत के बावजूद बांध प्रबंधन इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। उनका कहना है कि यदि भविष्य में भी इसी तरह बिना सूचना पानी छोड़ा गया, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रशासन ने शुरू की जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा है कि यह पता लगाया जाएगा कि पानी छोड़े जाने की प्रक्रिया में किन नियमों का पालन नहीं किया गया और क्या वास्तव में पूर्व सूचना देने में लापरवाही बरती गई। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए बांध प्रबंधन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाएगा।
बड़ा हादसा टला, लेकिन सवाल बरकरार
हालांकि इस घटना में किसी की जान नहीं गई, लेकिन यह साफ हो गया है कि थोड़ी सी लापरवाही कितनी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती थी। नर्मदा नदी पर चल रहे निर्माण कार्य, स्थानीय दुकानदारों और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या ओंकारेश्वर बांध प्रबंधन की कार्यप्रणाली में कोई सुधार किया जाता है या नहीं। फिलहाल, मजदूरों के सुरक्षित बाहर निकलने से राहत जरूर मिली है, लेकिन इस घटना ने भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी जरूर दे दी है।
