मध्यप्रदेश UCC और BNSS विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे, राज्यपाल ने अभिमत के साथ किया सुरक्षित
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ेगा विधायी प्रक्रिया
भोपाल। मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी UCC और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS विधेयक को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्यपाल के अभिमत के साथ दोनों विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रखा गया है। अब इन्हें केंद्रीय स्तर पर भेजकर राष्ट्रपति की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में कुल 14 विधेयकों को मंजूरी मिली थी। इनमें UCC और BNSS विधेयक भी शामिल हैं। राज्य के विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अनुसार, दोनों विधेयक समवर्ती सूची से संबंधित होने के कारण इनके कानून बनने की प्रक्रिया में राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक होगी।
UCC विधेयक दिल्ली भेजने में लगेगा करीब एक सप्ताह
समान नागरिक संहिता विधेयक को दिल्ली भेजने की प्रक्रिया में लगभग एक सप्ताह लगने की जानकारी सामने आई है। इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय के न्यायिक एवं विधायी विभाग के माध्यम से राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए आगे भेजा जाएगा।
इससे पहले UCC विधेयक मध्यप्रदेश विधानसभा से पारित होकर राज्यपाल के पास पहुंचा था। अब राज्य स्तर की प्रक्रिया के बाद विधेयक को केंद्र के समक्ष भेजा जाएगा। इसके बाद राष्ट्रपति कार्यालय में इसकी मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
BNSS विधेयक इसी सप्ताह भेजने की तैयारी
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) विधेयक को इसी सप्ताह दिल्ली भेजे जाने की तैयारी है। वहीं समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को भी करीब एक सप्ताह में केंद्रीय गृह मंत्रालय के न्यायिक एवं विधायी विभाग के माध्यम से राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। दोनों विधेयकों को राज्यपाल के अभिमत के साथ राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखा गया है।
अब केंद्र स्तर पर इनकी समीक्षा और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होगी। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही दोनों विधेयकों के कानून बनने का रास्ता साफ होगा। फिलहाल दोनों विधेयकों पर केंद्र सरकार और राष्ट्रपति कार्यालय की अगली कार्रवाई का इंतजार है।
क्या है UCC?
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का उद्देश्य व्यक्तिगत नागरिक मामलों से संबंधित कानूनों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। मध्यप्रदेश में UCC विधेयक को लेकर विधानसभा में चर्चा और राजनीतिक बहस के बाद इसे पारित किया गया था।
अब राष्ट्रपति की मंजूरी इसके आगे कानून बनने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरण होगी। हालांकि, राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद भी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े आवश्यक कदम पूरे किए जाने होंगे।
BNSS विधेयक का क्या है उद्देश्य?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) विधेयक आपराधिक न्याय प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों को मध्यप्रदेश में लागू करने से संबंधित है। यह विधेयक विधानसभा के मानसून सत्र में पारित किए गए प्रमुख विधेयकों में शामिल है। इसके जरिए आपराधिक मामलों की कानूनी प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों को राज्य स्तर पर लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।
वहीं, BNSS और समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयकों को राज्यपाल के अभिमत के साथ राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखा गया है। दोनों विधेयक समवर्ती सूची से जुड़े विषयों से संबंधित होने के कारण अब इन्हें केंद्र स्तर पर भेजा जाएगा। इसके बाद केंद्रीय सरकार के संबंधित विभाग इन विधेयकों की समीक्षा और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।
राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही दोनों विधेयकों के कानून के रूप में प्रभावी होने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। फिलहाल इन दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों पर केंद्र सरकार और राष्ट्रपति कार्यालय की अगली कार्रवाई का इंतजार है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल दोनों विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए दिल्ली भेजने की तैयारी है। UCC विधेयक को लगभग एक सप्ताह में दिल्ली भेजे जाने की बात सामने आई है, जबकि BNSS विधेयक को इसी सप्ताह भेजने की प्रक्रिया प्रस्तावित है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही दोनों विधेयकों के कानून के रूप में आगे बढ़ने की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। इसलिए अब मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में इन दोनों विधेयकों पर केंद्र से आने वाले निर्णय पर नजर रहेगी।
नोट: यह जानकारी 13 अगस्त 2026 को उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर है। राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी को इस समय प्राप्त मंजूरी के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए।
