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MP में कोयले से बनेगी रसोई गैस, अडानी कंपनियों को मंजूरी, सिंगरौली में लगेंगे प्लांट, ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

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Published On: 27 March 2026
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MP में कोयले से बनेगी रसोई गैस, ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव

MP में ऊर्जा क्षेत्र को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। अब राज्य में कोयले से रसोई गैस (LPG जैसी गैस) बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने प्रदेश की दो कोयला खदानों को खनन के साथ-साथ गैस निर्माण की अनुमति दे दी है।

यह परियोजना न केवल ऊर्जा उत्पादन के नए रास्ते खोलेगी, बल्कि गैस आपूर्ति को भी मजबूत बनाएगी।

अडानी समूह को मिली बड़ी जिम्मेदारी

सिंगरौली क्षेत्र की महान और गोंडबहेरा उज्जैनी पूर्व कोयला खदानें अडानी समूह के स्वामित्व में हैं। इन्हीं खदानों में कोयले से गैस बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

आने वाले दो वर्षों में यहां उत्खनन और गैस उत्पादन दोनों शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इससे प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

कैसे बनेगी कोयले से गैस

कोयले से गैस बनाने के लिए कंपनियों को अलग से संयंत्र स्थापित करने होंगे। इन संयंत्रों में कोयले को एक निर्धारित तापमान पर प्रोसेस किया जाएगा, जिसे “कोल गैसीफिकेशन” कहा जाता है।

इस प्रक्रिया में:

  • कोयले को उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है
  • उसमें से गैस निकाली जाती है
  • इस गैस को शुद्ध कर ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है

यह गैस रसोई गैस के विकल्प के रूप में उपयोग की जा सकती है।

पहली बार कोयला कंपनियां बनाएंगी गैस

यह पहली बार होगा जब कोयला कंपनियां स्वयं कोयले से गैस निर्माण का कार्य करेंगी। अब तक कोयले का उपयोग मुख्य रूप से बिजली उत्पादन के लिए किया जाता था, लेकिन इस नई पहल से ऊर्जा के उपयोग का दायरा बढ़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।

बिजली संयंत्रों को भी मिलेगा फायदा

मध्य प्रदेश में उत्पादित कोयले की आपूर्ति पहले से ही कई बड़े बिजली संयंत्रों को की जाती है।

इनमें प्रमुख हैं:

  • बिरसिंहपुर
  • अमरकंटक
  • सारणी
  • खंडवा

इसके अलावा केंद्र सरकार के सिंगरौली, गाडरवारा और खरगोन स्थित बिजली संयंत्र भी इस आपूर्ति से जुड़े हैं।

सासन, बीना और एनबी पावर सिंगरौली जैसे बड़े प्लांट्स को भी कोयला उपलब्ध कराया जाता है। अब गैस उत्पादन शुरू होने से इन संयंत्रों को भी अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।

रिलायंस की मीथेन परियोजना पहले से सक्रिय

शहडोल क्षेत्र में रिलायंस द्वारा कोल बेड मीथेन (CBM) परियोजना पहले से संचालित की जा रही है। यह परियोजना लगभग 997 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है।

इस परियोजना के तहत:

  • करीब 300 कुओं से गैस निकाली जा रही है
  • यह प्राकृतिक गैस के उत्पादन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है

यह परियोजना देश की प्रमुख अपारंपरिक ऊर्जा परियोजनाओं में से एक मानी जाती है।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

कोयले से गैस निर्माण की यह पहल भारत की ऊर्जा नीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाती है।

इससे:

  • गैस आयात पर निर्भरता कम होगी
  • घरेलू उत्पादन बढ़ेगा
  • ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भविष्य में भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सकती है।

पर्यावरण और चुनौतियां

हालांकि कोयले से गैस बनाना एक उपयोगी विकल्प है, लेकिन इसके साथ कुछ पर्यावरणीय चुनौतियां भी जुड़ी हैं।

  • कोयले का उपयोग प्रदूषण बढ़ा सकता है
  • गैसीफिकेशन प्रक्रिया में उत्सर्जन का ध्यान रखना होगा
  • संयंत्रों के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता होगी

सरकार और कंपनियों को इन पहलुओं पर विशेष ध्यान देना होगा।

स्थानीय रोजगार और विकास को मिलेगा बढ़ावा

इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

  • नए संयंत्रों के निर्माण से रोजगार मिलेगा
  • तकनीकी और गैर-तकनीकी नौकरियों में वृद्धि होगी
  • आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी

इससे सिंगरौली और आसपास के क्षेत्रों में विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

भविष्य की संभावनाएं

यदि यह परियोजना सफल होती है, तो इसे अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।

भारत में कोयले के विशाल भंडार हैं और उनका उपयोग गैस उत्पादन में करना एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

यह तकनीक भविष्य में:

  • स्वच्छ ईंधन विकल्प दे सकती है
  • औद्योगिक उपयोग बढ़ा सकती है
  • ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दे सकती है

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश में कोयले से रसोई गैस बनाने की यह पहल ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम है। इससे न केवल गैस उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।

हालांकि, इसके साथ जुड़ी पर्यावरणीय और तकनीकी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित विकास की दिशा में काम करना जरूरी होगा।

यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो यह पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकती है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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