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MP TET विवाद पर सरकार और अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा की वार्ता बेनतीजा, 18 अप्रैल को भोपाल में “मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा” का ऐलान

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Published On: 16 April 2026
MP TET
— सरकार और अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा की वार्ता रही बेनतीजा। मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ।

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MP TET विवाद पर सरकार और अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा की वार्ता बेनतीजा, 18 अप्रैल को भोपाल में “मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा” का ऐलान

MP में TET (Teacher Eligibility Test) परीक्षा और वरिष्ठता से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा विवाद अभी भी अनसुलझा बना हुआ है। भोपाल में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा, मध्यप्रदेश और राज्य सरकार के बीच हुई अहम वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक चली चर्चा के बावजूद मांगों पर सहमति नहीं बन पाई, जिससे शिक्षकों में असंतोष और बढ़ गया है।

दो चरणों में हुई महत्वपूर्ण वार्ता

मोर्चा के मीडिया प्रभारी उपेन्द्र कौशल ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार के आमंत्रण पर यह वार्ता दो चरणों में आयोजित की गई। पहले चरण में प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से उनके निवास पर हुई। इसके बाद दूसरे चरण की बैठक लोक शिक्षण संचालनालय में आयोजित की गई, जिसमें आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह, संचालक के. के. द्विवेदी और संयुक्त संचालक धर्मेन्द्र शर्मा मौजूद रहे।

इन दोनों बैठकों में मोर्चा के प्रतिनिधियों ने अपनी प्रमुख मांगें मजबूती से रखीं, लेकिन किसी भी मुद्दे पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका।

प्रमुख मांगें और विवाद के मुद्दे

वार्ता के दौरान अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने दो प्रमुख मांगें रखीं। पहली मांग 2 मार्च को जारी TET परीक्षा संबंधी आदेश को निरस्त करने की थी। दूसरी मांग नवीन शिक्षक संवर्ग की सेवा अवधि की गणना उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से किए जाने को लेकर थी।

मोर्चा का कहना है कि ये दोनों फैसले शिक्षकों के हितों को प्रभावित करते हैं, इसलिए इन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। हालांकि सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई स्पष्ट या ठोस निर्णय नहीं दिया गया।

सरकार का रुख और दिया गया आश्वासन

सरकार की ओर से बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि TET परीक्षा से जुड़े मुद्दे पर फिलहाल विचार किया जा रहा है। आयुक्त लोक शिक्षण ने बताया कि इस विषय पर शासन स्तर पर पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर करने की प्रक्रिया पर विचार चल रहा है।

इसके साथ ही यह भी कहा गया कि इस मामले में विधि विशेषज्ञों से राय ली जा रही है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पुनर्विचार याचिका कब तक दायर की जाएगी या इस पर अंतिम निर्णय कब लिया जाएगा।

इसके अलावा विभाग की ओर से एक विशेष सेल (सेल/प्रकोष्ठ) गठित करने का आश्वासन भी दिया गया है, जो टीईटी से संबंधित सभी मामलों की स्थिति को स्पष्ट करेगा और भविष्य में निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाएगा।

निर्णय न होने से बढ़ी नाराजगी

वार्ता के बेनतीजा रहने से अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों में निराशा देखी गई। संगठन का कहना है कि लंबे समय से वे अपनी मांगों को लेकर सरकार से संवाद कर रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है, जबकि कोई ठोस समाधान नहीं निकलता।

मोर्चा ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से स्पष्ट निर्णय न लेना शिक्षकों के भविष्य को अनिश्चितता में डाल रहा है।

18 अप्रैल को भोपाल में बड़ा आंदोलन

सरकार की ओर से किसी प्रकार का ठोस निर्णय न आने के बाद मोर्चा ने अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। संगठन ने घोषणा की है कि 18 अप्रैल को राजधानी भोपाल में “मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा” निकाली जाएगी।

इसके साथ ही धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम भी पहले से तय योजना के अनुसार आयोजित किया जाएगा। मोर्चा का कहना है कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन जब तक उनकी मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा।

आंदोलन की तैयारी तेज

मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा और प्रदर्शन को लेकर मोर्चा ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों और सदस्यों को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं ताकि अधिक से अधिक शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

मोर्चा का दावा है कि इस आंदोलन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल होंगे और सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।

बैठक में मौजूद रहे प्रमुख सदस्य

इस महत्वपूर्ण बैठक में मोर्चा के कई वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे, जिनमें संयोजक मंडल के सदस्य राकेश दुबे, जगदीश यादव, भरत पटेल, मनोहर प्रसाद दुबे, डी. के. सिगौर, परमानंद डेहरिया, राकेश नायक, शिल्पी सिवान, राकेश पटेल, रमाशंकर पाण्डेय, शालिक राम चौधरी, परसराम कपाड़िया, विश्वेश्वर झारिया, सत्येन्द्र तिवारी और राजेश मिश्रा सहित कई अन्य प्रतिनिधि शामिल थे।

निष्कर्ष

TET परीक्षा और शिक्षक सेवा शर्तों को लेकर सरकार और मोर्चा के बीच चल रहा गतिरोध फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा है। वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद अब आंदोलन का रास्ता अपनाया गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब 18 अप्रैल को भोपाल में प्रस्तावित मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा और प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।

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