MP TET Controversy: भोपाल में 18 अप्रैल को हजारों शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, TET और सेवा गणना नियमों का विरोध तेज
मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर चल रहा विवाद अब और तेज हो गया है। प्रदेशभर के हजारों सरकारी स्कूल शिक्षक 18 अप्रैल को भोपाल में होने वाली “मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा” और धरना-सभा में शामिल होने जा रहे हैं। यह बड़ा आयोजन गोविंदपुरा स्थित भेल दशहरा मैदान में किया जाएगा, जहां सुबह 11 बजे से प्रदर्शन की शुरुआत होगी।
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश ने पूरे राज्य के शिक्षकों से “भोपाल चलो” का आह्वान किया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस प्रदर्शन में 50 हजार से अधिक शिक्षक शामिल हो सकते हैं, जिससे यह राज्य के बड़े शिक्षक आंदोलनों में से एक बन सकता है।
TET अनिवार्यता और सेवा गणना नियमों के खिलाफ विरोध
इस आंदोलन की मुख्य वजह शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किए जाने का आदेश और सेवा गणना के नए फार्मूले को बताया जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय उनके लंबे समय से चले आ रहे सेवा अधिकारों के खिलाफ है।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें हैं:
- TET परीक्षा की अनिवार्यता का आदेश तत्काल निरस्त किया जाए
- नवीन शिक्षक संवर्गों की सेवा अवधि की गणना उनकी पहली नियुक्ति तिथि से की जाए
शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने अपनी नियुक्ति के समय सभी आवश्यक योग्यता पूरी की थी, ऐसे में 20 से 25 साल की सेवा के बाद अचानक नई शर्तें लागू करना उचित नहीं है।
8 अप्रैल के प्रदर्शन के बाद 18 अप्रैल को बड़ा आंदोलन
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के अनुसार, इससे पहले 8 अप्रैल को DPI कार्यालय के सामने और 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों के बाद अब 18 अप्रैल को भोपाल में राज्य स्तरीय विशाल प्रदर्शन की तैयारी की गई है।
संयुक्त मोर्चा का दावा है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन इसमें शिक्षकों की बड़ी और संगठित भागीदारी देखने को मिलेगी।
सरकार के फैसलों पर शिक्षकों की नाराजगी
शिक्षक संगठनों का आरोप है कि सरकार ने पहले ही सेवा गणना को नियुक्ति तिथि से न जोड़कर आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। अब TET को अनिवार्य करके शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव बनाया जा रहा है।
शिक्षकों का यह भी कहना है कि इससे उनकी भविष्य की पेंशन और ग्रेच्युटी पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। कई शिक्षकों को चिंता है कि सेवा शर्तों में बदलाव से उनके रिटायरमेंट लाभ भी प्रभावित हो सकते हैं।
प्रभावित शिक्षकों की स्थिति
संयुक्त मोर्चा के अनुसार, इस आदेश से प्रभावित होने वाले लगभग 90 से 95 प्रतिशत शिक्षक वे हैं जो “नवीन शैक्षणिक संवर्ग” से जुड़े हैं। ये वे शिक्षक हैं जिन्होंने पहले अध्यापक के रूप में सेवा शुरू की थी और बाद में शिक्षक संवर्ग में शामिल हुए।
इन शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने अल्प वेतनमान से अपनी सेवा की शुरुआत की थी और वर्षों से शिक्षा व्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। ऐसे में अचानक नियमों में बदलाव उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रभावित कर रहा है।
TET अनिवार्यता पर विवाद क्यों बढ़ा?
शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब इन शिक्षकों की भर्ती हुई थी, तब उस समय की सभी शर्तें पूरी की गई थीं। लेकिन अब 20-25 साल बाद नई परीक्षा को अनिवार्य करना उनके लिए अन्यायपूर्ण है।
उनका यह भी तर्क है कि लंबे अनुभव वाले शिक्षकों से फिर से परीक्षा की मांग करना उनकी सेवा और अनुभव की अनदेखी है।
भोपाल में बड़े प्रदर्शन की तैयारी
18 अप्रैल को होने वाले इस प्रदर्शन की तैयारी बड़े स्तर पर की जा रही है। विभिन्न जिलों से शिक्षक भोपाल पहुंचने की योजना बना रहे हैं। भेल दशहरा मैदान में होने वाली यह सभा सुबह 11 बजे शुरू होगी।
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के कई पदाधिकारियों ने शिक्षकों से शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की अपील की है। नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक है।
आंदोलन का संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आंदोलन बड़े पैमाने पर होता है, तो इसका असर राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। हजारों शिक्षकों की भागीदारी से स्कूलों में अस्थायी रूप से शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
हालांकि, शिक्षक संगठन इसे एक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण विरोध बता रहे हैं, जिसका उद्देश्य केवल अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में TET अनिवार्यता और सेवा गणना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 18 अप्रैल को भोपाल में होने वाला यह बड़ा प्रदर्शन शिक्षकों की नाराजगी और मांगों का प्रतीक बन गया है। अब सभी की नजर सरकार की प्रतिक्रिया और इस आंदोलन के आगे के प्रभावों पर टिकी हुई है।
