MP TET Case: शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्यता वापस लेने की मांग पर अड़े शिक्षक, DPI अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर किया इनकार
MP में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय कार्यालय में हुई, जिसमें राज्य के विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपनी कई मांगों को अधिकारियों के समक्ष रखा।
बैठक के दौरान शिक्षकों ने मुख्य रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग उठाई। हालांकि, अधिकारियों ने इस मांग को स्वीकार करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया और कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर इनकार
लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों ने बैठक में साफ कहा कि TET अनिवार्यता को हटाना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए बताया कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता कानूनी रूप से बाध्यकारी है, और इसे सरकार या विभागीय स्तर पर बदला नहीं जा सकता।
हालांकि, अधिकारियों ने यह भी कहा कि वे शिक्षकों की भावनाओं और उनके मुद्दों को पूरी गंभीरता से समझते हैं और उनकी समस्याओं को उच्च स्तर पर पहुंचाने में पूरा सहयोग करेंगे। इसी कारण बैठक में मौजूद शिक्षकों को आश्वासन दिया गया कि उनके आक्रोश और चिंताओं को संबंधित मंचों तक पहुंचाया जाएगा।
बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा
इस बैठक में केवल TET अनिवार्यता ही नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इसमें राज्य शिक्षा सेवा में नियुक्त नए शिक्षक संवर्ग की सेवा अवधि की गणना, उच्च पदों पर प्रभार देने की प्रक्रिया में तेजी लाने, और विभिन्न प्रशासनिक सुधारों से जुड़े विषय शामिल थे।
इसके अलावा जनजातीय कार्य विभाग की शालाओं को स्कूल शिक्षा विभाग में मिलाने (संविलियन) और अनुकम्पा नियुक्ति के मामलों में नियमों को सरल बनाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। शिक्षकों ने इन सभी विषयों पर शीघ्र समाधान की मांग की।
सेवा अवधि गणना को लेकर शिक्षकों की नाराजगी
शिक्षक संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने बैठक में अपनी बात रखते हुए कहा कि वर्ष 2018 में शिक्षाकर्मी, गुरुजी और संविदा शाला शिक्षक संवर्ग का राज्य शिक्षा सेवा में संविलियन किया गया था। लेकिन इसके बाद उनकी पिछली लगभग 20 वर्षों की सेवा को शून्य मान लिया गया।
उन्होंने बताया कि इस निर्णय के कारण वरिष्ठता, ग्रेच्युटी, अर्जित अवकाश और पेंशन जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं में शिक्षकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्तमान में सेवा अवधि की गणना केवल 1 जुलाई 2018 से की जा रही है, जिससे हजारों शिक्षकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
शिक्षकों की मांग: पुरानी सेवा को मान्यता दी जाए
शिक्षक संगठनों का कहना है कि उनकी वर्षों की सेवा को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि कई शिक्षकों ने 15 से 20 वर्षों तक शिक्षा विभाग में सेवा दी है, लेकिन संविलियन के बाद उन्हें नए सिरे से नियुक्त मान लिया गया है।
इससे न केवल उनकी वरिष्ठता प्रभावित हुई है, बल्कि आर्थिक लाभों में भी भारी नुकसान हुआ है। संगठन ने मांग की कि पूर्व सेवा अवधि को भी मान्यता दी जाए ताकि शिक्षकों को न्याय मिल सके।
DPI अधिकारियों का रुख
लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों ने बैठक में शिक्षकों की समस्याओं को ध्यान से सुना और कहा कि वे सभी मुद्दों को गंभीरता से संबंधित उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि TET अनिवार्यता जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण कोई भी ढील देना संभव नहीं है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सभी नियमों का पालन करना आवश्यक है और किसी भी निर्णय में कानूनी बाधाओं का पालन करना अनिवार्य होगा।
शिक्षकों में मिला-जुला रुख
बैठक के बाद शिक्षकों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जहां कुछ शिक्षक संगठन अधिकारियों के आश्वासन से संतुष्ट नजर आए, वहीं कई शिक्षक TET अनिवार्यता को लेकर अब भी असंतुष्ट दिखे।
शिक्षकों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर आगे भी लगातार प्रयास जारी रखेंगे और जरूरत पड़ने पर आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जा सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर MP में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर चल रहा विवाद अभी समाप्त होता नहीं दिख रहा है। एक ओर शिक्षक संगठन इसे समाप्त करने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग और DPI अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर इसमें किसी भी बदलाव से इनकार कर रहे हैं।
फिलहाल, बैठक में भले ही शिक्षकों को कुछ मुद्दों पर आश्वासन मिला हो, लेकिन TET अनिवार्यता और सेवा अवधि गणना जैसे बड़े मुद्दों पर कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर और चर्चा और आंदोलन की संभावना बनी हुई है।
