मध्य प्रदेश का Rice मिल उद्योग संकट में, 700 से अधिक मिलें बंद होने की कगार पर
मध्य प्रदेश का Rice मिल उद्योग इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। राज्य की लगभग 1200 राइस मिलों में से करीब 700 मिलें या तो बंद हो चुकी हैं या बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। यह स्थिति उद्योग के अस्तित्व पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
मिलर्स का कहना है कि सरकार की ओर से बकाया भुगतान लंबे समय से नहीं किया गया है, जिसके कारण उनकी वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। बैंक लोन, बिजली बिल, मजदूरी और अन्य खर्चों का बोझ बढ़ने से कई मिलें डिफॉल्टर की स्थिति में पहुंच चुकी हैं।
बकाया भुगतान न मिलने से गहराया संकट
मध्य प्रदेश चावल उद्योग महासंघ के अनुसार, वर्ष 2024-25 के धान अपग्रेडेशन (सफाई और प्रोसेसिंग) का लगभग ₹170 करोड़ रुपये अब तक लंबित है।
इसके अलावा—
- बारदाने (Gunny Bags) की उपयोगिता राशि
- मिलिंग खर्च
- परिवहन लागत
- हम्माली और अन्य व्यय
इन सभी मदों को मिलाकर लगभग ₹30 करोड़ रुपये और बकाया हैं।
कुल मिलाकर यह बकाया राशि मिलर्स की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह प्रभावित कर रही है।
700 से अधिक मिलें बंद या बंद होने की कगार पर
राज्य में राइस मिलों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। लगभग 1200 मिलों में से 700 से अधिक मिलें या तो बंद हो चुकी हैं या संचालन बंद करने की स्थिति में पहुंच गई हैं।
मिलर्स का कहना है कि कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है क्योंकि पूंजी की कमी के कारण संचालन जारी रखना मुश्किल हो गया है।
मिलर्स पर बढ़ा आर्थिक दबाव, कई हुए डिफॉल्टर
बकाया भुगतान न मिलने से मिलर्स पर भारी आर्थिक दबाव बन गया है। बैंक लोन की किस्तें, बिजली बिल, कर्मचारियों की मजदूरी और रखरखाव खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
कई मिलर्स अब बैंक डिफॉल्टर की श्रेणी में आ चुके हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो वे पूरी तरह कारोबार बंद करने पर मजबूर हो जाएंगे।
सरकार से मुलाकात और आश्वासन
मध्य प्रदेश चावल उद्योग महासंघ के प्रतिनिधियों ने उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं।
मिलर्स ने बकाया राशि के जल्द भुगतान की मांग की और उद्योग को बचाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।
उप मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी सुझावों और समस्याओं का परीक्षण किया जाएगा और उचित समाधान निकाला जाएगा।
मिलिंग नीति पर उठे गंभीर सवाल
मिलर्स का कहना है कि वर्तमान मिलिंग नीति उनके लिए नुकसानदायक साबित हो रही है। मध्य प्रदेश चावल उद्योग महासंघ के अध्यक्ष आशीष अग्रवाल ने बताया कि भारतीय खाद्य मंत्रालय की टेस्ट रिपोर्ट में कई तकनीकी विसंगतियां सामने आई हैं।
उनके अनुसार—
- चावल की झड़ती (Broken Ratio) और गुणवत्ता में अंतर पाया गया
- 67% चावल जमा करने का नियम व्यावहारिक नहीं है
- टूटे चावल को कम कीमत पर बेचना पड़ता है
मिलर्स का कहना है कि अपग्रेडेशन राशि का भुगतान नहीं होने से उनका नुकसान और बढ़ गया है।
मिलिंग कार्य में भारी गिरावट
वर्तमान स्थिति के कारण राज्य में राइस मिलिंग कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अब तक केवल लगभग 5% मिलिंग ही पूरी हो पाई है।
मिलर्स की अनिच्छा और वित्तीय संकट के कारण वर्ष 2025-26 की धान मिलिंग पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
इससे सरकार को भी अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सरकार को भी बढ़ रहा आर्थिक नुकसान
मिलिंग प्रक्रिया धीमी होने से सरकार पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अनुमान के अनुसार हर महीने लगभग ₹200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है, जिसमें शामिल हैं—
- ब्याज भुगतान
- भंडारण शुल्क
- सूखत (wastage) का नुकसान
इस स्थिति से राज्य की खाद्य आपूर्ति प्रणाली पर भी दबाव बढ़ रहा है।
धान भंडारण पर संकट और खराब होने का खतरा
राज्य में ओपन कैप में रखी गई हजारों करोड़ रुपये की धान अब जोखिम में है। समय पर मिलिंग न होने के कारण धान के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
बारिश के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। यदि धान समय पर प्रोसेस नहीं हुई तो भारी नुकसान की संभावना है।
रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
राइस मिल उद्योग केवल उत्पादन का क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह हजारों लोगों की आजीविका का भी प्रमुख साधन है।
इस संकट के कारण—
- हजारों मजदूरों के रोजगार पर खतरा
- ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन प्रभावित
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर
- छोटे व्यवसायों पर भी असर
मिलर्स का कहना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो यह संकट व्यापक आर्थिक समस्या बन सकता है।
नीति सुधार और तत्काल भुगतान की मांग
मध्य प्रदेश चावल उद्योग महासंघ ने सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं—
- सभी लंबित भुगतान तुरंत जारी किए जाएं
- मिलिंग नीति में सुधार किया जाए
- अपग्रेडेशन राशि का पुनर्मूल्यांकन हो
- उद्योग को राहत पैकेज दिया जाए
मिलर्स का कहना है कि बिना नीति सुधार के इस उद्योग को बचाना मुश्किल होगा।
भविष्य की अनिश्चितता
यदि स्थिति इसी तरह बनी रही तो राइस मिल उद्योग पूरी तरह ठप हो सकता है। इससे न केवल उद्योग प्रभावित होगा बल्कि राज्य की कृषि व्यवस्था और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला भी संकट में आ सकती है।
मिलर्स का कहना है कि यह केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि एक संरचनात्मक संकट बन चुका है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश का राइस मिल उद्योग आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। बकाया भुगतान, नीति विवाद और बढ़ते खर्चों ने मिलर्स को कठिन स्थिति में ला दिया है।
सरकार की ओर से समाधान का आश्वासन जरूर मिला है, लेकिन यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट हजारों लोगों की आजीविका और राज्य की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है।
