MP PWD Transfers: पीडब्ल्यूडी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, चार वरिष्ठ इंजीनियरों के तबादले, वर्मा बने भोपाल डिवीजन के नए सीई
MP में लोक निर्माण विभाग (PWD) में रविवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला। राज्य सरकार ने छुट्टी के दिन विभाग में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए चार वरिष्ठ सुपरिंटेंडिंग इंजीनियरों (SE) के तबादले किए हैं, जो वर्तमान में प्रभारी चीफ इंजीनियर (CE) के पद पर कार्यरत थे। इस फेरबदल को विभागीय स्तर पर काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई प्रमुख डिवीजनों की जिम्मेदारियां बदल दी गई हैं।
इस बदलाव के तहत कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि कुछ अधिकारियों की वापसी और स्थानांतरण भी किया गया है। सरकार के इस कदम से पीडब्ल्यूडी के संचालन और प्रबंधन में नए समीकरण बनने की संभावना है।
गोपाल सिंह की विभाग में वापसी
इस प्रशासनिक फेरबदल में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक गोपाल सिंह की वापसी है। अभी तक वह मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे। अब उन्हें वापस लोक निर्माण विभाग में बुलाया गया है और उन्हें ईएनसी (Engineer-in-Chief) कार्यालय, पीडब्ल्यूडी मुख्यालय भोपाल में प्रभारी चीफ इंजीनियर के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उनकी वापसी को विभागीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, क्योंकि वे लंबे समय से सड़क विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्यों में अनुभव रखते हैं।
रीवा से एससी वर्मा को भोपाल डिवीजन की जिम्मेदारी
इस फेरबदल में एससी वर्मा को भी नई जिम्मेदारी दी गई है। पहले वे रीवा परिक्षेत्र में भवन शाखा के प्रभारी चीफ इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। अब उन्हें भोपाल परिक्षेत्र का प्रभारी चीफ इंजीनियर बनाया गया है।
भोपाल डिवीजन राज्य का एक प्रमुख प्रशासनिक और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र माना जाता है, इसलिए इस नियुक्ति को काफी अहम माना जा रहा है। उम्मीद है कि वर्मा अपने अनुभव के आधार पर इस डिवीजन में विकास कार्यों को गति देंगे।
संजय मस्के को राष्ट्रीय राजमार्ग की जिम्मेदारी
भोपाल परिक्षेत्र में कार्यरत संजय मस्के को अब राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) परिक्षेत्र भोपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह डिवीजन राज्य में हाईवे निर्माण और रखरखाव से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों को संभालता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं, ऐसे में मस्के की यह नियुक्ति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, सरकार हाईवे प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदारी दे रही है।
आनंद प्रकाश राणे का जबलपुर में स्थानांतरण
इस फेरबदल में आनंद प्रकाश राणे को भी नई जिम्मेदारी दी गई है। वे अभी तक राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र भोपाल में प्रभारी चीफ इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। अब उन्हें जबलपुर परिक्षेत्र का प्रभारी चीफ इंजीनियर बनाया गया है।
जबलपुर क्षेत्र में चल रही सड़क और निर्माण परियोजनाओं को देखते हुए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि राणे अपने अनुभव से यहां विकास कार्यों को गति देंगे।
पांच दिन पहले ENC स्तर पर भी बड़ा बदलाव
इससे पहले, मात्र पांच दिन पहले ही राज्य सरकार ने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर-इन-चीफ (ENC) केपीएस राणा को उनके पद से हटा दिया था। उनकी जगह आरएल वर्मा को नया ENC नियुक्त किया गया है।
केपीएस राणा को बाद में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) में इंजीनियर-इन-चीफ के पद पर भेजा गया है। यह बदलाव भी राज्य में चल रहे बड़े प्रशासनिक पुनर्गठन का हिस्सा माना जा रहा है।
MPRDC से विभाग में वापसी और नई रणनीति
गोपाल सिंह की MPRDC से वापसी को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार सड़क निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अनुभवी अधिकारियों को मुख्य विभाग में वापस ला रही है।
इस कदम से पीडब्ल्यूडी में निर्णय प्रक्रिया तेज होने और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
तबादलों की पूरी सूची
इस प्रशासनिक फेरबदल के तहत हुए प्रमुख तबादले इस प्रकार हैं:
- गोपाल सिंह: MPRDC से वापस पीडब्ल्यूडी मुख्यालय भोपाल में प्रभारी सीई (ईएनसी कार्यालय)
- एससी वर्मा: रीवा भवन परिक्षेत्र से भोपाल परिक्षेत्र प्रभारी सीई
- संजय मस्के: भोपाल परिक्षेत्र से राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र भोपाल
- आनंद प्रकाश राणे: राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र भोपाल से जबलपुर परिक्षेत्र प्रभारी सीई
विभागीय स्तर पर बढ़ी हलचल
इस बड़े फेरबदल के बाद पीडब्ल्यूडी में हलचल बढ़ गई है। वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव से विभागीय कार्यप्रणाली में नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में और भी प्रशासनिक फेरबदल संभव हैं।
सरकार का उद्देश्य राज्य में चल रही सड़क और निर्माण परियोजनाओं को तेज गति देना और बेहतर निगरानी सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
